वाशिंगटन,14 नवंबर (युआईटीवी)- नौ न्यायाधीशों के लिए नैतिक नियमों का पहला सेट अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया। जिसके आधार पर न्यायाधीशों को अपने कर्तव्यों का पालन करना है और व्यवहार करना है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी नैतिक नियमों में न्यायाधीशों को गैर-न्यायिक एवं वित्तीय गतिविधियों में अपना आचरण कैसे करना है,वह बताया गया है।
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, नैतिकता सिद्धांतों और प्रथाओं पर इस साल की शुरुआत में देश की सबसे शक्तिशाली कानूनी संस्था ने एक बयान जारी किया था,लेकिन नौ पन्नों की की “आचार संहिता” सोमवार को जारी किया गया है,जो और अधिक विस्तार प्रदान करती है।
हाल ही में मीडिया रिपोर्टों में कई न्यायविदों को दिए गए उपहारों और छुट्टियों की व्यवस्था के बारे में खबर आने के बाद यह कदम तब उठाया गया है। जब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपनी जाँच बढ़ा दी है।
ऐसा पहली बार हुआ है,जब अपने स्वयं के नियम देश की सर्वोच्च अदालत ने निर्धारित किए हैं। क्योंकि 1973 से एक नैतिक संहिता के द्वारा ही निचली अदालतों के संघीय न्यायाधीश शासित होते रहे हैं।
न्यायाधीशों ने मार्गदर्शन का परिचय देने वाले एक पैराग्राफ में कहा कि,उन्होंने लंबे समय से उन अलिखित नैतिक नियमों का पालन किया है,जिसे निचली अदालत के कोड सहित विभिन्न स्रोतों से प्राप्त किया गया है।
आगे उन्होंने कहा कि किसी भी नैतिक दिशानिर्देश से न्यायाधीश खुद को अप्रतिबंधित मानते हैं,यह “गलतफहमी” स्पष्ट नियमों की अनुपस्थिति के वजह से उत्पन्न हुई है।
कोड में किसी भी प्रकार का कोई प्रवर्तन तंत्र नहीं है। इसलिए न्यायाधीशों को यह चुनाव करना चाहिए कि वे बनाए गए “नियमों और सिद्धांतों” का पालन करें।
जो नियम बनाए गए हैं,उसके मुताबिक न्यायाधीशों को इस बात पर विचार करने की सलाह दी जाती है कि उनके द्वारा किसी बाहरी कार्यक्रम में अभिव्यक्ति से जनता में अनुचितता की भावना पैदा होगी या नहीं।
कई ऐसी परिस्थितियाँ भी अदालत ने निर्धारित कीं हैं,जिसके अंतर्गत किसी मामले में न्यायाधीशों को हिस्सा लेने से खुद को अयोग्य घोषित करना चाहिए।
