नई दिल्ली,7 अक्टूबर (युआआईटीवी)- मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू अपने पाँच दिवसीय दिवसीय यात्रा पर रविवार को भारत पहुँचे हैं। यह मुइज्जू की भारत की पहली द्विपक्षीय यात्रा है। 6 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक वे भारत में रहेंगे। हालाँकि,मालदीव के राष्ट्रपति इससे पहले इस साल जून में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए दिल्ली आए थे। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने उनके आगमन पर उनसे मुलाकात की।
आज,सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने दिल्ली के हैदराबाद हाउस में दोनों देशों के मध्य के संबंधों पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता की। यह बैठक मालदीव और भारत के विशेष रिश्तों को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रही है। मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू अपनी पाँच दिवसीय भारत यात्रा के तहत रविवार को नई दिल्ली पहुँचे थे, और यह उनकी पदभार ग्रहण करने के बाद की पहली आधिकारिक भारत यात्रा है।
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद हाउस में राष्ट्रपति मुइज्जू का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस पोस्ट में लिखा गया कि, “भारत-मालदीव विशेष संबंधों को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद हाउस पहुँचने पर मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू का स्वागत किया। दोनों नेताओं के मध्य भारत-मालदीव के द्विपक्षीय संबंधों पर व्यापक चर्चा हुई।”
इस बैठक का उद्देश्य न केवल दोनों देशों के पारस्परिक संबंधों को मजबूत करना है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा को भी सुनिश्चित करना है। मालदीव, भारत का एक महत्वपूर्ण पड़ोसी और हिंद महासागर में रणनीतिक रूप से स्थित देश है। पिछले कुछ समय से मालदीव में राजनीतिक घटनाक्रम के कारण भारत-मालदीव संबंधों में थोड़ी अस्थिरता देखी गई थी,लेकिन वर्तमान में राष्ट्रपति मुइज्जू ने भारत के साथ संबंधों को सुधारने और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है।
मुइज्जू की भारत यात्रा का उद्देश्य इन द्विपक्षीय संबंधों को एक नई दिशा और गति देना है। प्रधानमंत्री मोदी और मुइज्जू के बीच हुई इस वार्ता में दोनों देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा, सामरिक सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।
मुइज्जू के भारत दौरे के पहले दिन,राष्ट्रपति भवन में उनका औपचारिक स्वागत किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुइज्जू का स्वागत किया और इसके बाद मुइज्जू ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह यात्रा दोनों देशों के आपसी संबंधों में एक नए अध्याय के खोलने का संकेत देती है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी मालदीव के राष्ट्रपति से मुलाकात की और भारत-मालदीव संबंधों पर चर्चा की। अपनी मुलाकात के बाद विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा, “मुझे राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू से मुलाकात कर खुशी हुई। उन्होंने भारत-मालदीव संबंधों को बढ़ाने की प्रतिबद्धता दिखाई है। मुझे विश्वास है कि कल प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी वार्ता हमारे मैत्रीपूर्ण संबंधों को नई गति प्रदान करेगी।”
मालदीव के राष्ट्रपति के साथ उनकी पत्नी साजिदा मोहम्मद और एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी इस यात्रा का हिस्सा हैं। मुइज्जू की यह यात्रा न केवल राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि व्यापार और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी बेहद अहम है। राष्ट्रपति मुइज्जू मंगलवार को आगरा का दौरा करेंगे और ताजमहल जैसी विश्व धरोहर स्थलों का अवलोकन करेंगे। इसके अलावा, मालदीव के राष्ट्रपति और उनका प्रतिनिधिमंडल मुंबई और बेंगलुरु का भी दौरा करेगा, जहाँ वे व्यापारिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे और दोनों देशों के मध्य के आर्थिक संबंधों को और मजबूती देने पर चर्चा करेंगे।
मालदीव, भारत के लिए हिंद महासागर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण साझेदार है तथा दोनों देशों के मध्य के घनिष्ठ संबंध सुरक्षा,सामरिक सहयोग और विकास परियोजनाओं पर आधारित हैं। हालाँकि, हाल के दिनों में मालदीव में चीन के बढ़ते प्रभाव और कुछ आंतरिक राजनीतिक परिस्थितियों के कारण भारत-मालदीव संबंधों में उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं,लेकिन राष्ट्रपति मुइज्जू ने हाल ही में दिए गए अपने बयानों में यह स्पष्ट किया है कि वे भारत के साथ घनिष्ठ और मजबूत संबंध बनाए रखना चाहते हैं।
राष्ट्रपति मुइज्जू के कार्यालय ने उनके भारत आगमन से पहले एक बयान जारी करते हुए कहा था कि,”राष्ट्रपति मुइज्जू मालदीव के विकास और वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत के साथ हमारे संबंधों को दीर्घकालिक और स्थायी बनाने की दिशा में उनकी यात्रा महत्वपूर्ण होगी।”
मालदीव की इस यात्रा के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि दोनों देशों के संबंध किस दिशा में जा रहे हैं और क्या यह यात्रा भारत और मालदीव के बीच नए अवसरों और सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेगी।