डॉलर

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार आठ सप्ताह में पहली बार घटा,3.7 अरब डॉलर की गिरावट

मुंबई,11 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 4 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में गिरावट देखी गई, जो पिछले लगातार आठ हफ्तों की बढ़त के बाद का पहला मौका है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी किए गए आँकड़ों के अनुसार,4 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 3.709 अरब डॉलर घटकर 701.176 अरब डॉलर पर आ गया। इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में आई 3.511 अरब डॉलर की कमी है,जिसके बाद इसका स्तर 612.643 अरब डॉलर रह गया।

यह गिरावट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले 27 सितंबर को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 12.588 अरब डॉलर की वृद्धि के साथ 704.885 अरब डॉलर पर पहुंच गया था। लगातार सात सप्ताहों के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार में 34.766 अरब डॉलर का इज़ाफा हुआ था, जिससे भारत की मुद्रा स्थिति को एक मजबूत आधार मिला था।

गौरतलब है कि चीन, जापान, और स्विट्जरलैंड के बाद भारत दुनिया का चौथा देश है, जिसके पास 700 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार है। यह आंकड़ा भारत की आर्थिक स्थिति और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में उसकी वित्तीय क्षमता को दर्शाता है।

इसके अलावा, 4 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) में भी चार करोड़ डॉलर की गिरावट दर्ज की गई, जिससे इसका कुल मूल्य 65.756 अरब डॉलर रह गया।

रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, विशेष आहरण अधिकार (Special Drawing Rights – SDR) में भी 12.3 करोड़ डॉलर की कमी आई, जिससे इसका मूल्य 18.425 अरब डॉलर पर पहुंच गया। साथ ही, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास भारत की आरक्षित निधि (Reserve Position) में भी 3.5 करोड़ डॉलर की कमी हुई, जिससे इसका स्तर 4.352 अरब डॉलर रह गया।

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मुख्य रूप से फॉरेन करेंसी एसेट्स, गोल्ड रिजर्व, एसडीआर और आईएमएफ के पास आरक्षित निधियों में शामिल होता है। ये सभी घटक मिलकर देश की विदेशी मुद्रा की स्थिति को मजबूत बनाते हैं। जब विदेशी मुद्रा भंडार उच्च स्तर पर होता है, तो रिजर्व बैंक को रुपये के ऊपर अचानक किसी दबाव की स्थिति में हस्तक्षेप करने का मौका मिलता है। इससे आयात बिल के भुगतान में भी आसानी होती है, और देश की अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान होती है।

भू-राजनीतिक परिस्थितियों और वैश्विक बाजार की अस्थिरता को देखते हुए, भारत अपने विदेशी मुद्रा भंडार को तेजी से बढ़ा रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार के बढ़ते स्तर से देश को वैश्विक आर्थिक अस्थिरताओं के दौरान अपनी अर्थव्यवस्था की सुरक्षा करने का बेहतर मौका मिलता है, जिससे आयात-निर्यात और विदेशी निवेश में स्थिरता बनी रहती है।

अंततः, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में इस हल्की गिरावट के बावजूद, यह अब भी एक मजबूत स्थिति में है और देश के आर्थिक स्थायित्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।