नई दिल्ली,18 अगस्त (युआईटीवी)- भारत की समुद्री सुरक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। अमेरिका ने भारतीय नौसेना के लिए दो एमक्यू-9बी सी गार्जियन हाई-एल्टीट्यूड लॉन्ग-एंड्योरेंस रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम लीज पर देने के अनुबंध का स्वागत किया है। रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि भारतीय नौसेना के लिए इन दो अत्याधुनिक मानवरहित विमान प्रणालियों को 30 महीने के लिए लीज पर लिया जाएगा। इस सौदे की अनुमानित लागत करीब 1,943 करोड़ रुपये है।
अमेरिकी दूतावास ने इस समझौते को भारत और अमेरिका के बीच लगातार मजबूत होती रक्षा साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है। दूतावास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि वह रक्षा मंत्रालय और जनरल एटॉमिक्स के बीच भारतीय नौसेना के लिए दो एमक्यू-9बी सी गार्जियन सिस्टम लीज पर देने के अनुबंध का स्वागत करता है। अमेरिकी पक्ष के अनुसार,इन प्रणालियों के इस्तेमाल से हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री क्षेत्र की जानकारी और निरंतर खुफिया,निगरानी एवं टोही कवरेज को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्वतंत्र,खुले और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर भारत और अमेरिका की साझा प्रतिबद्धता को भी मजबूती मिलेगी।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार,भारतीय नौसेना और अमेरिकी कंपनी जनरल एटॉमिक्स एयरोनॉटिकल सिस्टम्स इंक. के बीच इस लीज समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। अनुबंध की अवधि 30 महीने होगी। समझौते पर नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में रक्षा विभाग के अतिरिक्त सचिव और महानिदेशक यानी अधिग्रहण ए. अंबारासु की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के जरिए भारतीय नौसेना को दो एमक्यू-9बी सी गार्जियन सिस्टम संचालन के लिए उपलब्ध होंगे।
एमक्यू-9बी सी गार्जियन को विशेष रूप से लंबे समय तक और बड़े समुद्री क्षेत्र में निगरानी के लिए महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म माना जाता है। यह हाई-एल्टीट्यूड लॉन्ग-एंड्योरेंस श्रेणी का रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम है। इसमें उन्नत सेंसर,अत्याधुनिक प्रणालियां और परिष्कृत पेलोड लगाए गए हैं। इन क्षमताओं के कारण यह समुद्र के बड़े हिस्से पर लंबे समय तक निगरानी रखने,संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने और महत्वपूर्ण सूचनाएं एकत्र करने में मदद कर सकता है।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि एमक्यू-9बी सी गार्जियन प्रणालियों के शामिल होने से भारतीय नौसेना की समुद्री क्षेत्र जागरूकता क्षमता में काफी बढ़ोतरी होगी। समुद्री क्षेत्र जागरूकता का मतलब समुद्र में मौजूद जहाजों,गतिविधियों और अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के बारे में लगातार और सटीक जानकारी हासिल करना है। हिंद महासागर जैसे विशाल समुद्री क्षेत्र में इस तरह की निगरानी के लिए लंबी दूरी तक काम करने वाले और लंबे समय तक हवा में बने रहने वाले प्लेटफॉर्म बेहद उपयोगी होते हैं।
इन प्रणालियों की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक लंबे समय तक लगातार निगरानी करने की क्षमता है। सामान्य परिस्थितियों में किसी बड़े समुद्री क्षेत्र पर लगातार नजर रखना चुनौतीपूर्ण होता है। मानवीय संसाधनों और पारंपरिक विमानों की परिचालन सीमाओं के कारण हर समय हर इलाके की निगरानी संभव नहीं होती। ऐसे में एमक्यू-9बी जैसे मानवरहित विमान समुद्री निगरानी नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
भारतीय नौसेना के लिए हिंद महासागर क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। भारत की समुद्री सीमाओं से लेकर प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्गों तक इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में वाणिज्यिक और सैन्य गतिविधियाँ होती हैं। ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग भी इसी व्यापक क्षेत्र से होकर गुजरते हैं। ऐसे में समुद्र में होने वाली गतिविधियों की लगातार निगरानी भारत की सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
