5 सितंबर (युआईटीवी)- बैंकों के तरफ से पूर्व स्वीकृत ऋण सुविधा (प्री-एप्रूव्ड लोन ) को केंद्रीय बैंक ने लेन-देन के लिए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (यूपीआई ) प्रणाली में शामिल करने की घोषणा की। अब यूपीआई प्रणाली के माध्यम से व्यक्तिगत ग्राहकों को पूर्व अनुमोदित ऋण का भुगतान करने की अनुमति है,जो पहले सिर्फ जमा कर सकते थे। भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने यूपीआई का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव भी अप्रैल 2023 में ही रखा था और इसके अंदर बैंकों को पहले से मंजूर ऋण सुविधा को इस प्रणाली में स्थानांतरण करने की अनुमति दी गई थी। फिलहाल यूपीआई से बचत खाते,प्रीपेड वॉलेट,ओवरड्राफ्ट खाते और क्रेडिट कार्ड को जोड़ा जा सकता है।

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने एक सर्कुलर जारी किया है जो बैंक में पूर्व-स्वीकृत ऋण से सम्बंधित है। आरबीआई ने इसे यूपीआई के जरिए परिचालन पर कहा कि अब ऋण सुविधा को यूपीआई के दायरे में शामिल कर लिए गया है। इस सार्थक कदम के माध्यम से लागत कम की जा सकती है। जिससे भारतीय बाज़ारों में अनूठे उत्पादों के वृद्धि में सहायता मिल सकती है।
अगस्त 2023 में यूपीआई लेन -देन के मामले में ऐतिहासिक उछाल आया है,जो 10 अरब का आँकड़ा पार गया है। जुलाई में यह आँकड़ा 9.6 अरब था। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) जिसे भारत में खुदरा भुगतान और निपटान प्रणालियों के संचालन के लिए आरबीआई द्वारा बनाया गया था के आँकड़े के अनुसार 30 अगस्त 2023 तक के यूपीआई से लेन -देन का मूल्य ₹ 15.18 लाख करोड़ था।
