रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

यूक्रेन युद्ध पर रूस ने फिर दोहराई शर्तें: पुतिन बोले—यूक्रेन सेना हटाए बिना नहीं होगा सीजफायर,ट्रंप के पीस प्लान पर भी जताई सतर्कता

मॉस्को,28 नवंबर (युआईटीवी)- यूक्रेन में पिछले ढाई वर्षों से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर की जा रही कोशिशों के बीच रूस ने एक बार फिर अपनी कठोर शर्तों को दोहरा दिया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साफ कहा है कि जब तक यूक्रेन अपने सैनिकों को उन क्षेत्रों से नहीं हटाता जिन पर रूस नियंत्रण का दावा करता है,तब तक किसी भी प्रकार का सीजफायर संभव नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है,जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्ध को समाप्त करने के लिए बनाए गए 28 सूत्रीय प्रस्ताव को लेकर दुनिया भर में चर्चा जारी है और मॉस्को तथा कीव दोनों ही इसकी सामग्री पर खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं।

रूसी मीडिया के अनुसार,पुतिन किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (सीएसटीओ) के शिखर सम्मेलन में शामिल होने पहुँचे थे। इसी दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने सीजफायर को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की। पुतिन ने कहा कि रूस बिना शर्त युद्धविराम स्वीकार नहीं करेगा,क्योंकि इससे रूस की सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यह एक मूलभूत शर्त है कि कीव उन क्षेत्रों से अपनी सैन्य उपस्थिति समाप्त करे,जिन्हें रूस अपना हिस्सा मानता है।

पुतिन ने अपने बयान में कहा, “हम रोज़ाना अलग-अलग देशों से युद्ध खत्म करने के लिए फोन और संदेश प्राप्त कर रहे हैं,लेकिन मैं एक बार फिर स्पष्ट कर देता हूँ कि अगर यूक्रेनी सैनिक उन इलाकों से हट जाएँगे,जिन पर वे कब्जा जमाए हुए हैं,तो लड़ाई तुरंत बंद हो जाएगी। यदि वे ऐसा नहीं करते,तो हम सैन्य कार्रवाई जारी रखेंगे और अपने उद्देश्यों को हासिल करेंगे। बिना किसी शर्त के सीजफायर का सवाल ही नहीं उठता।’’ रूसी राष्ट्रपति ने आगे कहा कि किसी अंतिम समाधान की अभी बात करना जल्दबाजी होगी,लेकिन उनकी माँगें किसी ‘न्यूनतम आधार’ का प्रतिनिधित्व करती हैं।

सीएसटीओ सम्मेलन के दौरान पुतिन का यह बयान अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में हलचल पैदा कर रहा है,क्योंकि यह उस समय आया है,जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने विशेष दूत स्टीव विटकॉक को मॉस्को भेजकर रूसी नेतृत्व के साथ संभावित शांति रोडमैप पर चर्चा शुरू की। विटकॉक की पुतिन के साथ मुलाकात के तुरंत बाद रूसी राष्ट्रपति द्वारा इस प्रकार की स्पष्ट टिप्पणी को कूटनीति से जुड़ी एक महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया माना जा रहा है।

न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार,पुतिन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह भी कहा कि ट्रंप द्वारा प्रस्तुत किए गए पीस प्लान में कुछ बिंदुओं पर रूस की चिंताओं को ध्यान में रखा गया है। हालाँकि,उन्होंने यह भी जोड़ा कि अभी भी कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर गंभीर बातचीत की आवश्यकता है। पुतिन ने कहा, “अमेरिकी पक्ष ने कुछ हद तक रूस की स्थिति को ध्यान में रखा है,लेकिन यह केवल शुरुआत है। हमें बैठकर उन खास बातों पर विस्तार से चर्चा करनी होगी जिन पर अभी भी मतभेद मौजूद हैं।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पश्चिमी देशों द्वारा बार-बार लगाए जा रहे आरोपों के विपरीत रूस का यूरोप पर हमला करने की कोई योजना नहीं है। पुतिन ने कहा, “यह दावा कि रूस यूरोप पर हमला करना चाहता है,न केवल गलत है,बल्कि एक प्रकार की राजनीतिक कल्पना है। रूस ने कभी ऐसा विचार नहीं किया और न ही भविष्य में ऐसा कोई उद्देश्य है।”

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पेश किए गए 28-पॉइंट पीस प्लान पर भी पुतिन ने सतर्कता जताई। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव को अमेरिका की ओर से आधिकारिक माध्यमों से मॉस्को को भेजा गया है और रूस ने इसे ध्यानपूर्वक अध्ययन किया है। इस मसौदे पर जिनेवा में अमेरिका,यूक्रेन और यूरोपीय देशों के प्रतिनिधियों के बीच बैठक भी हुई,जिसमें चर्चा के दौरान इसे 28 से घटाकर 19 बिंदुओं में कर दिया गया। हालाँकि,अब तक इस प्लान को सार्वजनिक नहीं किया गया है,जिसके चलते इसकी वास्तविक सामग्री और मुख्य प्रावधानों को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

कुछ अंतर्राष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह प्रस्ताव रूस के पक्ष में झुकाव लिए हुए है,जिसके कारण यूक्रेन इस पर सहमत होने में संकोच कर सकता है। कीव की ओर से अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दूसरी ओर,रूस ने पहले ही संकेत दे दिया है कि शांति के लिए जिन मूलभूत शर्तों की वह माँग कर रहा है,उन्हें किसी भी समझौते का हिस्सा बनना होगा।

रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष 2022 में शुरू हुआ था और अब तक लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं,जबकि हजारों सैनिक और नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं। यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था,ऊर्जा बाजारों,अनाज आपूर्ति श्रृंखलाओं और वैश्विक कूटनीति पर इस युद्ध का गहरा असर देखा गया है। पश्चिमी देश अभी भी यूक्रेन को हथियार और आर्थिक सहायता प्रदान कर रहे हैं,जबकि रूस का मानना है कि यह सब युद्ध को और लंबा खींच रहा है।

इस बीच,अमेरिका में ट्रंप प्रशासन द्वारा युद्ध खत्म करने की पहल को कुछ लोग सकारात्मक कदम मान रहे हैं,तो कई विशेषज्ञ इसे रूस के लिए एक अवसर के रूप में देख रहे हैं,जो युद्ध के मैदान पर अपने दबदबे को कूटनीतिक तरीके से मजबूत करना चाहता है। रूस यह स्पष्ट कर चुका है कि वह अपने कब्जे वाले क्षेत्रों को लेकर किसी प्रकार की पीछे हटने की योजना नहीं बना रहा।

इस तरह,पुतिन का ताजा बयान यह संकेत देता है कि शांति प्रयासों के बावजूद युद्ध अभी समाप्त होने की स्थिति में नहीं है। रूस अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं दिखाई देता,जबकि यूक्रेन भी अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से समझौता करने को तैयार नहीं है। ऐसे में आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका का यह पीस प्लान वास्तव में दोनों देशों को बातचीत की मेज पर ला पाता है या फिर यह प्रस्ताव भी पूर्व प्रयासों की तरह केवल दस्तावेज़ों तक सीमित रह जाता है।

फिलहाल इतना साफ है कि युद्ध खत्म करने की कवायदों के बीच पुतिन की स्पष्ट चेतावनी ने कूटनीतिक समाधान की राह को कठिन बना दिया है और किसी शीघ्र समाधान की संभावना बेहद कम दिखाई देती है।