नई दिल्ली,10 फरवरी (युआईटीवी)- मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की। यह संवाद ऐसे समय हुआ है,जब भारत और मॉरीशस अपने कूटनीतिक संबंधों के एक अहम चरण में हैं और दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बातचीत की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए इसे मित्रतापूर्ण और सार्थक बताया। उन्होंने कहा कि यह बातचीत भारत-मॉरीशस के विशेष,ऐतिहासिक और जन-केंद्रित संबंधों को और मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर रही।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में लिखा कि अपने मित्र,प्रधानमंत्री डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम का फोन पाकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने पिछले वर्ष वाराणसी में हुई अपनी यादगार मुलाकात के बाद से भारत और मॉरीशस के बीच व्यापक सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की। यह उल्लेख महत्वपूर्ण है क्योंकि वाराणसी की वह मुलाकात दोनों देशों के रिश्तों में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी गई थी,जिसमें सांस्कृतिक,आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी थी।
फोन पर हुई बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत और मॉरीशस के रिश्ते केवल औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं हैं,बल्कि इनकी जड़ें इतिहास,संस्कृति और लोगों के बीच गहरे संबंधों में हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देश जन-केंद्रित विकास को प्राथमिकता देते हुए आपसी सहयोग को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत और मॉरीशस हिंद महासागर क्षेत्र में शांति,स्थिरता और समृद्धि के साझा उद्देश्यों को हासिल करने के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।
हिंद महासागर क्षेत्र में भारत और मॉरीशस की साझेदारी को रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है। मॉरीशस न केवल भारत का करीबी मित्र देश है,बल्कि समुद्री सुरक्षा,व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से भी एक महत्वपूर्ण साझेदार है। प्रधानमंत्री मोदी के “सागर” यानी “सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन” विजन में मॉरीशस की भूमिका को पहले भी कई बार रेखांकित किया जा चुका है। इस फोन बातचीत ने एक बार फिर यह संकेत दिया कि दोनों देश क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग के मुद्दों पर एक-दूसरे के साथ मजबूती से खड़े हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि वे अगले सप्ताह भारत में होने वाले एआई इम्पैक्ट समिट के लिए प्रधानमंत्री रामगुलाम का स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं। माना जा रहा है कि मॉरीशस के प्रधानमंत्री इस महीने नई दिल्ली में आयोजित होने वाले इस महत्वपूर्ण वैश्विक सम्मेलन में भाग ले सकते हैं। यह समिट भारत की तकनीकी और डिजिटल कूटनीति के लिहाज से एक बड़ा मंच माना जा रहा है,जहाँ दुनिया भर के नीति-निर्माता,उद्योग जगत के नेता और शोधकर्ता एक साथ जुटेंगे।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 को लेकर भी सरकार की ओर से अहम जानकारियाँ साझा की गई हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार,इस समिट के लिए अब तक 35,000 से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं,जो इसे अब तक आयोजित चार वैश्विक एआई समिट में सबसे बड़ा बनाता है। यह सम्मेलन 16 से 20 फरवरी 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा और इसमें 100 से अधिक देशों की भागीदारी की उम्मीद है। मंत्रालय ने इसे जिम्मेदार,समावेशी और प्रभाव-संचालित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक रुचि का प्रतीक बताया है।
सरकारी बयान के मुताबिक,इस समिट में विजन को अमल में बदलने पर विशेष जोर दिया जाएगा,ताकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग से जमीनी स्तर पर ठोस और सार्थक परिणाम सामने आ सकें। सम्मेलन के एजेंडे को आकार देने में सरकारों के प्रतिनिधि,उद्योगपति,शोधकर्ता,सिविल सोसाइटी संगठन और अंतर्राष्ट्रीय संस्थान सक्रिय भूमिका निभाएँगे। इस मंच पर नीतिगत चर्चाओं के साथ-साथ तकनीकी नवाचार,नैतिक मानकों और सामाजिक प्रभाव जैसे विषयों पर भी गहन विचार-विमर्श होने की संभावना है।
एआई इम्पैक्ट समिट में 15 से 20 राष्ट्राध्यक्षों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है,जबकि विभिन्न देशों के 50 से अधिक मंत्री और भारत तथा विदेश की 40 से अधिक कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी इसमें भाग लेंगे। इसके अलावा,वैश्विक एआई इकोसिस्टम से जुड़े करीब 500 प्रमुख व्यक्तियों,जिनमें नवोन्मेषक,शोधकर्ता और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी शामिल हैं,की उपस्थिति की संभावना है। 100 से अधिक देशों के 500 से ज्यादा स्टार्टअप्स के भी 500 से अधिक सत्रों में हिस्सा लेने की बात कही गई है।
मॉरीशस के प्रधानमंत्री का इस समिट में संभावित रूप से शामिल होना भारत-मॉरीशस संबंधों को तकनीकी और डिजिटल सहयोग के नए आयाम दे सकता है। दोनों देश पहले से ही शिक्षा,स्वास्थ्य,समुद्री सुरक्षा और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग करते रहे हैं और अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उभरते क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने की संभावना भी दिख रही है।
प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री रामगुलाम के बीच हुई यह फोन बातचीत केवल औपचारिक संवाद नहीं थी,बल्कि इसने भारत-मॉरीशस संबंधों की गहराई और भविष्य की दिशा को भी रेखांकित किया। हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता से लेकर वैश्विक तकनीकी मंचों पर सहयोग तक,दोनों देश एक साझा दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार नजर आ रहे हैं।
