भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर

एस. जयशंकर ने चीन के विदेश मंत्री से रिश्ते सामान्य बनाने के लिए एलएसी का सम्मान करने की बात कही

वियनतियाने,26 जुलाई (युआईटीवी)- विदेश मंत्री एस. जयशंकर गुरुवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी से लाओस की राजधानी वियनतियान में आसियान देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान मुलाकात की। इस दौरान एक बार फिर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-चीन के मध्य संबंधों में आपसी सम्मान,आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित के महत्व पर विशेष जोर दिया।

वांग यी के साथ बैठक के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में लिखा कि दोनों देशों के बीच जारी द्विपक्षीय संबंधों के बारे में हमने अपनी चर्चाओं को जारी रखा। सीमा पर जो स्थिति है,उसका असर हमारे संबंधों की स्थिति पर भी अनिवार्य रूप से दिखाई देगा। दोनों देशों के बीच मजबूत मार्गदर्शन की आवश्यकता पर सहमति बनी,ताकि सेनाओं के बीच के टकराव को रोकने की प्रक्रिया को पूरा किया जा सकेगा।

चीनी विदेश मंत्री वांग यी चीन के कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य भी हैं।

एलएसी (वास्तविक नियंत्रण रेखा) और पिछले समझौतों पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पूरा सम्मान सुनिश्चित करने की बात कहते हुए कहा कि हमारे संबंधों में सुधार लाना और स्थिर करना हमारे आपसी हित में है। वर्तमान में हमें सभी जरूरी मामलों को उद्देश्य और तत्परता की भावना के साथ देखना चाहिए।


बाद में एक बयान में विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों मंत्रियों ने कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में इस महीने की शुरुआत में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों मंत्रियों के बीच हुई बैठक की स्थिति की प्रगति की समीक्षा की। उनकी बातचीत वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शेष मुद्दों का शीघ्र समाधान खोजने पर केंद्रित थी,जो दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और पुनर्निर्माण के लिए जरुरी है।

विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा कि द्विपक्षीय संबंधों में सामान्य स्थिति के लिए सीमाओं पर शांति और स्थिरता तथा एलएसी का सम्मान आवश्यक है। अतीत में दोनों सरकारों के बीच जो भी प्रासंगिक द्विपक्षीय समझौते हुए हैं,उसका दोनों पक्षों को पालन करना चाहिए। साथ ही प्रोटोकॉल और समझ का भी दोनों देशों को पूरी तरह से पालन करना चाहिए।

चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए दोनों पक्ष भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय पर कार्य तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) की एक प्रारंभिक बैठक का आयोजन करेंगे।

भारत का कहना है कि चीन के साथ उसके संबंध तब तक सामान्य नहीं हो सकते,जब तक की सीमा क्षेत्रों में शांति स्थापित नहीं हो जाती है। भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच मई 2020 से गतिरोध है। अभी तक सीमा विवाद का पूर्ण समाधान नहीं हो पाया है, हालाँकि टकराव वाले कई बिंदुओं से दोनों पक्ष पीछे हटे हैं। गलवान घाटी में जून 2020 में भीषण झड़प हुई थी,उसके बाद से दोनों देशों के बीच के संबंधों में काफी गिरावट आ गई थी।

 

 

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