नई दिल्ली,27 जनवरी (युआईटीवी)- भारत ने 77वें गणतंत्र दिवस को पूरे उत्साह,आत्मविश्वास और राष्ट्रीय गौरव के साथ मनाया। राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य परेड के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक आयोजन से जुड़े कई खूबसूरत और गौरवपूर्ण पलों को देश और दुनिया के साथ साझा किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस साल का गणतंत्र दिवस समारोह भारत की लोकतांत्रिक शक्ति,राष्ट्रीय एकता और नए भारत के आत्मविश्वास का सशक्त प्रतीक बनकर सामने आया है,जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने संदेश में लिखा कि कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस परेड ने भारत की लोकतांत्रिक मजबूती, समृद्ध विरासत और राष्ट्रीय एकता को बेहद खूबसूरती से प्रदर्शित किया। उन्होंने इसे राष्ट्रीय गौरव का अद्भुत दृश्य बताया और कहा कि पूरा देश इस आयोजन पर गर्व महसूस कर रहा है। उनके अनुसार,यह परेड केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं,बल्कि भारत की सामूहिक चेतना,आत्मनिर्भरता और भविष्य की दिशा को दर्शाने वाला मंच है।
इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड की सबसे बड़ी खासियत भारत की नई सैन्य ताकत और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं का प्रभावशाली प्रदर्शन रहा। कर्तव्य पथ पर भारतीय सेना ने ‘बैटल एरे’ फॉर्मेट में अपनी आधुनिक युद्ध तैयारियों की झलक पेश की। इस फॉर्मेट के जरिए यह दिखाया गया कि युद्ध की स्थिति में भारतीय सेनाएँ किस तरह रणनीति बनाती हैं,संसाधनों का उपयोग करती हैं और तेजी से ऑपरेशन को अंजाम देती हैं। यह प्रदर्शन न केवल तकनीकी रूप से उन्नत था,बल्कि इसने यह संदेश भी दिया कि भारत अपनी सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क,सक्षम और आत्मनिर्भर बन चुका है।
परेड में स्वदेशी रक्षा उपकरणों,आधुनिक हथियार प्रणालियों और सैन्य तकनीकों की मौजूदगी ने ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की सोच को मजबूत किया। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार,इस तरह का प्रदर्शन दुनिया को यह दिखाने के लिए काफी है कि भारत अब केवल आयात पर निर्भर रहने वाला देश नहीं रहा,बल्कि रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि यह आयोजन देश की तैयारियों,तकनीकी क्षमता और नागरिकों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
सैन्य प्रदर्शन के साथ-साथ कर्तव्य पथ पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों और राज्यों की झांकियों ने भी लोगों का मन मोह लिया। देश के अलग-अलग हिस्सों से आई झांकियों में भारत की विविध संस्कृति,परंपराएँ और लोककलाएँ जीवंत रूप में देखने को मिलीं। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे कलाकारों,पारंपरिक नृत्य और लोक संगीत की प्रस्तुतियों ने यह साबित कर दिया कि विविधता में एकता भारत की सबसे बड़ी ताकत है। प्रधानमंत्री ने इन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की खुलकर सराहना करते हुए कहा कि गणतंत्र दिवस परेड ने भारत की सांस्कृतिक विविधता को बेहद जीवंत और रंगीन तरीके से दुनिया के सामने रखा।
इस ऐतिहासिक अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय मंच से भी भारत को विशेष सम्मान मिला। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की मौजूदगी भारत के लिए गर्व की बात है। उनकी उपस्थिति भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों को दर्शाती है। प्रधानमंत्री के अनुसार,यह दौरा भारत और यूरोप के बीच व्यापार,तकनीक,ऊर्जा,सुरक्षा और लोगों के आपसी संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने में सहायक साबित होगा।
गणतंत्र दिवस 2026 का यह आयोजन उस समय हुआ है,जब भारत वैश्विक मंच पर एक मजबूत और जिम्मेदार शक्ति के रूप में उभर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में इस बात पर जोर दिया कि भारत का लोकतंत्र,उसकी संस्थाएँ और उसके नागरिक ही उसकी सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने कहा कि कर्तव्य पथ पर दिखा यह उत्साह और आत्मविश्वास नए भारत की पहचान है,जो अपनी विरासत पर गर्व करता है और भविष्य को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है।
प्रधानमंत्री ने सुरक्षा व्यवस्था की भी सराहना की और कहा कि इतने बड़े आयोजन का सफलतापूर्वक संपन्न होना हमारी सुरक्षा एजेंसियों,प्रशासन और स्वयंसेवकों की कड़ी मेहनत का परिणाम है। उन्होंने भारतीय सेनाओं को देश का गौरव बताते हुए कहा कि उनकी सतर्कता और समर्पण के कारण ही देश सुरक्षित और मजबूत बना हुआ है।
77वां गणतंत्र दिवस न केवल एक राष्ट्रीय उत्सव रहा,बल्कि यह भारत की लोकतांत्रिक शक्ति,सैन्य सामर्थ्य,सांस्कृतिक विविधता और अंतर्राष्ट्रीय महत्व का भव्य प्रदर्शन भी बना। कर्तव्य पथ से उठी यह तस्वीरें और संदेश न सिर्फ देशवासियों के लिए गर्व का विषय हैं,बल्कि दुनिया को यह बताने के लिए भी काफी हैं कि भारत आत्मविश्वास से भरे नए युग में प्रवेश कर चुका है।
