नई दिल्ली,29 नवंबर (युआईटीवी)- कांग्रेस ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में हार के बाद एक बार फिर से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने चुनावों में गड़बड़ी और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है,लेकिन चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सामने आए तथ्यों और प्रक्रिया ने इन दावों पर अलग ही प्रकाश डाला है।
इंफोइंडाटा नामक अकाउंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा किया है,जिसमें लिखा गया कि, “महाराष्ट्र में कांग्रेस की करारी हार के बाद उसने फिर से भारत की चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। हालाँकि, प्रक्रिया और तथ्य कुछ और ही कहते हैं।” इस पोस्ट के साथ उन्होंने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को दर्शाने वाले इंफोग्राफिक्स भी साझा किए।
इंफोग्राफिक्स में चुनाव प्रक्रिया में ‘चेक्स और बैलेंस’ यानी जाँच और संतुलन के विभिन्न उपायों को विस्तार से समझाया गया है। इन उपायों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव निष्पक्ष और ईमानदार तरीके से हों।
चुनाव प्रक्रिया के दौरान वीवीपैट-ईवीएम (वोटर वेरीफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल-इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) की छह बार जाँच की जाती है। इस प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहते हैं। यह कदम चुनावी पारदर्शिता सुनिश्चित करता है।
ईवीएम मशीनों को रैंडम तरीके से आवंटित किया जाता है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि किसी भी व्यक्ति या दल का मशीनों पर कोई नियंत्रण न हो।
ईवीएम को सील करने के दौरान कम-से-कम पाँच बार उम्मीदवार या उनके प्रतिनिधि मशीन की जाँच और हस्ताक्षर करते हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि मशीनें सुरक्षित और सही तरीके से सील की गई हैं और इनमें किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ संभव नहीं है।
चुनाव आयोग के अधिकारी तीन बार ईवीएम और वीवीपैट यूनिट्स की जाँच करते हैं। इन मशीनों पर आयोग के अधिकारियों के हस्ताक्षर किए जाते हैं। इसके बाद, राजनीतिक दलों के साथ 100 प्रतिशत जाँच की गई ईवीएम की सूची साझा की जाती है।
मतगणना के दौरान वीवीपैट स्लिप्स का मिलान ईवीएम के परिणामों से किया जाता है। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि वोटिंग में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो।
चुनावी प्रक्रिया के इन तकनीकी और प्रशासनिक चरणों के कारण चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी माने जाते हैं। चुनाव आयोग द्वारा अपनाई गई सख्त जाँच प्रणाली और सभी राजनीतिक दलों की भागीदारी यह सुनिश्चित करती है कि चुनाव में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना न्यूनतम हो।
कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों के बावजूद,इन प्रक्रियाओं ने बार-बार यह सिद्ध किया है कि भारतीय चुनाव प्रणाली आधुनिक तकनीक और पारदर्शिता के आधार पर बनी है। हालाँकि,जनता और राजनीतिक दलों को जागरूक करना और चुनाव प्रणाली में विश्वास बनाए रखना आवश्यक है।
