सोल,11 दिसंबर (युआईटीवी)- दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक येओल के खिलाफ दक्षिण कोरिया की प्रमुख विपक्षी पार्टी, डेमोक्रेटिक पार्टी बुधवार को एक नया महाभियोग प्रस्ताव पेश करने की योजना बना रही है। यह प्रस्ताव विशेष रूप से राष्ट्रपति द्वारा मार्शल लॉ लागू करने की असफल कोशिश से जुड़ा हुआ होगा। इस प्रस्ताव पर डेमोक्रेटिक पार्टी ने मतदान का बहिष्कार करने का फैसला किया है।
यह कदम तब उठाया गया, जब पिछले शनिवार को राष्ट्रपति यून के खिलाफ पहले महाभियोग प्रस्ताव को कोरम की कमी के कारण रद्द कर दिया गया। इस स्थिति का कारण यह था कि राष्ट्रपति यून के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर मतदान का यून की सत्तारूढ़ पार्टी,पीपुल्स पावर पार्टी, के लगभग सभी सांसदों ने बहिष्कार किया था। इससे सदन में महाभियोग प्रस्ताव को बहुमत नहीं मिल सका और इसे रद्द करना पड़ा।
रद्द होने के बावजूद डेमोक्रेटिक पार्टी ने अपनी रणनीति से पीछे नहीं हटने का निर्णय लिया। पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह हर हफ्ते राष्ट्रपति यून के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाएगी और उन्हें जवाबदेह ठहराने का प्रयास करती रहेगी। पार्टी का यह निर्णय यह संकेत देता है कि वह राष्ट्रपति के खिलाफ राजनीतिक मोर्चा खोलने में कोई कसर नहीं छोड़ने वाली है।
डेमोक्रेटिक पार्टी ने 12 दिसंबर को योजना बनाई है कि वे विधानसभा में दूसरे महाभियोग प्रस्ताव की रिपोर्ट पेश करेंगे और शनिवार को पूर्ण सत्र में इस पर मतदान कराएँगे। कानून के अनुसार,महाभियोग प्रस्ताव को रिपोर्ट किए जाने के 24 से 72 घंटों के भीतर मतदान के लिए रखा जाना चाहिए। इस नए प्रस्ताव में राष्ट्रपति यून पर यह आरोप लगाए जाने की उम्मीद है कि उन्होंने सीधे तौर पर सेना को नेशनल असेंबली को बंद करने और सांसदों को गिरफ्तार करने का आदेश दिया था, जो एक तरह से विद्रोह की श्रेणी में आता है।
डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने इस विषय पर अपनी बात रखने के लिए नेशनल असेंबली के पूर्ण सत्र का आह्वान किया है। वे इस बात की जाँच करने की माँग करेंगे कि मार्शल लॉ की घोषणा करने से पहले प्रधानमंत्री हान डक-सू,वित्त मंत्री चोई सांग-मोक,शिक्षा मंत्री ली जू-हो,न्याय मंत्री पार्क सुंग-जे और विदेश मंत्री चो ताए-यूल जैसे उच्च अधिकारियों की उपस्थिति क्यों जरूरी थी। विपक्षी सांसद इन अधिकारियों से यह सवाल पूछने की योजना बना रहे हैं कि कैबिनेट की बैठक में क्या हुआ था और इस बैठक को किस उद्देश्य से बुलाया गया था।
विपक्षी सांसदों का कहना है कि नेशनल असेंबली में सेना के विशेष युद्ध कमान और कैपिटल डिफेंस कमांड द्वारा की गई तोड़-फोड़ के बारे में उन्हें यह जानने की जरूरत है। इस मुद्दे पर गहराई से जाँच की आवश्यकता है,क्योंकि मार्शल लॉ की घोषणा के दौरान इन अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
दक्षिण कोरिया की राजनीति में यह संकट एक गंभीर मोड़ ले सकता है,क्योंकि राष्ट्रपति यून की सत्ता पर विपक्षी दलों का दबाव बढ़ता जा रहा है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने यह दावा किया है कि राष्ट्रपति यून द्वारा मार्शल लॉ लागू करने की कोशिश एक गंभीर राजनीतिक संकट को जन्म देती है,जो लोकतंत्र और संविधान के लिए खतरे का संकेत है। पार्टी के नेता इसे एक प्रकार के तख्तापलट की कोशिश के रूप में देख रहे हैं और उन्होंने राष्ट्रपति पर आरोप लगाया है कि उन्होंने सेना को संविधान से परे जाकर अत्यधिक शक्तियाँ देने की कोशिश की।
यह विवाद दक्षिण कोरिया की राजनीति में गहरी दरार को दर्शाता है,जहाँ विपक्ष और सत्तारूढ़ पार्टी के बीच संघर्ष तेज हो गया है। डेमोक्रेटिक पार्टी का कहना है कि वह किसी भी कीमत पर राष्ट्रपति यून के खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया को खत्म नहीं होने देगी और उनके खिलाफ लगातार दबाव बनाए रखेगी। इस पर आगामी दिनों में गंभीर राजनीतिक बहस हो सकती है,जिससे दक्षिण कोरिया के राजनीतिक भविष्य पर प्रभाव पड़ सकता है।
इसी बीच,डेमोक्रेटिक पार्टी और राष्ट्रपति यून के बीच बढ़ते इस विवाद ने देश की संसद में नए संघर्ष की शुरुआत कर दी है। विपक्षी पार्टी का कहना है कि वे राष्ट्रपति को जवाबदेह ठहराने के लिए कोई भी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे और यह प्रक्रिया तब तक जारी रहेगी,जब तक राष्ट्रपति यून इस मामले पर पूरी तरह से जवाब नहीं देते।
दक्षिण कोरिया में राजनीतिक संकट और महाभियोग की प्रक्रिया,न केवल देश के राजनीतिक तंत्र के लिए,बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण परीक्षा बन चुकी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है और क्या सत्तारूढ़ पार्टी पीपुल्स पावर पार्टी इस दबाव को झेलने में सक्षम होगी या नहीं।
