500 रुपए के नोट

मार्च 2026 तक 500 के नोट बंद होने की खबर को सरकार ने बताया फर्जी,अफवाहों से सतर्क रहने की अपील की

नई दिल्ली,3 जनवरी (युआईटीवी)- केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही उस खबर का स्पष्ट रूप से खंडन कर दिया,जिसमें दावा किया जा रहा था कि भारतीय रिजर्व बैंक मार्च 2026 तक एटीएम से 500 रुपए के नोट देना बंद कर देगा। सरकार ने साफ कर दिया कि यह दावा पूरी तरह झूठा,भ्रामक और अफवाह फैलाने वाला है। सरकार की आधिकारिक फैक्ट-चेक एजेंसी,पीआईबी फैक्ट चेक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि इस तरह का कोई निर्णय न तो लिया गया है और न ही इसकी कोई घोषणा की गई है। एजेंसी ने आम लोगों से अपील की कि वे ऐसे संदेशों पर भरोसा न करें और उन्हें आगे साझा करने से पहले उनकी सच्चाई सरकारी स्रोतों से अवश्य जाँच लें।

पीआईबी फैक्ट चेक की पोस्ट में कहा गया कि कुछ सोशल मीडिया खातों और संदेशों में यह दावा फैलाया जा रहा है कि आरबीआई मार्च 2026 तक 500 रुपए के नोटों का प्रचलन सीमित करने जा रहा है और एटीएम से इन नोटों का वितरण रोक दिया जाएगा। एजेंसी ने जोर देकर कहा कि यह दावा पूरी तरह निराधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 500 रुपए के नोट पूरी तरह वैध मुद्रा हैं और देशभर में उनका चलन पहले की तरह जारी रहेगा। लोगों को सलाह दी गई कि किसी भी आधिकारिक नीति बदलाव के बारे में केवल आरबीआई या सरकार की आधिकारिक वेबसाइट और सूचना स्रोतों पर भरोसा करें।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है,जब 500 रुपए के नोटों से जुड़ी ऐसी अफवाहें सामने आई हैं। पिछले वर्ष अगस्त में भी एक व्हाट्सएप मैसेज वायरल हुआ था,जिसमें दावा किया गया था कि आरबीआई ने बैंकों को आदेश दिया है कि 30 सितंबर तक एटीएम में 500 रुपए के नोट डालना बंद कर दिया जाए। उस समय भी सरकार और आरबीआई दोनों ने इस दावे को झूठा करार दिया था। उस फर्जी संदेश में यहाँ तक कहा गया था कि मार्च 2026 तक 90 प्रतिशत एटीएम और सितंबर 2026 तक 75 प्रतिशत एटीएम से 500 रुपए के नोट मिलना बंद हो जाएँगे। फैक्ट-चेक एजेंसी ने तब भी कहा था कि इस तरह की खबरें लोगों को भ्रमित करने और अनावश्यक घबराहट पैदा करने के उद्देश्य से फैलाई जाती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में गलत सूचनाओं का प्रसार बहुत तेजी से होता है और लोग बिना पुष्टि किए उन्हें साझा करने लगते हैं। इससे न केवल अफवाहें फैलती हैं,बल्कि वित्तीय प्रणाली और आम नागरिकों के बीच अविश्वास का माहौल भी बन सकता है। यही कारण है कि सरकार लगातार नागरिकों से आग्रह करती रही है कि वे ऐसे संदेशों की पुष्टि करें और केवल आधिकारिक घोषणाओं पर ही भरोसा करें। पीआईबी फैक्ट चेक ने दोहराया कि किसी भी आर्थिक,बैंकिंग या मुद्रा से जुड़ी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सच्चाई की जाँच जरूरी है,क्योंकि कई बार फर्जी खबरें लोगों को धोखा देने,निवेश निर्णयों को प्रभावित करने या बाजार में अनिश्चितता पैदा करने के लिए फैलाई जाती हैं।

सरकार के अनुसार,आरबीआई द्वारा जारी की जाने वाली किसी भी महत्वपूर्ण नीति सूचना का प्रकाशन हमेशा आधिकारिक चैनलों पर किया जाता है और उसके बाद ही वह लागू होती है। अब तक 500 रुपए के नोटों से संबंधित नीति में किसी भी तरह के बदलाव की कोई घोषणा नहीं की गई है। इस तरह,एटीएम से 500 रुपए के नोट बंद होने का दावा केवल अफवाह है,जिसका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है। वित्त विशेषज्ञ बताते हैं कि ऐसी झूठी खबरें अक्सर पुराने नोटों के विमुद्रीकरण के अनुभव को ध्यान में रखकर तैयार की जाती हैं,ताकि लोग डर और भ्रम में जल्दी विश्वास कर लें।

फैक्ट-चेक एजेंसी ने यह भी कहा कि नागरिकों को चाहिए कि वे किसी भी संदिग्ध सूचना के बारे में पहले विश्वसनीय स्रोतों से जाँच करें। अगर कोई संदेश संदिग्ध लगे,तो उसे पीआईबी फैक्ट चेक को भेजकर उसकी पुष्टि कराई जा सकती है। इससे न केवल गलत जानकारी का प्रसार रोका जा सकता है,बल्कि दूसरों को भी धोखे से बचाया जा सकता है। सरकार ने स्पष्ट कहा है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैलाई जा रही ऐसी फर्जी खबरों के खिलाफ लगातार निगरानी की जा रही है और जहां आवश्यकता पड़ी,वहाँ कार्रवाई भी की जाएगी।

500 रुपए के नोटों के बंद होने की खबर एक बार फिर अफवाह साबित हुई है। सरकार और आरबीआई द्वारा दिए गए स्पष्ट संदेश के बाद यह साफ हो गया है कि आम लोगों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है। 500 रुपए के नोट पहले की तरह ही मान्य रहेंगे और एटीएम से उपलब्ध भी होते रहेंगे। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे जिम्मेदारी के साथ सोशल मीडिया का उपयोग करें,बिना पुष्टि के किसी भी जानकारी पर विश्वास न करें और देश की वित्तीय व्यवस्था से जुड़ी किसी भी सूचना को केवल आधिकारिक स्रोतों से ही प्राप्त करें।