मराठा नेता मनोज जरांगे पाटिल (तस्वीर क्रेडिट@SankalpPadwal)

मुंबई पुलिस ने मराठा नेता मनोज जरांगे पाटिल को नोटिस जारी किया,आजाद मैदान प्रदर्शन पर बढ़ा तनाव

मुंबई,2 सितंबर (युआईटीवी)- मराठा आरक्षण आंदोलन एक बार फिर मुंबई की सड़कों और राजनीतिक हलचलों का केंद्र बन गया है। मराठा नेता मनोज जरांगे पाटिल शुक्रवार से मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनके समर्थन में हजारों लोग लगातार मैदान में जुट रहे हैं,जिससे सरकार और पुलिस दोनों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। इसी बीच मंगलवार को मुंबई पुलिस ने अदालत के निर्देशों के बाद मनोज जरांगे पाटिल को नियमों का उल्लंघन करने के लिए औपचारिक नोटिस जारी किया। साथ ही,पुलिस ने उनके विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है।

आजाद मैदान पुलिस ने मनोज जरांगे पाटिल की कोर कमेटी को नोटिस भेजकर तत्काल मैदान खाली करने का आदेश दिया है। इस नोटिस में पाटिल द्वारा की गई उन टिप्पणियों का भी जिक्र किया गया है,जिन पर पुलिस ने आपत्ति जताई है और जिन्हें शांति-व्यवस्था के लिए खतरा माना गया है। अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन की आड़ में सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा नहीं बनने दिया जाएगा।

जरांगे पाटिल ने पिछले कई महीनों से मराठा आरक्षण की माँग को लेकर आंदोलन का बिगुल फूँक रखा है। बीते सालों में महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में उनके नेतृत्व में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन और भूख हड़ताल हो चुके हैं,लेकिन इस बार मुंबई के आजाद मैदान को आंदोलन का केंद्र चुनना राज्य सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति माना जा रहा है। बावजूद इसके,अब तक सरकार और जरांगे पाटिल के बीच कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी है। कई दौर की बातचीत विफल हो चुकी है और आंदोलनकारी आरक्षण पर ठोस निर्णय की माँग पर अड़े हुए हैं।

पुलिस का रुख भी इस बार सख्त दिखाई दे रहा है। न केवल प्रदर्शन की अनुमति को खारिज किया गया है,बल्कि जरांगे पाटिल और उनके समर्थकों को नियमों का पालन करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। नोटिस में यह भी कहा गया है कि अगर आजाद मैदान को जल्द खाली नहीं किया गया,तो पुलिस कानूनी कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगी। पुलिस के इस कदम से आंदोलनकारियों में आक्रोश है और उनके नेताओं ने इसे आंदोलन को दबाने की कोशिश करार दिया है।

इस बीच,आंदोलन से जुड़ी हिंसा की घटनाओं ने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है। रविवार को जुहू बस स्टेशन पर मराठा प्रदर्शनकारियों और बेस्ट बस यात्रियों के बीच मारपीट हो गई। यह घटना सांताक्रूज डिपो (मातेश्वरी) से चलने वाली एक बस के पास शाम करीब 7.15 बजे हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार,बस उस समय बिना स्टाफ के खड़ी थी। इसी दौरान कुछ प्रदर्शनकारी वहाँ पहुँचे और यात्रियों के साथ विवाद शुरू हो गया,जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गया। इस झगड़े में बस के शीशे तोड़ दिए गए और यात्रियों को भी चोटें आईं।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में बस के अंदर और बाहर हो रही तोड़फोड़ और मारपीट के दृश्य साफ देखे जा सकते हैं। वायरल वीडियो पर संज्ञान लेते हुए जुहू पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अज्ञात में मामला दर्ज किया। यह मनोज जरांगे पाटिल के आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों पर दर्ज किया गया पहला मामला है,जिसने पुलिस की सतर्कता और सरकार की चिंता दोनों को बढ़ा दिया है।

महाराष्ट्र सरकार की ओर से बार-बार अपील की जा रही है कि आंदोलन को शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ाया जाए और बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाए,लेकिन जरांगे पाटिल ने साफ कर दिया है कि जब तक मराठा समुदाय को आरक्षण पर ठोस और स्थायी आश्वासन नहीं मिलता,तब तक उनकी भूख हड़ताल जारी रहेगी। उनका कहना है कि आधे-अधूरे वादों और खोखले आश्वासनों से अब समुदाय संतुष्ट नहीं होगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जरांगे पाटिल का यह आंदोलन सरकार के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। एक ओर आंदोलन का केंद्र मुंबई है,जो राज्य की आर्थिक राजधानी और राजनीतिक गतिविधियों का गढ़ माना जाता है। दूसरी ओर,आंदोलन में शामिल भीड़ का आकार और उसकी तीव्रता लगातार बढ़ रही है। अगर हालात पर काबू नहीं पाया गया,तो यह न केवल कानून-व्यवस्था की समस्या बनेगा बल्कि राज्य की राजनीति को भी गहरे स्तर पर प्रभावित करेगा।

वहीं विपक्षी दलों ने इस पूरे मामले में सरकार की आलोचना तेज कर दी है। विपक्ष का कहना है कि सरकार जानबूझकर आंदोलन को लंबा खींच रही है और आरक्षण के सवाल पर कोई स्पष्ट नीति नहीं अपना रही। उनका आरोप है कि अगर सरकार वास्तव में मराठा समुदाय के हित में गंभीर होती,तो अब तक इसका समाधान निकाल लिया जाता।

मुंबई के आजाद मैदान में जारी यह आंदोलन एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है,जहाँ हर फैसला राज्य की राजनीति और समाज पर गहरा असर डाल सकता है। पुलिस की सख्ती,अदालत के निर्देश और सरकार की चुप्पी के बीच जरांगे पाटिल और उनके समर्थकों का आंदोलन आने वाले दिनों में और उग्र हो सकता है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकाल पाएगी या हालात और बिगड़कर टकराव की स्थिति पैदा करेंगे।