नई दिल्ली,28 नवंबर (युआईटीवी)- चक्रवाती तूफान ‘दित्वाह’ तेजी से दक्षिण–पश्चिम बंगाल की खाड़ी और श्रीलंका के तटीय इलाकों की ओर बढ़ रहा है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने शुक्रवार को ताजा चेतावनी जारी करते हुए कहा कि तूफान ने पिछले छह घंटों में लगभग 10 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर और उत्तर–पश्चिम दिशा में बढ़त बनाई है। इसकी तीव्रता बढ़ने के साथ दक्षिण भारत के कई राज्यों में भारी बारिश,तेज हवाओं और समुद्री उथल-पुथल की स्थिति पैदा हो सकती है। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और तटीय क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।
आईएमडी के अनुसार,चक्रवात का केंद्र शुक्रवार दोपहर श्रीलंका के त्रिंकोमाली से लगभग 50 किमी दक्षिण,बैटिकलोआ से 70 किमी उत्तर–पश्चिम और हंबनटोटा से लगभग 220 किमी उत्तर दिशा में स्थित था। भारत की बात करें तो यह पुडुचेरी से लगभग 460 किमी दक्षिण–पूर्व और चेन्नई से लगभग 560 किमी दक्षिण–पूर्व में था। चक्रवात लगातार बंगाल की खाड़ी के गर्म समुद्री पानी की वजह से ऊर्जा प्राप्त कर रहा है,जिसके कारण इसके और अधिक मजबूत होने की आशंका जताई जा रही है।
मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि तूफान 30 नवंबर की सुबह तक उत्तरी तमिलनाडु,पुडुचेरी और दक्षिण आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों के पास पहुँच सकता है। इस दौरान भारी बारिश और तेज हवाओं के साथ समुद्री स्थिति अत्यंत उग्र हो सकती है। विभाग ने कई राज्यों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया है,ताकि प्रशासन पहले से आवश्यक तैयारियाँ सुनिश्चित कर सके।
तमिलनाडु और पुडुचेरी में शुक्रवार और शनिवार को भारी से लेकर अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई गई है। कुछ इलाकों में वर्षा की मात्रा 20 सेंटीमीटर से भी अधिक दर्ज की जा सकती है। चेन्नई,कुड्डालोर,नागपट्टिनम,विलुपुरम,पेरंबलूर और तिरुवरूर जैसे जिलों में विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। हालाँकि,30 नवंबर को बारिश थोड़ी कम होने की संभावना है,लेकिन अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा की स्थिति बनी रह सकती है।
दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा क्षेत्रों में शुक्रवार शाम से ही बारिश की शुरुआत हो सकती है। यहाँ 29 और 30 नवंबर को भारी बारिश का अनुमान है,जबकि 1 और 2 दिसंबर को भी वर्षा का दौर थमने की संभावना कम है। आंध्रप्रदेश के तटीय जिलों—नेल्लोर,प्रकाशम और श्रीकाकुलम में हवा की गति के कारण जनजीवन प्रभावित हो सकता है,वहीं कई निचले क्षेत्र जलभराव की चपेट में आ सकते हैं।
आईएमडी ने केरल और लक्षद्वीप के लिए भी चेतावनी जारी की है,जहाँ अगले 48 घंटों में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। लक्षद्वीप के आसपास समुद्र में ऊँची लहरें उठने और हवाओं के तेज होने की वजह से यहाँ मछुआरों और समुद्री गतिविधियों पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं। तेलंगाना में भी 30 नवंबर और 1 दिसंबर को भारी वर्षा के आसार हैं,खासकर महबूबनगर,नलगोंडा और हैदराबाद के आसपास के क्षेत्रों में मौसम का प्रभाव देखने को मिल सकता है।
तूफान ‘दित्वाह’ के कारण तटीय क्षेत्रों में हवा की रफ्तार 60 से 100 किमी प्रति घंटा तक पहुँचने की आशंका है। दक्षिण तमिलनाडु,पुडुचेरी,श्रीलंका के उत्तरी तटीय भाग और दक्षिण आंध्र प्रदेश के तटों पर ‘गेल–फोर्स’ हवाएँ चलेंगी,जो पेड़ों को उखाड़ सकती हैं,बिजली के खंभों को क्षतिग्रस्त कर सकती हैं और कच्चे मकानों को नुकसान पहुँचा सकती हैं। प्रशासन ने तटीय क्षेत्रों में बसे कमजोर इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की तैयारी शुरू कर दी है।
आईएमडी ने 1 दिसंबर तक समुद्र में किसी भी प्रकार की मछली पकड़ने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। जो नौकाएँ अभी समुद्र में हैं,उन्हें तत्काल तट की ओर लौटने का निर्देश दिया गया है। मछुआरों को चेतावनी दी गई है कि समुद्री परिस्थिति अत्यंत खराब हो सकती है और समुद्र में रहना जीवन के लिए जोखिमभरा साबित हो सकता है। तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के बंदरगाहों—चेन्नई,नागपट्टिनम,तूतीकोरिन और विशाखापत्तनम में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है।
स्थानीय प्रशासन ने लोगों को घरों से बाहर निकलने में सावधानी बरतने,अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम विभाग की ताजा परामर्श पर नजर बनाए रखने की अपील की है। बिजली कटौती,सड़क अवरोध,पेड़ों के गिरने और जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकारों ने विशेष टीमें तैनात की हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की कई टीमें भी प्रभावित क्षेत्रों में भेज दी गई हैं।
तूफान ‘दित्वाह’ अभी अपनी पूरी शक्ति के साथ आगे बढ़ रहा है। अगले 48 से 72 घंटे दक्षिण भारत के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। मौसम विभाग की अपील है कि लोग घबराएँ नहीं,लेकिन पूरी सतर्कता और तैयारी के साथ रहें ताकि किसी भी संभावित खतरे से निपटा जा सके।

