नई दिल्ली,31 अगस्त (युआईटीवी)- भारतीय विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने भारत और पाकिस्तान के संबंधों पर दिल्ली में आयोजित एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में खुलकर बात की। यहाँ पर उन्होंने पड़ोसी देश पाकिस्तान को दो टूक जवाब भी दिया है और कहा कि किसी से भी भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते छिपे हुए नहीं है। दस साल से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत लगभग बंद है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ निर्बाध बातचीत का दौर समाप्त हो चुका है।
भारत की विदेश नीति पर बात करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान,अफगानिस्तान,बांग्लादेश,मालदीव,श्रीलंका,समेत कई अन्य पड़ोसियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के हर देश के लिए पड़ोसी एक समस्या है। अगर ध्यान से पूरी दुनिया को देखा जाए तो कोई भी देश ऐसा नहीं है,जिसका अपने पड़ोसी देश के साथ समस्याएँ नहीं हैं। हर देश को अपने पड़ोसी के साथ कुछ-न-कुछ समस्याएँ जरूर सामने आएँगी।
आगे उन्होंने कहा कि सभी कामों के परिणाम होते हैं और यदि जम्मू-कश्मीर के संबंध में बात की जाए तो कश्मीर से अनुच्छेद-370 को हटा दिया गया है। इसलिए आज मुद्दा यह है कि पाकिस्तान के साथ हम किस प्रकार के संबंधों पर विचार कर सकते हैं।
Speaking at the release of Amb Rajiv Sikri’s book ‘Strategic Conundrums: Reshaping India’s Foreign Policy’ in Delhi today.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) August 30, 2024
विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने स्पष्ट तौर से कहा कि, ‘पाकिस्तान के साथ बातचीत का दौर समाप्त हो चुका है,हम निष्क्रिय नहीं, प्रतिक्रिया का जवाब देंगे’। चाहे सकारात्मक दिशा में घटनाएँ जाएँ या नकारात्मक दिशा में,किसी भी तरह से हम प्रतिक्रिया करेंगे।
विदेश मंत्रलाय कार्यालय के मुताबिक,इस्लामाबाद में अक्टूबर में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक होने वाला है,जिसके लिए पाकिस्तान ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आधिकारिक रूप से आमंत्रित किया है।
किताब के विमोचन समारोह में विदेश मंत्री डॉक्टर एस.जयशंकर ने किताब के विमोचन समारोह में अफगानिस्तान पर बोलते हुए कहा कि,लोगों के बीच के संबंध सामाजिक स्तर पर मजबूत हैं। भारत के लिए यह एक निश्चित सद्भावना है। अफगान नीति की समीक्षा करने के बाद,हम अपने हितों के बारे में बहुत स्पष्ट हैं। हमें यह समझना चाहिए कि अमेरिका की उपस्थिति के बिना वाले अफगानिस्तान के तुलना में अमेरिका की उपस्थिति वाला अफगानिस्तान बहुत अलग है।
विदेश मंत्री ने मालदीव के बारे में कहा कि माले के प्रति हमारे दृष्टिकोण और रिश्तों में उतार-चढ़ाव रहे हैं। यहाँ एक निश्चित स्थिरता,एकरूपता की कमी है। भारत ने इस रिश्ते में बहुत निवेश किया है और हमारे प्रयासों को मालदीव ने पहचाना है। मालदीव में यह मान्यता है कि यह संबंध एक स्थिर शक्ति है।
विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने बांग्लादेश का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे रिश्ते बांग्लादेश के साथ उतार-चढ़ाव वाले रहे हैं। हमें अब बांग्लादेश के नई सरकार के साथ डील करना है।
