तेहरान,30 नवंबर (युआईटीवी)- ईरान के स्थायी मिशन ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में उन आरोपों को सख्ती से खारिज कर दिया है,जिसमें कहा गया है कि ईरान ने रासायनिक हथियार सम्मेलन का उल्लंघन किया है। ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी इरना के अनुसार, ईरान ने इन आरोपों को “निराधार” करार देते हुए कहा कि यह ज़ायोनी शासन (इज़राइल) द्वारा एक “मनोवैज्ञानिक युद्ध” का हिस्सा है, जो लेबनान में अपनी हालिया हार के बाद फैलाया जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति पर अनुसंधान करने वाले संगठन,इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर ने आरोप लगाया है कि ईरान दवा-आधारित रासायनिक एजेंटों का उत्पादन और वितरण सैन्य उद्देश्यों के लिए कर रहा है। इस आरोप का आधार 26 नवंबर को अमेरिकी विज्ञान और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा संस्थान द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट है,जिसे सिन्हुआ समाचार एजेंसी ने उजागर किया।
इन आरोपों का जवाब देते हुए,ईरानी स्थायी मिशन ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बयान जारी किया। मिशन ने कहा कि ईरान सीडब्ल्यूसी का एक जिम्मेदार हस्ताक्षरकर्ता है और वह रासायनिक हथियारों के विकास,उत्पादन और भंडारण को पूरी तरह प्रतिबंधित करता है। मिशन ने यह भी दावा किया कि पिछले कई दशकों में ईरान द्वारा सीडब्ल्यूसी के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन नहीं किया गया है।
ईरानी मिशन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह ईरान की छवि खराब करने और क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने की कोशिश है। बयान में आरोप लगाया गया कि इज़राइल, जिसे ईरान “ज़ायोनी शासन” कहता है, इस तरह की गलत सूचनाओं के माध्यम से अपना मनोवैज्ञानिक युद्ध चला रहा है।
ईरान का कहना है कि रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल के खिलाफ उसकी नीति हमेशा स्पष्ट और सख्त रही है। सीडब्ल्यूसी के तहत,रासायनिक हथियारों के विकास और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध है और ईरान का दावा है कि वह इस समझौते का पालन पूरी निष्ठा से करता है।
ईरान का यह भी कहना है कि उसके खिलाफ लगाए गए ये आरोप बेबुनियाद हैं और इसका उद्देश्य केवल उसकी अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाना है। उसने इस विषय पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से निष्पक्ष जाँच और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की अपील की।