एमक्यू-9बी सी गार्जियन की तैनाती से नौसेना को हिंद महासागर के बड़े हिस्से में लगातार खुफिया, निगरानी और टोही यानी आईएसआर क्षमता उपलब्ध होने की उम्मीद है। इससे समुद्र में मौजूद विभिन्न गतिविधियों पर नजर रखने के साथ-साथ किसी संभावित सुरक्षा चुनौती का समय रहते आकलन करने में मदद मिल सकती है। किसी क्षेत्र में असामान्य गतिविधि दिखाई देने पर उसके बारे में सूचना संबंधित नौसैनिक इकाइयों तक पहुँचाई जा सकती है,जिससे प्रतिक्रिया की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकती है।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इन प्रणालियों में लगे उन्नत सेंसर और पेलोड समुद्री क्षेत्र से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी जुटाने में मदद करेंगे। लंबी अवधि तक संचालन करने की क्षमता के कारण इनका इस्तेमाल व्यापक समुद्री इलाकों की निगरानी के लिए किया जा सकेगा। इसका लाभ विशेष रूप से उन परिस्थितियों में मिल सकता है,जब किसी समुद्री क्षेत्र में लगातार नजर बनाए रखना आवश्यक हो।
भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा सहयोग लगातार बढ़ा है। दोनों देशों ने सैन्य अभ्यास,रक्षा तकनीक,उपकरणों की खरीद और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार किया है। एमक्यू-9बी सी गार्जियन का यह लीज समझौता भी इसी व्यापक रक्षा साझेदारी की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिकी दूतावास ने भी इस समझौते को दोनों देशों के रक्षा संबंधों में आगे की प्रगति से जोड़ते हुए कहा कि वह भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी में निरंतर प्रगति की उम्मीद करता है।
इस समझौते का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि भारतीय नौसेना को इन प्रणालियों की क्षमता का इस्तेमाल अपेक्षाकृत कम अवधि में करने का अवसर मिलेगा। 30 महीने की लीज अवधि के दौरान इन प्लेटफॉर्मों को समुद्री निगरानी अभियानों में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे नौसेना की मौजूदा निगरानी क्षमताओं को तत्काल बढ़ावा देने में मदद मिलने की संभावना है।
हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री भूमिका लगातार बढ़ रही है। समुद्री व्यापार,ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक हितों के लिहाज से यह क्षेत्र भारत के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में समुद्री क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों की वास्तविक समय के करीब निगरानी और उनका विश्लेषण सुरक्षा व्यवस्था के लिए अहम होता जा रहा है। एमक्यू-9बी सी गार्जियन जैसे प्लेटफॉर्म इसी आवश्यकता को पूरा करने में उपयोगी साबित हो सकते हैं।
इन प्रणालियों की मदद से भारतीय नौसेना को समुद्र के दूरदराज इलाकों में भी निगरानी का विस्तार करने में मदद मिल सकती है। लगातार आईएसआर कवरेज से नौसेना को समुद्री गतिविधियों की बेहतर तस्वीर मिल सकेगी। इसके आधार पर किसी संभावित खतरे,संदिग्ध गतिविधि या महत्वपूर्ण घटनाक्रम की पहचान और उसके आकलन की प्रक्रिया को मजबूत किया जा सकेगा।
अमेरिका ने अपने बयान में इस सहयोग को केवल सैन्य क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं रखा है। अमेरिकी दूतावास ने इसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र को स्वतंत्र,खुला और सुरक्षित बनाए रखने की भारत-अमेरिका की साझा प्रतिबद्धता से जोड़ा है। इसका संकेत है कि दोनों देश समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।
रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक,एमक्यू-9बी सी गार्जियन में मौजूद उन्नत तकनीक भारतीय नौसेना की समुद्री क्षेत्र जागरूकता को मजबूत करेगी। विशाल समुद्री क्षेत्र में लगातार निगरानी, सूचनाओं का संग्रह और उनका विश्लेषण आधुनिक समुद्री सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। ऐसे में इन दो प्रणालियों के शामिल होने से नौसेना की निगरानी व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण अतिरिक्त क्षमता जुड़ने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर,करीब 1,943 करोड़ रुपये का यह 30 महीने का लीज समझौता भारतीय नौसेना के लिए हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने वाला कदम है। दो एमक्यू-9बी सी गार्जियन सिस्टम के जरिए नौसेना को बड़े समुद्री इलाकों में लंबे समय तक निगरानी रखने की अतिरिक्त क्षमता मिलेगी। इससे समुद्र में होने वाले घटनाक्रमों पर नजर रखने,संभावित चुनौतियों का आकलन करने और जरूरत पड़ने पर तेजी से प्रतिक्रिया देने की भारत की क्षमता मजबूत होने की उम्मीद है। साथ ही यह समझौता भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा रणनीतिक हितों को भी रेखांकित करता है।
