संयुक्त राष्ट्र,12 मार्च (युआईटीवी)- पाकिस्तान से जुड़े आतंकवादियों को बचाने वाले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) पर भारत ने ‘प्रच्छन्न वीटो’ की प्रणाली की अनुमति देने का आरोप लगाया है। सुरक्षा परिषद प्रतिबंध समिति की आतंकवाद पर गुप्त कार्यप्रणाली की भारत ने आलोचना की है।
जो देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में साक्ष्य-आधारित आतंकवादी सूची को अवरुद्ध करने के लिए अपनी वीटो शक्तियों का उपयोग करते हैं,उन देशों का भारत ने कड़ी आलोचना की है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा कि बिना कोई औचित्य बताए आतंकवादियों के खिलाफ साक्ष्य-आधारित प्रस्तावों को रोकना अनुचित है। आतंकवाद की चुनौती से निपटने में परिषद की प्रतिबद्धता के प्रति दोहरे दृष्टिकोण की बू आती है। उन्होंने इसे एक तरह का “प्रच्छन्न वीटो” बताया।
गौरतलब है कि,जब-जब अंतरराष्ट्रीय आतंकवादियों के रूप में पाकिस्तान से जुड़े आतंकवादियों को सूचीबद्ध करने की बात आती है,तो चीन इसमें बार-बार बाधा डालती है।
नवंबर 2008 में मुंबई पर आतंकवादी हमले किए गए,जिसका मास्टरमाइंड लश्कर-ए-तैयबा के साजिद मीर था। पूरे मुंबई में आतंकवादी इस्लामी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के 10 सदस्यों ने चार दिनों तक12 समन्वित गोलीबारी और बमबारी हमलों को अंजाम दिया था। 26/11 के इस आतंकवादी हमले के मास्टरमाइंड को 2009 में वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के प्रस्ताव को चीन ने रोक दिया।
परिषद की समितियों के कामकाज में रुचिरा कंबोज ने पारदर्शिता लाने की बात कही है।
रुचिरा कंबोज ने आज के बहुध्रुवीय विश्व में विकासशील देशोंं एशिया,अफ्रीका,लैटिन अमेरिका को सुरक्षा परिषद में प्रतिनिधित्व करने का अवसर दिए जाने का समर्थन करते हुए कहा कि हम चाहते हैं कि यह परिषद ऐसा बने जो 21वीं सदी के उद्देश्यों की पूर्ति कर सकें।
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में संशोधन जरुरी है और उसके लिए हम अंतर-सरकारी वार्ता के पर्दे के पीछे नहीं छिप सकते हैं,क्योंकि इसकी समय सीमा तय नहीं है।
