अहमदाबाद,31 अगस्त (युआईटीवी)- ग्लोबल ओएसवी (ऑफशोर सपोर्ट वेसल) संचालक एस्ट्रो ऑफशोर में अडानी पोर्ट्स और स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एपीएसईजेड) ने 185 मिलियन डॉलर में 80 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया। यह डील एक ऑल-कैश डील थी। कंपनी इससे अपने बेड़ा को बढ़ाएगी और पोर्ट के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी कार्य करेगी।
अडानी पोर्ट्स के ग्लोबल मरीन पोर्टफोलियो को आगे बढ़ाने में एस्ट्रो ऑफशोर के आने से मदद मिलेगी और टियर-1 के ग्राहकों को इससे जोड़ने में मदद मिलेगी।
अदाणी पोर्ट्स इस डील के तहत 80 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदेगा। इस सौदे का हिस्सा रहे एस्ट्रो ऑफशोर के पास 26 जहाजों का बेड़ा है,जिसमें बार्ज और वर्कबोट्स शामिल हैं। लार्सन एंड टुब्रो तथा एनएमडीसी जैसी बड़ी कंपनियाँ इसके ग्राहक हैं।
अडानी समूह के कंपनी के तरफ से ट्रांजैक्शन का उद्यम वैल्यू की जानकारी देते हुए कहा गया कि 235 मिलियन डॉलर इस ट्रांजैक्शन का उद्यम वैल्यू है। कंपनी की फाइनेंसियल पर पहले वर्ष से ही इसका असर देखने को मिलेगा।
एपीएसईजेड के पूर्णकालिक डायरेक्टर और सीईओ अश्विनी गुप्ता ने कहा कि “दुनिया के सबसे बड़े मरीन ऑपरेटर” बनने के लक्ष्य की पूर्ति के लिए एस्ट्रो का अधिग्रहण किया गया है। मौजूदा समय में हमारे पास 142 टग और ड्रेजर के बेड़े हैं और एस्ट्रो के अधिग्रहण से इसमें 26 ओएसवी जुड़ जाएँगे। एस्ट्रो के अधिग्रहण के बाद हमारे बेड़े के आकार बढ़कर 168 हो जाएगा।
आगे उन्होंने कहा कि इस अधिग्रहण से कंपनी को टियर-1 ग्राहकों तक पहुँच स्थापित करने में मदद मिलेगी। पूर्वी एशिया,अरब सागर तथा भारतीय उपमहाद्वीप के बाजार पर इस अधिग्रहण से मजबूत पकड़ बनेगी।
अफ्रीका,मध्यपूर्व,पूर्वी एशिया तथा भारत में एस्ट्रो एक ग्लोबल ओएसवी ऑपरेटर है। कंपनी का नेट कैश सकारात्मक (पॉजिटिव) है। एस्ट्रो ने 30 अप्रैल 2024 को 95 मिलियन डॉलर की आय और 41 मिलियन डॉलर का ईबीआईटीडीए दर्ज किया था।
वहीं देश की सबसे बड़ी पोर्ट डेवलपर और ऑपरेटर अडानी पोर्ट्स हैं। देश में 15 स्थानों पर कंपनी के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पोर्ट और टर्मिनल हैं।
वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही में अडानी पोर्ट्स 3,107 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था। इस दौरान 7,560 करोड़ रुपये कंपनी की आय रही थी।
अडानी पोर्ट्स ने कहा कि एक महीने के भीतर यह अधिग्रहण पूरा हो जाएगा और इसके लिए किसी रेगुलेटरी मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी।
ऐसे समय में यह सौदा हो रहा है,जब भारत की सबसे बड़ी निजी पोर्ट कंपनी अडानी पोर्ट्स अपने मुख्य पोर्ट संचालन से आगे बढ़कर अन्य क्षेत्रों में भी अपनी उपस्थिति को बढ़ाना चाहती है। अडानी पोर्ट्स का लक्ष्य जेएसडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर,गुजरात पिपावाव जैसे छोटे प्रतिद्वंद्वियों से आगे बने रहना है।
