नई दिल्ली,18 जुलाई (युआईटीवी)- वोलाटाइल्स इन्वेस्टिगेटिंग पोलर एक्सप्लोरेशन रोवर (वीआईपीईआर) चंद्रमा रोवर कार्यक्रम को नासा ने बजट की कमी के कारण रद्द करने की घोषणा की है,जिसकी लागत पहले ही $450 मिलियन थी। मूल रूप से नासा की वाणिज्यिक चंद्र पेलोड सर्विसेज (सीएलपीएस) पहल के हिस्से के रूप में एस्ट्रोबोटिक ग्रिफिन लैंडर पर 2025 में लॉन्च करने के लिए निर्धारित किया गया था,इस मिशन का उद्देश्य 100 दिनों में बर्फ जमा के लिए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव का पता लगाना था।
नासा मुख्यालय में अन्वेषण के उप एसोसिएट प्रशासक जोएल किर्न्स ने बताया कि वीआईपीईआर टीम में विश्वास के बावजूद,निर्णय वित्तीय सीमाओं से प्रेरित था। रद्दीकरण से नासा को विकास लागत में अतिरिक्त $84 मिलियन की बचत होने की उम्मीद है।
मिशन को देरी का सामना करना पड़ा,मूल रूप से 2023 के अंत में लॉन्च की योजना बनाई गई,फिर 2024 के अंत में और अंततः सितंबर 2025 तक बढ़ा दी गई। नासा के विज्ञान मिशन निदेशालय के एसोसिएट प्रशासक निकोला फॉक्स ने टीम के प्रयासों की सराहना की,खासकर महामारी के दौरान,लेकिन कठिनाइयों को स्वीकार किया,यह निर्णय बजटीय बाधाओं के कारण लिया गया।
वीआईपीईआर रोवर,नासा का पहला रोबोटिक मून रोवर,नष्ट कर दिया जाएगा,इसके वैज्ञानिक उपकरणों को संभावित रूप से भविष्य के चंद्र मिशनों के लिए पुन: उपयोग किया जाएगा। इस बीच, एस्ट्रोबोटिक टेक्नोलॉजी 2025 के लॉन्च के लिए निर्धारित ग्रिफिन मिशन वन के साथ आगे बढ़ेगी,जो ग्रिफिन लैंडर और उसके इंजनों की क्षमताओं का प्रदर्शन करेगी।
नासा ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ का पता लगाने के लिए वैकल्पिक तरीकों का पता लगाने की योजना बनाई है,जिसमें 2024 के अंत में उतरने वाला पोलर रिसोर्सेज आइस माइनिंग एक्सपेरिमेंट-1 (PRIME-1) भी शामिल है।

