नई दिल्ली,11 मार्च (युआईटीवी)- सुप्रीम कोर्ट में केंद्र को चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने से रोकने के लिए याचिका दायर की गई है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में माँग की गई है कि वर्तमान कानून के अनुसार चुनाव आयोग में रिक्त पदों पर नियुक्तियाँ करने से केंद्र सरकार पर रोक लगाया जाए। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और अन्य चुनाव आयुक्तों (ईसी) की नियुक्ति की प्रक्रिया से वर्तमान कानून भारत के मुख्य न्यायाधीश को बाहर करता है। गौरतलब है कि,नौ मार्च को चुनाव आयुक्त अरुण गोयल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
आवेदन में माँग की गई है कि चुनाव आयोग के सदस्यों की नियुक्ति का निर्देश शीर्ष अदालत की मार्च 2023 की संविधान पीठ के फैसले के अनुसार की जाए। इसमें चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों की नियुक्ति प्रधानमंत्री,लोकसभा में नेता विपक्ष (एलओपी) और भारत के मुख्य न्यायाधीश के पैनल की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा करने की बात कही गई है।
मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की स्थिति और पद ग्रहण की अवधि) अधिनियम, 2023 की वैधता को कांग्रेस नेता जया ठाकुर ने चुनौती देते हुए जनहित याचिका दायर की है।
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा जारी गजट अधिसूचना के खिलाफ कई जनहित याचिकाएँ दायर की गईं हैं। इस अधिसूचना में कहा गया है कि सीईसी और ईसी की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष व प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री से मिलकर बनी चयन समिति की सिफारिश पर की जाएगी।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार और अन्य को इस मामले में न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस साल जनवरी में नोटिस जारी किया था, लेकिन हाल ही में संसद द्वारा जो कानून बनाए गए हैं,उनके कार्यान्वयन पर रोक लगाने के लिए कोई भी आदेश जारी नहीं किया था।
पीठ ने कहा था कि,इस प्रकार के क़ानून पर हम रोक नहीं लगा सकते हैं,न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता भी इस पीठ में शामिल थे।
