नई दिल्ली,8 जनवरी (युआईटीवी)- बिलकिस बानो मामले में गुजरात सरकार द्वारा 11 दोषियों की सजामाफी को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को रद्द कर दिया है। 2002 में गोधरा कांड के बाद हुए दंगों के दौरान बिलकिस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया और उसके परिवार के सदस्यों की हत्या कर दी गई थी। जिसमें शामिल 11 दोषियों की सजा को गुजरात सरकार ने माफ़ कर समयपूर्व रिहा कर दिया था,सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गुजरात सरकार के सजा माफी के आदेश को रद्द कर दिया है।
अपने फैसले में जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि, ” हमारा ऐसा मानना है कि उत्तरदाताओं (दोषियों) के छूट के लिए आवेदन पर विचार करने या उन्हें छूट देने का कोई भी अधिकार गुजरात सरकार के पास नहीं था। ”
2002 के गुजरात दंगों की पीड़िता बिलकिस बानो ने सुप्रीम कोर्ट में सामूहिक बलात्कार और अपने परिवार के सदस्यों की हत्या के दोषी 11 लोगों की समयपूर्व रिहाई के खिलाफ याचिका दायर की थी। उस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट कहा कि बिलकिस बानो ने जिन 11 दोषियों के समयपूर्व रिहाई के खिलाफ याचिका दायर की है,वह सुनवाई योग्य है।
न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना की अगुवाई वाली पीठ ने बिलकिस बानो मामले में कहा कि ,याचिकाकर्ता (बिलकिस बानो) द्वारा दायर याचिका अनुच्छेद 32 के तहत स्पष्ट रूप से विचार करने योग्य है।
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि 11 दोषियों को राज्य की छूट नीति के तहत 15 अगस्त, 2022 को समयपूर्व रिहा करने के गुजरात सरकार के फैसले के खिलाफ दायर जनहित याचिकाओं की स्थिरता के सवाल पर शीर्ष अदालत द्वारा फैसला करना जरुरी नहीं है।
शीर्ष अदालत ने इस मामले में कहा कि, इस मामले में में जो जनहित याचिकाएँ दायर की गई हैं,उस पर विचार करने के संबंध में जवाब देना हम जरुरी नहीं समझते हैं।
