नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी लाओस यात्रा दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन के साथ भारत के मजबूत और लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को और भी गहराई से प्रतिबिंबित करती है। पीएम मोदी का यह यात्रा भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ के प्रति एक ठोस प्रतिबद्धता है, जो दक्षिण पूर्व एशिया और भारत के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। 10-11 अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी लाओस की राजधानी वियनतियाने में 21वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन और 19वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए वहाँ मौजूद होंगे। लाओस के प्रधानमंत्री सोनेक्से सिफानदोन के निमंत्रण पर यह यात्रा हो रही है। सिफानदोन वर्तमान में आसियान के अध्यक्ष हैं, इसलिए इस बैठक को और भी अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य आसियान के साथ भारत के संबंधों को और अधिक मजबूत करना है। यह शिखर सम्मेलन भारत और आसियान देशों के मध्य के संबंधों की प्रगति की समीक्षा करेगा और भविष्य के सहयोग की दिशा तय करेगा। भारत और आसियान के बीच यह संबंध व्यापक रणनीतिक साझेदारी के अंतर्गत आते हैं, जिसमें कई महत्वपूर्ण क्षेत्र जैसे-व्यापार,सुरक्षा,प्रौद्योगिकी तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान शामिल हैं। आसियान के साथ भारत का जुड़ाव न केवल भौगोलिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की उभरती हुई रणनीतिक और आर्थिक गतिशीलता में भी इसका अहम योगदान है।
पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन एक ऐसा मंच है, जहाँ क्षेत्रीय और वैश्विक नेताओं को सामरिक और सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने का मौका मिलता है। यह मंच विशेष रूप से क्षेत्र में सामरिक विश्वास को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण को संतुलित करने में योगदान देता है। यह शिखर सम्मेलन भारत को आसियान और अन्य प्रमुख देशों के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है।
भारत ने पिछले एक दशक में अपनी ‘एक्ट ईस्ट नीति’ के माध्यम से दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ अपने संबंधों को मज़बूत किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा आसियान की केंद्रीयता और इस क्षेत्र के प्रति आसियान के दृष्टिकोण का समर्थन किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा है कि एक मजबूत और एकीकृत आसियान हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। यह दृष्टिकोण भारत के हिंद-प्रशांत रणनीति का अभिन्न अंग है, जिसमें आसियान एक प्रमुख साझेदार के रूप में देखा जाता है।
पिछले साल, प्रधानमंत्री मोदी ने नई दिल्ली द्वारा आयोजित जी-20 नेताओं के शिखर सम्मेलन से ठीक तीन दिन पहले जकार्ता की यात्रा की थी। उस समय भी प्रधानमंत्री मोदी ने आसियान भागीदारों के साथ आसियान-भारत व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर व्यापक चर्चा की थी। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आसियान की केंद्रीय भूमिका को पीएम मोदी ने हमेशा समर्थन दिया है और इस यात्रा के दौरान भी इस बात पर ज़ोर दिया जाएगा।
भारत की एक्ट ईस्ट नीति का मूल उद्देश्य आसियान के साथ संबंधों को मज़बूत करना है। इसके तीन प्रमुख लक्ष्य हैं:
* कनेक्टिविटी बढ़ाना: भारत और आसियान देशों के बीच संपर्क को मजबूत करना, चाहे वह भौतिक संपर्क हो या डिजिटल। यह आर्थिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को और बढ़ावा देने में मदद करता है।
* आसियान को मजबूत करना: आसियान संगठन को और अधिक प्रभावशाली बनाना, ताकि वह क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों का सामना कर सके। आसियान की स्थिरता और एकता,क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
* समुद्री क्षेत्र में सहयोग: भारत और आसियान के बीच समुद्री सुरक्षा और अन्य समुद्री मुद्दों पर व्यावहारिक सहयोग को और अधिक व्यापक बनाना। यह खासकर दक्षिण चीन सागर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है, जहाँ भारत और आसियान देशों के बीच चीन के साथ बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है।
दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते सैन्य और रणनीतिक विस्तार से चिंतित कई आसियान सदस्य देश भारत के साथ रक्षा संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। भारत ने हमेशा यह कहा है कि दक्षिण चीन सागर में शांति और स्थिरता बनाए रखना सभी के हित में है। 18वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि दक्षिण चीन सागर के लिए कोई भी आचार संहिता प्रभावी और संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (यूएनसीएलओएस) के अनुरूप होनी चाहिए। इसके अलावा, इसमें उन देशों के हितों को भी ध्यान में रखना चाहिए, जो सीधे तौर पर चर्चाओं में शामिल नहीं हैं।
भारत इस क्षेत्र में अपने समुद्री हितों की सुरक्षा के लिए आसियान देशों के साथ सहयोग को महत्वपूर्ण मानता है। यह सहयोग न केवल सामरिक है,बल्कि आर्थिक और सांस्कृतिक भी है। आसियान देश भारत के साथ समुद्री सुरक्षा,आर्थिक विकास और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से अपने संबंधों को और मजबूत करना चाहते हैं।
आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में भारत और आसियान के बीच भविष्य के सहयोग की दिशा तय की जाएगी। यह सहयोग न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि आर्थिक विकास और सांस्कृतिक साझेदारी को भी बढ़ावा देगा। प्रधानमंत्री मोदी की लाओस यात्रा भारत की एक्ट ईस्ट नीति के तहत आसियान के साथ संबंधों को और मज़बूत करने का संकेत है। यह दौरा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका को और भी महत्वपूर्ण बनाएगा और आसियान देशों के साथ भारत के संबंधों को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा।
आसियान और भारत के बीच यह साझेदारी न केवल द्विपक्षीय स्तर पर, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में इस क्षेत्र में भारत की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होगी, खासकर जब बात रणनीतिक संतुलन और क्षेत्रीय स्थिरता की हो।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा इस दिशा में एक और मजबूत कदम साबित होगी, जो न केवल आसियान देशों के साथ भारत के रिश्तों को मज़बूत करेगी, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक नई दिशा भी स्थापित करेगी।
