श्रीनगर,16 अक्टूबर (युआईटीवी)- जम्मू-कश्मीर में आज एक ऐतिहासिक दिन है, क्योंकि 10 साल के लंबे अंतराल के बाद राज्य में फिर से चुनी हुई सरकार का गठन होने जा रहा है। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला आज मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में किया जा रहा है, जहाँ उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा उन्हें शपथ दिलाएँगे। इस समारोह को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि 50 से अधिक वीवीआईपी मेहमानों को शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया गया है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इस बार जम्मू-कश्मीर चुनाव में 42 सीटें जीती हैं,जबकि कांग्रेस ने सिर्फ 6 सीटों पर जीत दर्ज की है। चुनाव से पहले दोनों पार्टियों ने गठबंधन कर चुनाव लड़ा था,लेकिन चुनाव नतीजों के बाद दोनों के बीच संबंधों में दरार दिखाई दे रही है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस को बाहर से समर्थन देने के विकल्प पर विचार कर रही है,लेकिन इस पर अंतिम फैसला शपथ ग्रहण से पहले ही लिया जा सकता है।
कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि शपथ ग्रहण के दौरान कोई भी कांग्रेस विधायक मंत्री पद की शपथ नहीं लेगा। इसके अलावा,जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के नेताओं को राहुल गांधी से मिलने का समय नहीं मिल सका,लेकिन आज वे राहुल गांधी के साथ बैठक करेंगे,जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।
उमर अब्दुल्ला का शपथ ग्रहण समारोह इंडिया गठबंधन के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। यदि कांग्रेस बाहर से समर्थन देने का फैसला करती है और शपथ ग्रहण में सक्रिय रूप से भाग नहीं लेती, तो यह शक्ति प्रदर्शन केवल औपचारिक रह जाएगा।
इस समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे,राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई प्रमुख विपक्षी नेता मौजूद रहेंगे। शिव सेना (यूबीटी) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे, एनसीपी नेता सुप्रिया सुले,पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी,समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और डीएमके सांसद कनिमोझी भी प्रमुख अतिथियों में शामिल हैं।
अखिलेश यादव ने जम्मू-कश्मीर पहुँचकर उमर अब्दुल्ला को बधाई देते हुए कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि उमर अब्दुल्ला अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाएँगे।
उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर में सरकार का गठन क्षेत्र की राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। हालाँकि, कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच कुछ मतभेद सामने आए हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भविष्य में दोनों पार्टियाँ किस प्रकार से साथ काम करती हैं।
