वाशिंगटन,डीसी (अमेरिका),12 दिसंबर (युआईटीवी)- चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभालने वाले डोनाल्ड ट्रंप ने 20 जनवरी को होने वाले अपने उद्घाटन समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। यह कदम ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति के दृष्टिकोण को समझने में महत्वपूर्ण हो सकता है,खासकर अमेरिका और चीन के बीच रिश्तों के संदर्भ में। डोनाल्ड ट्रंप के इस आमंत्रण का मतलब केवल दो देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों का विस्तार ही नहीं है,बल्कि यह भी संकेत है कि वह चीन के साथ भविष्य में सहयोग की संभावना को लेकर गंभीर हैं,इसके बावजूद दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर तनाव रहा है।
शी जिनपिंग को उद्घाटन समारोह के लिए आमंत्रण भेजना,अमेरिकी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक अप्रत्याशित कदम था। ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद, अमेरिका और चीन के रिश्ते पर पैनी नजरें बनी हुई हैं,क्योंकि ट्रंप ने चुनावी प्रचार के दौरान चीन के खिलाफ कड़े रुख की बात की थी। उन्होंने चीन पर व्यापारिक अनुशासन की कमी का आरोप लगाया था और यह कहा था कि चीन अमेरिका के व्यापारिक हितों को नुकसान पहुँचा रहा है। इसके बावजूद,ट्रंप का उद्घाटन समारोह में शी जिनपिंग को आमंत्रित करना,एक संकेत है कि वे चीन के साथ अधिक सहयोग और अच्छे रिश्ते बनाने के इच्छुक हैं।
यह कदम एक ऐसे समय पर आया है,जब अमेरिका और चीन के रिश्ते पहले से ही जटिल हो चुके थे। चीन के साथ व्यापार युद्ध,दक्षिण चीन सागर में अंतर्राष्ट्रीय विवाद, और ताइवान के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच मतभेद उभर चुके थे। इसके अलावा, अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी क्षेत्र में भी प्रतिस्पर्धा तेज हो गई थी। ऐसे में, ट्रंप द्वारा शी जिनपिंग को उद्घाटन में बुलाना यह दर्शाता है कि वह व्यक्तिगत कूटनीति में विश्वास रखते हैं और उच्चतम स्तर पर संवाद को बढ़ावा देना चाहते हैं।
ट्रंप के उद्घाटन समारोह के आमंत्रण को लेकर चीन ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी और शी जिनपिंग ने इस निमंत्रण को स्वीकार करने का संकेत दिया था। चीन का यह कदम अमेरिका के साथ संबंधों को सुधारने की दिशा में एक अहम पहल हो सकता है,क्योंकि दोनों देशों के बीच लंबे समय से तनाव जारी था। शी जिनपिंग के इस समारोह में भाग लेने से यह संकेत मिल सकता है कि चीन भी अमेरिकी प्रशासन के साथ एक नई शुरुआत के लिए तैयार है। यह आयोजन,दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय संवाद का एक अवसर बन सकता है,जो आने वाले वर्षों में व्यापार,सुरक्षा और वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग की दिशा में एक नई राह खोल सकता है।
कूटनीतिक दृष्टिकोण से,ट्रंप का यह कदम अमेरिकी-चीनी रिश्तों को एक नए मोड़ पर ले जाने की संभावना को दर्शाता है,जबकि ट्रंप ने कई बार चीन को व्यापारिक अनुशासन और वैश्विक कूटनीति में दबाव डालने के लिए कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया था, इस आमंत्रण के जरिए वह यह संदेश देने का प्रयास कर रहे हैं कि अमेरिकी नेतृत्व चीन के साथ सहयोग और समझौते को भी प्राथमिकता देगा। इस प्रकार,ट्रंप का यह कदम अमेरिका के नए नेतृत्व के लिए एक परिभाषित क्षण हो सकता है, जहाँ वे वैश्विक कूटनीति में चीन के महत्व को समझते हुए,द्विपक्षीय संबंधों में एक नया मोड़ देने की कोशिश करेंगे।
इसके अलावा,इस उद्घाटन समारोह में शी जिनपिंग का शामिल होना न केवल दोनों देशों के रिश्तों के लिए,बल्कि विश्व राजनीति के लिए भी एक महत्वपूर्ण घटना हो सकती है। अमेरिका और चीन,दोनों दुनिया की प्रमुख आर्थिक शक्तियाँ हैं और वैश्विक स्थिरता और शांति के लिए इन दोनों के बीच के अच्छे रिश्ते को अहम माना जाता हैं। इस समारोह के माध्यम से,दोनों देशों के नेता अपने-अपने देशों की प्राथमिकताओं और हितों के बारे में बात कर सकते हैं और एक समझौते पर पहुँचने के लिए कदम उठा सकते हैं। यह समझौता व्यापार,जलवायु परिवर्तन,परमाणु अप्रसार और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर हो सकता है,जो दोनों देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
हालाँकि,ट्रंप का यह कदम चीन के साथ संबंधों को मजबूत करने के संकेत के रूप में देखा जा सकता है,लेकिन यह जरूरी नहीं है कि दोनों देशों के बीच सभी मुद्दों पर सहमति बन जाए। उदाहरण के लिए, व्यापार युद्ध और ताइवान के मुद्दे जैसे विवाद अभी भी दोनों देशों के रिश्तों में खटास पैदा कर सकते हैं। फिर भी,ट्रंप के उद्घाटन समारोह में शी जिनपिंग का आना,इस बात का संकेत है कि दोनों नेता संवाद और सहयोग के माध्यम से अपनी अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए तैयार हैं।
ट्रंप का यह कदम इस बात को भी दर्शाता है कि अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में व्यक्तिगत रिश्तों का एक अहम स्थान है। ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच व्यक्तिगत संबंध अच्छे रहे हैं और यह उद्घाटन समारोह इस दोस्ती को और मजबूत कर सकता है। अंततः ट्रंप का शी जिनपिंग को उद्घाटन में आमंत्रित करना,एक कूटनीतिक और रणनीतिक निर्णय हो सकता है, जो भविष्य में अमेरिकी-चीनी रिश्तों की दिशा निर्धारित करेगा।
