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मिजोरम में पहली बार 3 महिलाओं ने जीता चुनाव,रचा इतिहास

आइजोल, 5 दिसंबर (युआईटीवी)- मिजोरम में पहली बार 3 महिलाओं ने चुनाव जीता है। सोमवार को मिजोरम ने इतिहास रच दिया। जब 40 सदस्यीय विधानसभा के लिए तीन महिला उम्मीदवार चुनी गईं। ऐसा पहली बार हुआ है,जब 3 महिलाओं ने चुनाव जीत कर अपनी उम्मीदवारी पेश की है और समाज को महिला सशक्तिकरण का अच्छा उदाहरण दिया है।

लुंगलेई पूर्व निर्वाचन क्षेत्र से ज़ोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडएमपी) की उम्मीदवार लालरिनपुई ने जीत दर्ज की। आइजोल दक्षिण-III निर्वाचन क्षेत्र से उनकी पार्टी के सहयोगी और टेलीविजन एंकर बेरिल वन्नेइहसांगी चुनी गईं।

वेस्ट तुइपुई सीट से मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) की प्रावो चकमा ने जीत दर्ज की।

ज़ोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडएमपी) की उम्मीदवार लालरिनपुई ने अपने पुरुष कांग्रेस उम्मीदवारों को हराया,मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) की प्रावो चकमा ने भी अपने पुरुष कांग्रेस उम्मीदवारों को हराया। जबकि बेरिल वन्नेइहसांगी ने आइजोल दक्षिण-III निर्वाचन क्षेत्र में अपनी एमएनएफ प्रतिद्वंद्वी को हराकर जीत हासिल की।

मिजोरम ईसाई बहुल क्षेत्र हैं। यहाँ करीब 87 प्रतिशत ईसाई धर्म मानने वाले लोग रहते हैं और पारंपरिक रूप से मिज़ो समाज पितृसत्तात्मक संस्कृति का पालन करते हैं। इस पुरुष प्रधान समाज में लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मिजोरम के मुख्य राजनीतिक दलों ने महिला उम्मीदवारों को शायद ही नामांकित किया हो।

7 नवंबर को मिजोरम में विधानसभा चुनाव हुआ। इस चुनाव में 174 उम्मीदवारों ने अपनी चुनौती पेश की। जिसमें 16 महिलाएँ भी शामिल थी। पिछला विधानसभा चुनाव 2018 में लड़ा गया था,उसमें 209 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था। 209 उम्मीदवारों में 18 महिलाएँ शामिल थी।

136 उम्मीदवारों ने 2013 के विधानसभा चुनाव लड़ा था। जिसमें छह महिला उम्मीदवार शामिल थी।

कोई भी महिला उम्मीदवार 2013 और 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज नहीं कर पाई थी।

पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (पीसी) की एल. थानमावी वह पहली महिला थी,जो मिजोरम में विधायिका के लिए चुनी गई थी। 30 सदस्यीय विधायिका के साथ मिजोरम को 1972 में केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया था।

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