वॉशिंगटन,12 मार्च (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और अधिक तीखा होता दिखाई दे रहा है। इसी क्रम में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सैन्य हमलों के कारण ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुँचा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा अभियान के दौरान ईरान की नौसेना और वायु रक्षा प्रणाली लगभग पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। ट्रंप के इस बयान ने क्षेत्र में चल रहे संघर्ष को लेकर नई बहस छेड़ दी है और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है।
व्हाइट हाउस से रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर बेहद प्रभावी और अभूतपूर्व हमले किए हैं। उनके अनुसार इन हमलों का असर इतना व्यापक रहा है कि ईरान की रक्षा क्षमता गंभीर रूप से कमजोर हो गई है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना दुनिया की सबसे शक्तिशाली और सबसे सक्षम सेना है और वह पूरी ताकत के साथ अपने मिशन को अंजाम दे रही है।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की नौसेना लगभग खत्म हो चुकी है और उसके कई सैन्य अड्डे तथा हवाई अड्डे भी तबाह हो गए हैं। उन्होंने दावा किया कि ईरान की वायु रक्षा प्रणाली भी अब पहले की तरह काम नहीं कर पा रही है क्योंकि उसके एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम और रडार नेटवर्क को भारी नुकसान पहुँचाया गया है। ट्रंप के अनुसार अमेरिकी सेना ने बेहद सटीक रणनीति के साथ उन ठिकानों को निशाना बनाया है,जो ईरान की रक्षा व्यवस्था के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाते थे।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि इस अभियान के दौरान ईरान के कई शीर्ष सैन्य ढाँचे और नेतृत्व को भी गंभीर झटका लगा है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका के पास और भी कई सैन्य विकल्प मौजूद हैं और जरूरत पड़ने पर वह और अधिक सख्त कार्रवाई कर सकता है। ट्रंप के मुताबिक अभी तक अमेरिका ने कुछ लक्ष्यों को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया है,लेकिन यदि ऐसा किया गया तो ईरान के लिए अपने देश को दोबारा खड़ा करना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अमेरिका चाहे तो बहुत कम समय में ईरान के बचे हुए महत्वपूर्ण ढाँचों को भी पूरी तरह नष्ट कर सकता है। उन्होंने दावा किया कि यदि अमेरिकी सेना को पूरा आदेश दिया जाए तो वह एक घंटे के भीतर ही ऐसे हमले कर सकती है,जिससे ईरान की बुनियादी संरचना को इतना नुकसान पहुँचे कि उसे दोबारा खड़ा करने में दशकों लग जाएँ। हालाँकि,उन्होंने यह भी संकेत दिया कि फिलहाल अमेरिका ने इस स्तर की कार्रवाई करने का फैसला नहीं किया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बयान में यह भी कहा कि अभियान के दौरान ईरान की अधिकांश नौसैनिक क्षमता खत्म कर दी गई है। उनके अनुसार ईरान के कई युद्धपोत और नौसैनिक जहाज अमेरिकी हमलों में नष्ट हो चुके हैं। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने समुद्र,हवा और जमीन—तीनों स्तरों पर समन्वित तरीके से कार्रवाई की है,जिससे ईरान की सैन्य व्यवस्था को व्यापक नुकसान पहुँचा है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान की बहु-स्तरीय रक्षा प्रणाली को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। ट्रंप के मुताबिक ईरान ने अपनी सुरक्षा के लिए कई स्तरों वाली एयर डिफेंस प्रणाली तैयार की थी,लेकिन अमेरिकी तकनीक और रणनीति के सामने वह टिक नहीं पाई। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई पहले कभी नहीं देखी गई और यह अमेरिकी सेना की क्षमता को दर्शाती है।
जब पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि क्या अमेरिका ईरान की शर्तें पूरी न होने की स्थिति में भी सैन्य कार्रवाई रोक सकता है,तो उन्होंने संकेत दिया कि फिलहाल ऐसा होने की संभावना कम है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान को जितना नुकसान पहुँचाया है,वह इतिहास में शायद ही किसी देश को हुआ हो। उन्होंने यह भी कहा कि यह अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है और आने वाले समय में स्थिति के अनुसार आगे की रणनीति तय की जाएगी।
ट्रंप के इन बयानों के बाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाएँ भी तेज हो गई हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकते हैं। पश्चिम एशिया पहले ही कई राजनीतिक और सैन्य संकटों से जूझ रहा है और अमेरिका-ईरान टकराव ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि यह संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है,तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि वैश्विक राजनीति,ऊर्जा बाजार और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। खास तौर पर तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ सकती हैं।
दूसरी ओर ईरान की ओर से इन दावों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है,लेकिन ईरानी नेतृत्व पहले भी कई बार कह चुका है कि वह किसी भी हमले का जवाब देने की क्षमता रखता है। ईरान का कहना है कि उसकी रक्षा प्रणाली मजबूत है और वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा।
मौजूदा हालात में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजर इस संघर्ष पर बनी हुई है। कई देशों और वैश्विक संगठनों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील की है। हालाँकि,जिस तरह के बयान और सैन्य गतिविधियाँ सामने आ रही हैं,उससे यह संकेत मिलता है कि स्थिति फिलहाल बेहद संवेदनशील बनी हुई है।
कुल मिलाकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता यह टकराव केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं है,बल्कि यह वैश्विक राजनीति के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयासों के जरिए तनाव को कम किया जा सकता है या फिर यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है।
