भारतीय सैनिक

जम्मू के डोडा मुठभेड़ में एक पुलिसकर्मी समेत पाँच सुरक्षाकर्मी हुए शहीद

जम्मू,16 जुलाई (युआईटीवी)- जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में सोमवार को भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हुए मुठभेड़ में एक पुलिसकर्मी घायल हो गए थे,जिसकी मंगलवार को मौत हो गई। इस मुठभेड़ के दौरान एक अधिकारी भी शहीद हुए हैं। अब तक पाँच सुरक्षाकर्मी इस मुठभेड़ में शहीद हो चुके हैं। पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी समूह जैश-ए-मोहम्मद के एक छाया समूह ‘कश्मीर टाइगर्स’ ने हमले की जिम्मेदारी ली थी।

इससे पूर्व,आतंकवादियों और भारतीय सुरक्षाकर्मियों के बीच डोडा जिले के जंगल वाले इलाके में रात भर मुठभेड़ हुई,जिसमें एक कैप्टन समेत सेना के चार जवान शहीद हो गए थे।

शुरुआत में सूचना मिली थी कि 15 जुलाई और 16 जुलाई की दरम्यानी रात में जो मुठभेड़ हुई,उसमें एक पुलिसकर्मी समेत पाँच पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि सोमवार शाम करीब 7:45 बजे उरारबागी में राष्ट्रीय राइफल्स और पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप के जवानों ने घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया था,उसके बाद से मुठभेड़ शुरू हो गई। एक अधिकारी तथा एक पुलिसकर्मी समेत चार सैन्यकर्मी बीस मिनट से अधिक देरी तक चली गोलीबारी में घायल हो गए।

उन्होंने बताया कि आतंकवादियों के खिलाफ इलाके में अभियान चलाया जा रहा है और यह जारी है।

डोडा जम्मू संभाग के घने जंगलों वाले पहाड़ी जिलों में से एक है और यहाँ के बारे में ऐसा माना जाता है कि आतंकवादियों द्वारा गुरिल्ला युद्ध की नीति अपनाया जा रहा है।

हाल ही में रक्षा और गृह मंत्रालय ने आतंकवादियों की गतिविधियों से निपटने के लिए सेना और सीआरपीएफ को जम्मू संभाग के घने जंगलों वाले पहाड़ी इलाकों में तैनात किए जाने का निर्णय एक उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक में लिया गया था।

प्रियंका गांधी वाड्रा और मल्लिकार्जुन खरगे ने जम्मू कश्मीर के डोडा में आतंकवादियों से हुई मुठभेड़ में सेना के एक अधिकारी समेत चार जवानों की शहादत की खबर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दुःख व्यक्त किया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर खरगे ने लिखा कि,जम्मू-कश्मीर के डोडा में आतंकी मुठभेड़ में एक अधिकारी समेत चार बहादुर सेना के जवानों की शहादत से बेहद दुःखी हूँ। भारत माता की सेवा में सर्वोच्च न्योछावर करने वाले हमारे वीर जवानों के परिवारों के प्रति हमारी संवेदनाएँ हैं। घायलों के प्रति हम संवेदना व्यक्त करते हैं और उनके शीघ्र पूर्ण स्वस्थ होने की प्रार्थना करते हैं।


उन्होंने केंद्र सरकार पर इस मामले में सवाल उठाते हुए कहा कि,जम्मू-कश्मीर में पिछले 36 दिनों में जो आतंकी हमले हुए हैं,उसे देखते हुए हमारी सुरक्षा रणनीति में सावधानीपूर्वक बदलाव करने की जरूरत है। मोदी सरकार तो इस प्रकार से काम कर रही है कि मानों सब कुछ सामान्य है और कुछ भी नहीं बदला है। उन्हें मालूम होना चाहिए कि इन हमलों का खामियाजा जम्मू क्षेत्र को भुगतना पड़ रहा है। हम अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को फर्जी बयानबाजी,झूठी शेखी बघारने और शोर-शराबा करके खतरे में नहीं डाल सकते हैं। सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ हमें एक राष्ट्र के रूप में सामूहिक रूप से लड़ना होगा। हमारे बहादुर सशस्त्र बलों के साथ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस मजबूती से खड़ी है।

वहीं प्रियंका ने कहा कि पूरा देश जम्मू-कश्मीर में 4 जवानों की शहादत पर दुःखी है और आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता से खड़ा है। लेकिन,आतंकवादी हमलों के लगातार बढ़ने से गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में पिछले 78 दिन में 11 आतंकवादी हमले हो चुके हैं,जिसमें सेना और पुलिस के 13 जवान शहीद हुए।एक यात्री बस पर 9 जून को आतंकी हमले हुए थे,जिसमें 9 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। आगे उन्होंने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार इन हमलों और हमारे सैनिकों की शहादतें रोकने के लिए कूटनीतिक-रणनीतिक मोर्चे पर क्या उपाय कर रही है? आतंकवाद को खत्म करने के फर्जी दावे नोटबंदी और अनुच्छेद 370 को हटाने के बहाने से किया जा रहा है,जिसकी भारी कीमत हमारे देश के जवान अपनी जान देकर चुका रहे हैं। अपने शहीदों की लाशों को हम कब तक गिनते रहेंगे?

 

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