सेमीकंडक्टर

सेमीकंडक्टर कंपनी के फाउंडर ने ‘बिहार में स्टार्टअप शुरू करने को अपने जीवन का सबसे बुरा फैसला’ बताया

नई दिल्ली,15 अक्टूबर (युआईटीवी)- बिहार में स्टार्टअप्स की स्थापना और संचालन को लेकर हाल ही में एक पोस्ट ने सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियाँ बटोरी है। इस पोस्ट के लेखक चंदन राज हैं,जिन्होंने बिहार की पहली सेमीकंडक्टर कंपनी, सुरेश चिप्स एंड सेमीकंडक्टर प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की है। चंदन ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट किया है कि बिहार में स्टार्टअप शुरू करना उनके जीवन का सबसे बुरा फैसला था।

चंदन का अनुभव इस बात का उदाहरण है कि कैसे सरकारी अधिकारियों की बेरुखी और बुनियादी सुविधाओं की कमी किसी व्यवसाय के लिए कितनी बाधक हो सकती है। उनका कहना है कि उन्होंने कई महत्वपूर्ण क्लाइंट खो दिए हैं क्योंकि उनके कार्यालय के आसपास की बुनियादी ढाँचे की स्थिति अत्यंत खराब है। रास्तों की कमी और सुरक्षा की चिंता ने उन्हें व्यवसाय संचालन में बाधित किया है।

चंदन का शैक्षिक और पेशेवर पृष्ठभूमि भी उल्लेखनीय है। उन्होंने ओडिशा के बीजू पटनायक यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नॉलजी से इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद उन्होंने सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और इंटेल जैसी प्रमुख कंपनियों में कार्य किया है। वह दिसंबर 2020 में बिहार के मुजफ्फरपुर में अपनी कंपनी की स्थापना करने का साहसिक कदम उठाते हैं, लेकिन उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें इतनी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

चंदन ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए लिखा है कि उनकी कंपनी के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचे की कमी के कारण काम करना कठिन हो गया है। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी का कार्यालय जिस स्थान पर है, वहाँ न तो उचित सड़कें हैं और न ही स्ट्रीट लाइट। यह स्थिति उनके ग्राहकों के साथ व्यावसायिक संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है और वे उनकी सेवाओं का उपयोग करने से कतराते हैं।

सिर्फ सड़कें ही नहीं, चंदन ने यह भी बताया कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों से सहायता माँगी थी। उन्होंने एक ईमेल साझा किया,जिसमें उन्होंने अपने क्षेत्र की समस्याओं को स्पष्ट किया था,लेकिन अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने लिखा कि वे अपने काम के लिए पैसे माँगने वाले अधिकारियों से मिले हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ।

चंदन ने बिहार को “निराशा की भूमि” के रूप में वर्णित किया है। उनका कहना है कि यहाँ सेमीकंडक्टर और वीएलएसआई जैसी उच्च तकनीकी कंपनियों के लिए जीवित रहना बेहद मुश्किल हो गया है। चार साल बीतने के बावजूद उन्हें बुनियादी ढाँचे में कोई सुधार नहीं दिखाई दे रहा है।

उनकी इस पोस्ट के बाद,मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन ने प्रतिक्रिया दी है। प्रशासन ने बताया कि उनकी कार्यालय के रास्ते का निर्माण दशहरा के बाद शुरू किया जाएगा। इस खबर के बाद चंदन ने प्रशासन का धन्यवाद किया, लेकिन क्या यह एक मात्र कदम उनके जैसे उद्यमियों के लिए पर्याप्त होगा? यह एक बड़ा प्रश्न है।

इस स्थिति में, यह स्पष्ट है कि सरकार को स्थानीय स्टार्टअप्स के लिए एक अनुकूल वातावरण बनाने की आवश्यकता है। उद्यमियों को न केवल वित्तीय सहायता की आवश्यकता होती है, बल्कि बुनियादी सुविधाओं जैसे-सड़क, बिजली और इंटरनेट कनेक्टिविटी की भी आवश्यकता होती है। अगर सरकार इन समस्याओं का समाधान नहीं करती है, तो बिहार में स्टार्टअप संस्कृति को विकसित करना एक चुनौती बना रहेगा।

अंत में, चंदन राज का अनुभव यह दर्शाता है कि एक सफल स्टार्टअप के लिए केवल अच्छे विचारों की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि एक मजबूत बुनियादी ढाँचा और सही सरकारी समर्थन भी महत्वपूर्ण है। बिहार जैसे राज्यों में, जहाँ उद्यमिता की संभावनाएँ अनंत हैं, वहाँ केवल कुछ सुधारों की आवश्यकता है ताकि युवा उद्यमी अपने सपनों को पूरा कर सकें और अपने प्रदेश को आगे बढ़ा सकें।

बिहार के लिए यह एक महत्वपूर्ण सीख है कि अगर वे अपने उद्यमियों को बढ़ावा देना चाहते हैं, तो उन्हें स्थायी समाधान और समर्थन प्रदान करना होगा। तभी बिहार में स्टार्टअप्स फल-फूल सकते हैं और राज्य को विकास की नई दिशा में ले जा सकते हैं।