नई दिल्ली,15 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारत के विदेश मंत्री एस.जयशंकर आज शाम शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) समिट में शामिल होने के लिए पाकिस्तान पहुँचेंगे । यह यात्रा भारत-पाकिस्तान के संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है, क्योंकि यह पिछले नौ वर्षों में किसी भी भारतीय विदेश मंत्री की पहली यात्रा है। इससे पहले सुषमा स्वराज ने 2015 में इस्लामाबाद का दौरा किया था, जब उन्होंने अफगानिस्तान पर आयोजित एक सम्मेलन में हिस्सा लिया था। इस यात्रा के दौरान,जयशंकर कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर पाएँगे, जो न केवल द्विपक्षीय संबंधों के लिए बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
पाकिस्तान की यह यात्रा एक ऐसे समय में हो रही है,जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव जारी है। पिछले कुछ वर्षों में, दोनों देशों के बीच संबंधों में गिरावट आई है, विशेष रूप से सीमा पार आतंकवाद और कश्मीर मुद्दे को लेकर। हाल ही में, जयशंकर ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि, “किसी भी पड़ोसी देश की तरह, भारत निश्चित रूप से पाकिस्तान के साथ बेहतर संबंध चाहता है,लेकिन यह सीमा पार आतंकवाद को नजरअंदाज करके और इसे समाप्त करने की इच्छा करने से नहीं हो सकता।” यह बयान इस बात को दर्शाता है कि भारत अपनी सुरक्षा संबंधी चिंताओं को प्राथमिकता देता है और रिश्तों में सुधार के लिए पाकिस्तान से ठोस कदम उठाने की उम्मीद करता है।
पाकिस्तान में जयशंकर का दौरा कई राजनीतिक हलचलों का कारण बन गया है। सत्तारूढ़ सरकार के कई मंत्रियों और विपक्षी नेताओं ने इसे अपने राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करने का प्रयास किया है। उदाहरण के लिए, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के सांसद बैरिस्टर मुहम्मद अली सैफ ने जयशंकर को अपने कार्यकर्ताओं से मिलने के लिए आमंत्रित किया है,जो कि इस्लामाबाद में एक विरोध रैली आयोजित कर रहे हैं। इस तरह की घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि पाकिस्तान में इस दौरे को लेकर किस तरह की राजनीतिक गतिविधियाँ चल रही हैं।
शंघाई सहयोग संगठन,जिसकी स्थापना 2001 में चीन और रूस द्वारा की गई थी, एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच है। इसका मुख्यालय बीजिंग में स्थित है और इसमें भारत,पाकिस्तान,कजाकिस्तान,उज्बेकिस्तान,किर्गिस्तान,तजाकिस्तान तथा अन्य सदस्य देश शामिल हैं। एससीओ का उद्देश्य सदस्य राज्यों के मध्य राजनीतिक, आर्थिक,अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा सहयोग को बढ़ावा देना है। संगठन का फोकस व्यापार,अर्थव्यवस्था,विज्ञान,प्रौद्योगिकी,संस्कृति,शिक्षा,ऊर्जा,परिवहन,पर्यावरण संरक्षण आदि जैसे क्षेत्रों में प्रभावी सहयोग को प्रोत्साहित करना है।
जयशंकर की इस यात्रा से यह भी उम्मीद की जा रही है कि वह क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता पर चर्चा कर सकते हैं। आतंकवाद,सीमा विवाद और आपसी व्यापार जैसे मुद्दे इस सम्मेलन में प्रमुख रहेंगे। इसके अलावा,एससीओ के मंच पर भारत और पाकिस्तान के बीच सीधी बातचीत का अवसर भी मिल सकता है,जो दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है।
जयशंकर की इस यात्रा से यह स्पष्ट होता है कि भारत पाकिस्तान के साथ अपने रिश्तों को सुधारने के लिए तत्पर है, लेकिन इसके लिए पाकिस्तान को अपनी नीतियों में बदलाव लाना होगा। सीमा पार आतंकवाद की समस्या को सुलझाए बिना,दोनों देशों के मध्य स्थायी शांति स्थापित करना संभव नहीं है। यह दौरा इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है,जिससे दोनों देशों के बीच विश्वास और संवाद को बढ़ावा मिल सके।
इस प्रकार, एस. जयशंकर का पाकिस्तान दौरा एक ऐतिहासिक अवसर है, जो न केवल भारत-पाकिस्तान के संबंधों को प्रभावित करेगा, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति में भी एक नई दिशा प्रदान कर सकता है।
