कोलकाता,14 अक्टूबर (युआईटीवी)- कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में जूनियर डॉक्टर के साथ हुए बलात्कार और हत्या के मामले को लेकर जूनियर डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन अब गंभीर रूप ले चुका है। इस मामले में न्याय की माँग करते हुए जूनियर डॉक्टरों का आमरण अनशन सोमवार को दसवें दिन में प्रवेश कर गया है। उनकी माँग है कि सरकार इस घटना पर उचित कार्रवाई करे और पीड़िता को न्याय दिलाए।
आमरण अनशन पर बैठे जूनियर डॉक्टरों की संख्या कम हो गई है और अब सिर्फ छह डॉक्टर इस हड़ताल में शामिल हैं। इसका मुख्य कारण है कि अनशन पर बैठे कई डॉक्टरों की सेहत बिगड़ने लगी है। रविवार रात पुलस्त्य आचार्य की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें एनआरएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराया गया। आचार्य खुद इसी अस्पताल में जूनियर डॉक्टर के रूप में कार्यरत हैं। उनकी स्थिति गंभीर हो गई थी, जब उन्हें लगातार भूख हड़ताल के कारण पेट में दर्द और उल्टी होने लगी।
इससे पहले भी आरजी कर मेडिकल कॉलेज के अनिकेत महतो,कलकत्ता मेडिकल कॉलेज के अनुस्तुप मुखोपाध्याय और नॉर्थ बंगाल मेडिकल कॉलेज के आलोक वर्मा की तबीयत खराब हो चुकी है। इन सभी को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
इस गंभीर मुद्दे पर समाधान निकालने के लिए सोमवार को पश्चिम बंगाल सरकार और विभिन्न डॉक्टर एसोसिएशन के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। यह बैठक दोपहर 12:30 बजे राज्य के स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय,स्वास्थ्य भवन,साल्ट लेक मेंआयोजित की जाएगी। बैठक में भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) और पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज पंत भी शामिल होंगे। इस बैठक का उद्देश्य जूनियर डॉक्टरों और सरकार के बीच चल रहे गतिरोध का समाधान निकालना है,ताकि हड़ताल खत्म हो सके और चिकित्सा सेवाएँ फिर से सामान्य हो सकें।
इस बीच, विभिन्न निजी अस्पतालों से जुड़े डॉक्टरों ने भी सोमवार सुबह से अपने अस्पतालों में आंशिक रूप से काम बंद कर दिया है। यह बंद बुधवार सुबह छह बजे तक जारी रहेगा। इस अवधि के दौरान केवल आपातकालीन चिकित्सा सेवाएँ ही दी जाएँगी,जबकि नियमित सेवाओं को बंद रखा जाएगा।
इस हड़ताल और अनशन के कारण पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य सेवाएँ प्रभावित हो रही हैं और अब सरकार पर दबाव है कि जल्द-से-जल्द इस मुद्दे का समाधान निकाला जाए। डॉक्टरों का कहना है कि वे न्याय की माँग से पीछे नहीं हटेंगे और यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक उन्हें उचित कार्रवाई नहीं मिलती।
