ब्लाइंड टी20 विश्व कप जीतने वाली भारतीय महिला टीम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुलाकात की (तस्वीर क्रेडिट@HitanandSharma)

भारतीय महिला दृष्टिबाधित टीम ने रचा इतिहास,नेपाल को हराकर जीता पहला ब्लाइंड टी20 विश्व कप,पीएम मोदी ने खिलाड़ियों को दी बधाई

नई दिल्ली,28 नवंबर (युआईटीवी)- भारतीय खेल जगत के लिए यह गर्व और उत्साह से भर देने वाला क्षण है। भारतीय महिला दृष्टिबाधित क्रिकेट टीम ने अपने निरंतर प्रयास,अनुशासन और अदम्य साहस के बल पर इतिहास रच दिया है। टीम ने नेपाल को फाइनल में शानदार तरीके से हराकर पहला ब्लाइंड टी20 विश्व कप अपने नाम किया। यह जीत न केवल भारतीय क्रिकेट इतिहास में एक सुनहरा अध्याय जोड़ती है,बल्कि यह भी साबित करती है कि संकल्प और कड़ी मेहनत हर बाधा को पीछे छोड़ सकती है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खिलाड़ियों से मुलाकात कर उन्हें हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।

प्रधानमंत्री आवास पर आयोजित इस विशेष भेंट के दौरान पीएम मोदी ने सभी खिलाड़ियों की प्रशंसा की और उनके साथ विश्व कप की ट्रॉफी के साथ तस्वीर खिंचवाई। भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी खुशी प्रधानमंत्री के साथ साझा करते हुए उन्हें टीम के हस्ताक्षरित बल्ले की भेंट दी। इस अवसर पर पीएम मोदी ने भी गेंद पर अपना हस्ताक्षर किया,जो खिलाड़ियों के लिए किसी सम्मान से कम नहीं था। मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री ने एक-एक करके सभी खिलाड़ियों से बातचीत की और उनके अनुभव,चुनौतियों और फाइनल मैच से जुड़े भावनात्मक पलों के बारे में जाना। सभी खिलाड़ी इस मुलाकात के दौरान बेहद सहज और उत्साहित नजर आईं।

मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी खिलाड़ियों को अपने हाथों से मिठाई खिलाई,जो उनके सम्मान और स्नेह का प्रतीक था। यह पल खिलाड़ियों के लिए हमेशा यादगार रहेगा,क्योंकि पहली बार किसी भारतीय महिला दृष्टिबाधित टीम ने विश्व कप खिताब हासिल किया है और प्रधानमंत्री से सीधा संवाद इस उपलब्धि को और भी खास बना गया।

भारतीय क्रिकेट में यह सफलता ऐसे समय आई है,जब अभी कुछ ही सप्ताह पहले भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने भी वनडे विश्व कप जीतकर देश का गौरव बढ़ाया था। 2 नवंबर को दक्षिण अफ्रीका को हराकर भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने पहली बार विश्व खिताब जीता था। ठीक 21 दिन बाद दृष्टिबाधित महिला क्रिकेट टीम की इस उपलब्धि ने भारत की क्रिकेट क्षमता और विविधता को नई ऊँचाई दी है। यह साबित करता है कि भारत केवल मुख्यधारा क्रिकेट में ही नहीं,बल्कि हर श्रेणी और हर स्तर पर तेजी से एक मजबूत क्रिकेट महाशक्ति बन रहा है।

भारतीय दृष्टिबाधित महिला क्रिकेट टीम का इस टूर्नामेंट में प्रदर्शन शुरुआत से ही शानदार रहा। टीम ने सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया को हराया था,जबकि नेपाल ने पाकिस्तान को मात देकर फाइनल में जगह बनाई थी। भारत ने पूरे टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं हारा,जो उसके जज़्बे और तैयारी का प्रमाण है। लीग मैचों में भारत ने श्रीलंका को 10 विकेट से,ऑस्ट्रेलिया को 209 रन से,नेपाल को 85 रन से,अमेरिका को 10 विकेट से और पाकिस्तान को 8 विकेट से हराया। हर मैच में टीम का दबदबा स्पष्ट रूप से नजर आया और खिलाड़ियों की फिटनेस,रणनीति और टीमवर्क ने सभी को प्रभावित किया।

कोलंबो में खेले गए रोमांचक फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने टॉस जीतकर पहले फील्डिंग करने का फैसला किया। नेपाल की टीम ने निर्धारित 20 ओवर में 5 विकेट खोकर 114 रन बनाए। यह स्कोर साधारण दिखाई देता था,लेकिन फाइनल का दबाव हमेशा दोनों टीमों पर रहता है। भारतीय खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट गेंदबाजी और फील्डिंग से विपक्षी टीम को खुलकर रन बनाने का मौका नहीं दिया। लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए मात्र 12.1 ओवर में जीत हासिल कर ली और 7 विकेट से फाइनल अपने नाम किया। यह जीत इस बात का प्रमाण है कि भारतीय टीम न केवल तकनीक और कौशल में,बल्कि मानसिक मजबूती में भी अपने प्रतिद्वंद्वियों से काफी आगे है।

इस टूर्नामेंट में भारत,नेपाल,पाकिस्तान,श्रीलंका,ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका की टीमें शामिल थीं। प्रतियोगिता 21 नवंबर से भारत में शुरू हुई थी और फाइनल कोलंबो में खेला गया। प्रतियोगिता ने दृष्टिबाधित क्रिकेटरों की प्रतिभा,समर्पण और खेल भावना को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया।

इस ऐतिहासिक जीत ने लाखों भारतीयों को प्रेरित किया है और दिव्यांगजनों की क्षमताओं पर विश्वास को और मजबूत किया है। भारतीय महिला दृष्टिबाधित टीम का यह स्वर्णिम अध्याय आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल रहेगा कि खेल में कोई बाधा बहुत बड़ी नहीं होती। सरकार,खेल मंत्रालय और विभिन्न संगठनों के समर्थन के साथ,भारत में दृष्टिबाधित क्रिकेट तेज़ी से विकसित हो रहा है और यह जीत इस विकास यात्रा के लिए मील का पत्थर है।

भारत की यह जीत राष्ट्र के लिए गर्व का विषय है और खिलाड़ियों की मेहनत,जज़्बा और संघर्ष की कहानी आने वाले वर्षों तक युवाओं को प्रेरित करती रहेगी।