नई दिल्ली,25 फरवरी (युआईटीवी)- इंग्लैंड में आयोजित होने वाली लोकप्रिय फ्रेंचाइजी क्रिकेट प्रतियोगिता ‘द हंड्रेड’ से जुड़ी एक खबर ने हाल ही में पाकिस्तान क्रिकेट में हलचल मचा दी थी। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि भारतीय स्वामित्व वाली कुछ फ्रेंचाइजी आगामी नीलामी में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को नजरअंदाज कर सकती हैं। इस खबर के सामने आते ही सोशल मीडिया और क्रिकेट जगत में बहस छिड़ गई। हालाँकि,अब इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) और टूर्नामेंट की सभी आठ फ्रेंचाइजी ने संयुक्त बयान जारी कर इन दावों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है।
मंगलवार को जारी आधिकारिक बयान में ईसीबी ने स्पष्ट किया कि ‘द हंड्रेड’ का उद्देश्य क्रिकेट को नए दर्शकों तक पहुँचाना और खेल को अधिक समावेशी बनाना है। बयान में कहा गया कि यह प्रतियोगिता इस सोच के साथ शुरू की गई थी कि हर व्यक्ति—चाहे उसकी जाति,लिंग,धर्म,राष्ट्रीयता या पृष्ठभूमि कुछ भी हो—खुद को इस खेल का हिस्सा महसूस करे। बोर्ड ने दो टूक शब्दों में कहा कि खिलाड़ियों को राष्ट्रीयता के आधार पर बाहर किए जाने का कोई सवाल ही नहीं उठता और भेदभाव की किसी भी कोशिश के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए नियम पहले से मौजूद हैं।
यह विवाद तब उभरा जब एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चार भारतीय स्वामित्व वाली फ्रेंचाइजी—मैनचेस्टर सुपर जायंट्स (आरपीएसजी ग्रुप),एमआई लंदन (रिलायंस),सदर्न ब्रेव (जीएमआर) और सनराइजर्स लीड्स (सन ग्रुप)—नीलामी में पंजीकृत पाकिस्तानी खिलाड़ियों को नजरअंदाज कर सकती हैं। रिपोर्ट में कहा गया था कि इन टीमों का रुख आईपीएल की नीति से प्रभावित हो सकता है,जहाँ 2008 के बाद से पाकिस्तानी खिलाड़ी हिस्सा नहीं ले पाए हैं। इस खबर ने पाकिस्तान क्रिकेट समुदाय में चिंता पैदा कर दी थी,क्योंकि इसे खेल में राजनीतिक प्रभाव के तौर पर देखा जा रहा था।
ईसीबी और सभी फ्रेंचाइजी मालिकों द्वारा जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि सभी आठ टीमें सिर्फ क्रिकेटिंग प्रदर्शन,उपलब्धता और टीम की रणनीतिक जरूरतों के आधार पर खिलाड़ियों का चयन करेंगी। बयान में यह भी रेखांकित किया गया कि ‘द हंड्रेड’ का संचालन पारदर्शी नियमों के तहत होता है और किसी भी तरह के भेदभाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बोर्ड ने यह सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया कि टूर्नामेंट की साख और निष्पक्षता को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।
इस साल की नीलामी के लिए पाकिस्तान के कुल 67 खिलाड़ियों ने पंजीकरण कराया है,जिनमें 63 पुरुष और चार महिला खिलाड़ी शामिल हैं। यह संख्या दर्शाती है कि पाकिस्तानी खिलाड़ी इस मंच को एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखते हैं। हालाँकि,यह भी सच है कि ‘द हंड्रेड’ के पिछले संस्करणों में पाकिस्तानी खिलाड़ियों की भागीदारी सीमित रही है। पिछले सीजन में केवल दो पाकिस्तानी खिलाड़ी किसी टीम का हिस्सा थे,जबकि पहले पाँच सत्रों में कुल मिलाकर नौ ही पाकिस्तानी खिलाड़ी इस प्रतियोगिता में खेल पाए हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि ‘द हंड्रेड’ की संरचना,टीम संयोजन और अंतर्राष्ट्रीय शेड्यूल के कारण कई बार खिलाड़ियों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में किसी भी देश के खिलाड़ियों की कम संख्या को सीधे भेदभाव से जोड़ना उचित नहीं हो सकता। फिर भी,भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक संबंधों की पृष्ठभूमि में ऐसी खबरें तेजी से संवेदनशील मुद्दा बन जाती हैं।
क्रिकेट के जानकारों का कहना है कि फ्रेंचाइजी लीग्स में मालिकों की व्यावसायिक प्राथमिकताएँ,टीम संतुलन और मार्केटिंग रणनीतियां भी चयन को प्रभावित करती हैं,लेकिन आधिकारिक तौर पर कोई भी टीम राष्ट्रीयता के आधार पर खिलाड़ियों को बाहर करने की नीति नहीं अपना सकती। ईसीबी का ताजा बयान इसी बात को दोहराता है कि ‘द हंड्रेड’ एक वैश्विक और समावेशी मंच है,जहाँ प्रदर्शन सर्वोपरि है।
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की ओर से इस मुद्दे पर औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है,लेकिन वहाँ के पूर्व खिलाड़ियों और विशेषज्ञों ने सोशल मीडिया पर चिंता व्यक्त की थी। उनका मानना था कि यदि ऐसी कोई नीति अपनाई जाती है,तो यह खेल की भावना के खिलाफ होगी। अब ईसीबी की स्पष्ट सफाई के बाद उम्मीद की जा रही है कि यह विवाद थम जाएगा और आगामी नीलामी निष्पक्ष तरीके से संपन्न होगी।
‘द हंड्रेड’ को 100 गेंदों के प्रारूप के कारण अलग पहचान मिली है और यह इंग्लैंड में नए दर्शकों को आकर्षित करने में सफल रहा है। महिला और पुरुष दोनों वर्गों में समान महत्व देने की इसकी पहल को भी सराहा गया है। ऐसे में बोर्ड नहीं चाहेगा कि किसी तरह की अफवाह टूर्नामेंट की छवि को नुकसान पहुँचाए।
आगामी नीलामी पर अब सबकी नजरें टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों को किस हद तक अवसर मिलता है और कौन-कौन से नाम फ्रेंचाइजी टीमों का हिस्सा बनते हैं। फिलहाल ईसीबी ने साफ कर दिया है कि चयन का आधार केवल क्रिकेटिंग योग्यता होगी,न कि किसी खिलाड़ी की राष्ट्रीयता। इस बयान से न केवल विवाद को शांत करने की कोशिश की गई है,बल्कि यह संदेश भी दिया गया है कि अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में समावेशिता और निष्पक्षता सर्वोच्च मूल्य हैं।
