शाहनवाज हुसैन

बलात्कार मामले में शाहनवाज हुसैन को दिल्ली कोर्ट ने समन भेजा

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर (युआईटीवी)- कथित बलात्कार और धमकी के एक मामले में दिल्ली की एक अदालत ने भाजपा नेता सैयद शाहनवाज हुसैन को समन भेजा है।

बलात्कार (भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत दंडनीय) और आपराधिक धमकी (धारा 506) के अपराधों का न्यायाधीश ने संज्ञान लिया है।
भाजपा नेता सैयद शाहनवाज हुसैन को दिल्ली पुलिस की एक रिपोर्ट के अनुसार दुष्कर्म मामले में क्लीन चिट दे दी गई थी,जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है। पुलिस की कैंसिलेशन रिपोर्ट को कोर्ट ने अस्वीकृत कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर शिकायतकर्ता ने भरोसा जताया है। शिकायतकर्ता को सुप्रीम कोर्ट ने यह भरोसा दिलाया कि यदि अभियोजक की एकमात्र गवाही विश्वसनीय है,तो वह गवाही आरोपी को दोषी करार देने के लिए पर्याप्त है। इस पर अदालत ने कहा कि, “इसलिए यह कहना सुरक्षित है कि आरोपी को बुलाने और मामले को सुनवाई के लिए ले जाने के लिए अभियोजक की लगातार एकमात्र गवाही ही पर्याप्त है।”

शाहनवाज हुसैन के खिलाफ कोर्ट की ओर से संबंधित एसएचओ के माध्यम से समन जारी किया है। अगली सुनवाई पर हाजिर होने का भी कोर्ट ने निर्देश जारी किया है। एक महिला ने शाहनवाज हुसैन पर धमकाने का आरोप लगाया था और साथ ही उसने आरोप लगाया था,कि शाहनवाज हुसैन का भाई शहबाज हुसैन ने शादी का झाँसा देकर वर्ष 2017 में उसका यौन शोषण किया और दुष्कर्म किया।

उस महिला ने शाहनवाज हुसैन पर आरोप लगाते हुए कहा कि अपने भाई शहबाज हुसैन का पक्ष लेकर भाजपा नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने इस मामले को दबाया था और धमकी भी दी थी।
सत्र अदालत के आदेश जिसमें शाहनवाज और उनके भाई शाहबाज हुसैन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए थे,उसे दिल्ली हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था। याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का अवसर न्यायमूर्ति अमित महाजन ने दिया। उसके बाद सत्र अदालत में मामले को नए फैसले के लिए भेज दिया।

पीठ का कहना है कि ट्रायल कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 376, 295ए, 493, 496, 506, 509, 511 और 120बी के तहत एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने के दौरान हुसैन और उनके भाई को नहीं सुना।

अदालत ने कहा कि 25 जून 2018 के आदेश में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत पुलिस को महिला द्वारा दायर एक आवेदन में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया था।

बाद में 31 मई 2022 को सत्र न्यायाधीश ने आक्षेपित आदेश के उक्त आदेश को रद्द कर दिया और एसएचओ मंदिर मार्ग को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया।

शिकायतकर्ता ने शाहनवाज हुसैन के भाई शहबाज हुसैन पर आरोप लगाया था कि उनकी मुलाकात शाहबाज से एनजीओ चलाने के दौरान हुई थी। शाहबाज ने अपनी पहचान संसद सदस्य शहनवाज हुसैन के भाई के रूप में बताया था और बाद में दोनों में बहुत घनिष्ठता हो गई।

शिकायतकर्ता का कहना है कि शहबाज हुसैन ने उससे शादी करने का वादा किया था और कथित तौर पर उसके साथ बलात्कार किया। पहले तो उसने अपनी गरिमा और प्रतिष्ठा की चिंता के वजह से इस मामले को किसी के सामने नहीं लाया,लेकिन जब पता चला कि शाहबाज़ पहले से ही शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं,तो उसे झटका लगा।

उसके बाद वह उनके भाई भाजपा नेता सैयद शाहनवाज हुसैन के पास न्याय माँगने और उनका समर्थन के लिए उनके आवास पर गई। उन्हें सारी बात बताई। शिकायतकर्ता ने बताया कि शाहनवाज ने इस मामले को अपने तक रखने की बात कही और कहा कि हंगामा ना करे और ना ही इस बात को किसी के सामने उजागर करें,क्योंकि यह दोनों पक्षों के लिए हानिकारक होगा।

शिकायतकर्ता ने शाहबाज़ पर आरोप लगाते हुए कहा कि एक मौलवी और कुछ अन्य व्यक्तियों की उपस्थिति में शाहबाज़ ने उससे शादी की। उसे मजबूर कर शादी के प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर करवाए गए और उसके बाद उसे छोड़ दिया गया।

बाद में मौलवी और प्रमाणपत्र के फर्जी होने की जानकारी मिली। उन्होंने आरोप लगाया है कि अभद्र भाषा का प्रयोग कर फोन पर उसे धमकी दी गई।

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