फ्रांस्वा बायरू और इमैनुएल मैक्रों (तस्वीर क्रेडिट@RT_hindi_)

फ्रांस्वा बायरू फ्रांस के नए प्रधानमंत्री बने,राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसकी घोषणा की

पेरिस,14 दिसंबर (युआईटीवी)- फ्रांस्वा बायरू को फ्रांस का नया प्रधानमंत्री के तौर पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने नामित किया है। राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में बताया गया कि बायरू को अब सरकार बनाने का कार्य सौंपा गया है। इसके साथ ही,उन्हें 2025 के बजट को तैयार करने की जिम्मेदारी भी दी गई है,जिसे नेशनल असेंबली द्वारा अनुमोदित किया जाएगा। बायरू को इस नई भूमिका में नियुक्ति से फ्रांसीसी राजनीति में एक नया मोड़ आ सकता है,क्योंकि उन्होंने देश के राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

बायरू,जो कि मैक्रों के मध्यमार्गी सहयोगी हैं,मिशेल बार्नियर की जगह प्रधानमंत्री पद पर नियुक्त हुए हैं। मिशेल बार्नियर को 4 दिसंबर को फ्रांसीसी नेशनल असेंबली द्वारा अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से पद से हटा दिया गया था। यह कदम फ्रांसीसी राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम था क्योंकि यह 1962 के बाद से अविश्वास प्रस्ताव के कारण गिरने वाली पहली सरकार थी।

फ्रांस्वा बायरू का जन्म 1952 में हुआ था और उन्होंने 2007 में मध्यमार्गी पार्टी डेमोक्रेटिक मूवमेंट (मोडेम) की स्थापना की थी। वे तीन बार राष्ट्रपति चुनावों में हिस्सा ले चुके हैं, जिनमें 2002, 2007 और 2012 के चुनाव शामिल हैं। उनके नेतृत्व में मोडेम पार्टी ने केंद्रित राजनीति के जरिए फ्रांसीसी राजनीतिक परिदृश्य में अपनी पहचान बनाई है। बायरू का राजनीतिक दृष्टिकोण सामाजिक उदारवाद और आर्थिक स्थिरता पर आधारित है और उन्होंने हमेशा एक ऐसे फ्रांस की कल्पना की है,जिसमें सभी राजनीतिक विचारों को सम्मान दिया जाए।

बायरू के नाम की घोषणा के बाद,फ्रांस की दक्षिणपंथी पार्टी,नेशनल रैली (आरएन) के अध्यक्ष जॉर्डन बार्डेला ने बीएफएमटीवी से बातचीत करते हुए कहा कि उनकी पार्टी बायरू की तुरंत आलोचना नहीं करेगी। हालाँकि,उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि बायरू को यह समझना चाहिए कि उनके पास न तो लोकतांत्रिक वैधता है और न ही नेशनल असेंबली में बहुमत है,इसलिए उन्हें संसद में प्रतिनिधित्व करने वाली सभी ताकतों के साथ बातचीत करने की आवश्यकता होगी। उनका यह बयान दर्शाता है कि बायरू को सत्ता में आते हुए विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ तालमेल बैठाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

इस बीच,कट्टर वामपंथी पार्टी ला फ्रांस इनसोमिस (एलएफआई) ने घोषणा की है कि वह बायरू को गिराने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाएगी। एलएफआई ने बार-बार यह कहा है कि प्रधानमंत्री का पद वामपंथी दलों के गठबंधन में से किसी को दिया जाना चाहिए,जिन्होंने इस वर्ष हुए विधानसभा चुनावों में सबसे अधिक सीटें जीती हैं। इस मुद्दे को लेकर वामपंथी दलों और बायरू के बीच तनाव और बढ़ सकता है,क्योंकि दोनों पक्ष अपनी-अपनी दावेदारी को लेकर मजबूती से खड़े हैं।

फ्रांस्वा बायरू ने शुक्रवार को प्रेस से बातचीत करते हुए सुलह की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, इस कार्य की कठिनाई को हर कोई समझता है…ऐसे रास्ते की खोज की जानी चाहिए,जो लोगों को विभाजित करने के बजाय उन्हें एकजुट करे। उनका यह बयान यह दर्शाता है कि बायरू अपने प्रधानमंत्री पद को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न राजनीतिक दृष्टिकोणों के बीच संतुलन बनाए रखने के पक्षधर हैं। उन्हें यह समझना होगा कि फ्रांस की राजनीति में विभिन्न विचारधाराओं के बीच सामंजस्य बैठाना आसान नहीं होगा और इसके लिए उन्हें सूझबूझ और समझदारी से काम करना होगा।

मिशेल बार्नियर,जो कि अब तक के प्रधानमंत्री थे,ने बायरू के नाम की घोषणा के बाद उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर बधाई दी। बार्नियर ने अपने पोस्ट में कहा, “फ्रांस और यूरोप के लिए इस गंभीर समय में,सरकार के प्रमुख के रूप में उन्हें मेरी सभी व्यक्तिगत और मैत्रीपूर्ण शुभकामनाएँ।” बार्नियर का यह संदेश उनके समर्पण और बायरू के प्रति आदर को दर्शाता है,साथ ही यह फ्रांस की राजनीति में अगले चरण की ओर इशारा करता है।

4 दिसंबर को जब नेशनल असेंबली ने मिशेल बार्नियर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया,तो यह फ्रांसीसी राजनीति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना साबित हुई। बार्नियर को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया और इस कदम ने उनकी सरकार को गिरा दिया। यह घटना यह दिखाती है कि फ्रांस की राजनीति में स्थिरता के लिए गठबंधन और संवाद की आवश्यकता है,क्योंकि बिना मजबूत समर्थन के कोई भी सरकार सफल नहीं हो सकती।

इस प्रकार,फ्रांस्वा बायरू की नियुक्ति को लेकर फ्रांसीसी राजनीति में कई तरह की प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। उनका कार्यकाल और प्रधानमंत्री बनने के बाद के कदम फ्रांस की राजनीतिक दिशा को प्रभावित करेंगे। उन्हें कई राजनीतिक दलों और विचारधाराओं के बीच सामंजस्य स्थापित करना होगा,ताकि वे देश को एकजुट कर सकें और उसकी राजनीतिक स्थिरता को सुनिश्चित कर सकें।