कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तस्वीर क्रेडिट जस्टिन ट्रूडो इंस्टाग्राम)

निज्जर हत्याकांड पर कनाडाई मीडिया की रिपोर्ट को भारत ने ‘बदनाम करने वाला कैंपेन’ बताया

नई दिल्ली,21 नवंबर (युआईटीवी)- खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर कनाडाई मीडिया में आई खबरों को भारत ने “बदनाम करने वाला अभियान” करार दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इन खबरों को सिरे से खारिज करते हुए इसे भारत और कनाडा के पहले से तनावपूर्ण संबंधों को और बिगाड़ने वाला कदम बताया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि आमतौर पर भारत मीडिया रिपोर्ट्स पर प्रतिक्रिया नहीं देता,लेकिन इस बार कनाडाई सरकारी सूत्रों के हवाले से किए गए दावों को “हास्यास्पद” और “बिना सिर-पैर का” बताते हुए नकार दिया गया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अभियानों का उद्देश्य भारत को बदनाम करना है और यह दोनों देशों के रिश्तों में और तल्खी लाएगा।

यह बयान कनाडा के एक प्रमुख अखबार ग्लोब एंड मेल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के बाद आया है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारतीय अधिकारियों, जिनमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर शामिल हैं, को हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की साजिश की जानकारी थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि निज्जर की हत्या और भारत सरकार के बीच कथित संबंध स्थापित करने का प्रयास किया गया।

भारत और कनाडा के संबंध बीते कुछ महीनों में तेजी से बिगड़े हैं। इसका मुख्य कारण कनाडा में खालिस्तानी उग्रवाद और भारत विरोधी गतिविधियों पर भारत की आपत्ति है। भारत ने बार-बार कनाडाई सरकार से इन गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई करने की माँग की है। इसके बावजूद कनाडा में भारत विरोधी तत्वों की सक्रियता बनी हुई है।

सितंबर 2023 में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने संसद में दावा किया था कि पिछले साल 18 जून को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के पीछे भारत सरकार का हाथ है। भारत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें “बेतुका” और “राजनीतिक लाभ के लिए प्रेरित” बताया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में और खटास आ गई।

जस्टिन ट्रूडो के आरोपों के बाद भारत ने कनाडा में भारतीय उच्चायुक्त संजय वर्मा और अन्य अधिकारियों को वापस बुला लिया। इसके अलावा,भारत ने कनाडा के छह राजनयिकों को भी देश छोड़ने का आदेश दिया। भारत ने कनाडा पर यह आरोप भी लगाया कि उसने खालिस्तानी चरमपंथियों को अपने देश में पनाह दी है और भारत विरोधी गतिविधियों को अनदेखा किया है।

भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि निज्जर एक घोषित आतंकवादी था,जिसे राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने वांछित घोषित किया था। निज्जर भारत में कई हिंसक घटनाओं और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल था।

दूसरी ओर, कनाडा ने भारत के खिलाफ अपने रुख को सख्त बनाए रखा है। कनाडा ने भारत पर दबाव डालने की कोशिश में निज्जर की हत्या की जाँच को लेकर भारतीय राजनयिकों को “पर्सन ऑफ इंटरेस्ट” घोषित कर दिया। इसके बाद भारत ने कनाडा के साथ व्यापार वार्ता और अन्य राजनयिक कार्यक्रमों को भी स्थगित कर दिया।

भारत और कनाडा के बीच चल रहे इस विवाद का असर दोनों देशों के आर्थिक और राजनयिक संबंधों पर पड़ा है। कनाडा में बसे भारतीय मूल के लोगों पर भी इसका असर देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव न केवल द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित करेगा,बल्कि यह क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए भी एक चुनौती बन सकता है।

कुल मिलाकर,भारत ने कनाडा के सभी आरोपों को खारिज करते हुए इस विवाद को कनाडा की आंतरिक राजनीति से प्रेरित बताया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के झूठे अभियानों को महत्व देना दोनों देशों के रिश्तों के लिए नुकसानदेह है।