विदेश मंत्री एस. जयशंकर

भारत और नेपाल ने द्विपक्षीय समझौते की व्यापक समीक्षा की,कई समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए

काठमांडू,5 जनवरी (युआईटीवी)- भारत-नेपाल संयुक्त आयोग की सातवें बैठक के दौरान भारत और नेपाल ने दोनों देशों के बीच मौजूद द्विपक्षीय समझौते की व्यापक समीक्षा की। दोनों देशों के इस बैठक के दौरान आपसी सहयोग के क्षेत्र की स्थिति पर भी व्यापक स्तर पर समीक्षा की गई। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस बैठक में सम्मिलित होने के लिए गुरुवार को नेपाल की राजधानी काठमांडू पहुँचे। काठमांडू पहुँचकर भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर अपने नेपाल समकक्ष एन.पी. सऊद से मुलाकात की और उनके साथ की वार्ता की सह-अध्यक्षता की।

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ट्वीट किया, “भारत-नेपाल संयुक्त आयोग की सातवीं बैठक व्यापक और सक्रिय रही। इस बैठक में हमारे समग्र द्विपक्षीय संबंधों,व्यापार और आर्थिक संबंधों,रक्षा और सुरक्षा,लोगों से लोगों का संपर्क, भूमि,रेल और हवाई कनेक्टिविटी परियोजनाओं,ऊर्जा,कृषि,जल संसाधन,बिजली में सहयोग,पर्यटन,आपदा प्रबंधन,नागरिक उड्डयन,सांस्कृतिक आदान-प्रदान,विकास साझेदारी इत्यादि पर विशेष रूप से चर्चा की गई।”

नेपाल और भारत के मध्य उच्चतम स्तरीय राजनीतिक तंत्र है,ताकि संयुक्त आयोग द्विपक्षीय संबंधों की स्थिति का जायजा ले सके।

कई समझौतों और समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर इस बैठक के दौरान हस्ताक्षर किए गए ,जहाँ पिछले साल आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने एनपीआर 1,000 करोड़ अनुदान की घोषणा की थी,ताकि उस राशि से देश में पुनर्निर्माण किया जा सके।

यह भारत द्वारा घोषित नया अनुदान है,जिससे नेपाल की पुनर्निर्माण में सहायता हो सके।

आने वाले 10 वर्षों में भारत को 10,000 मेगावाट बिजली निर्यात तक पहुँचने के उद्देश्य से दोनों पक्षों के मध्य दीर्घकालिक बिजली व्यापार पर एक समझौता किया गया।

अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से 6 किमी दूर दरबार मार्ग,काठमांडू में अवस्थित याक और यति होटल में भारत के ऊर्जा सचिव पंकज अग्रवाल तथा नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्रालय के सचिव गोपाल सिगडेल के बीच एक बैठक हुई। इस बैठक के दौरान एक ऊर्जा समझौते ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। गुरुवार को नेपाल-भारत के बीच चार समझौते पर हस्ताक्षर हुए। ऊर्जा समझौता भी उन्हीं चार समझौतों में से एक था।

भारत की ओर से नेपाल में लघु विकास परियोजनाओं में सहायता दी जाती है। एक समझौता इस सहायता राशि में वृद्धि करने से संबंधित भी है। लघु विकास परियोजनाओं को निष्पादित करने के लिए पहले भारत की ओर से 5 करोड़ रुपए की अनुदान राशि प्रदान किया जा रहा था,लेकिन अब नए समझौते के तहत इस राशि को बढ़ाकर 20 करोड़ रुपए कर दिया गया है और यह लघु विकास अनुदान राशि सरकारी निकायों तथा अन्य संगठनों के माध्यम से प्रदान किया जाएगा।

पिछले साल नवंबर में आए विनाशकारी भूकंप में जाजरकोट और रुकुम पश्चिम के भाग सबसे अधिक प्रभावित हुए थे। उसके पुनर्निर्माण के लिए नेपाल को भारत ने 10 अरब रुपए की वित्तीय सहायता देने पर भी सहमति जताई है। इस बात की जानकारी नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अमित राय ने दी है।

नेपाली उपग्रह के प्रक्षेपण के लिए न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड तथा नेपाल एकेडमी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के मध्य भी समझौता हुआ है। जिसकी जानकारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने दी है।

इस समझौते के तहत नेपाल में निर्मित उपग्रह को इसरो लॉन्च करेगा।

नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के लिए नेपाल विद्युत प्राधिकरण और भारत के नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (एनटीपीसी) के मध्य भी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

तीन सीमा पार ट्रांसमिशन लाइनों का उद्घाटन भी एन.पी. सऊद और एस. जयशंकर ने किया।

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