नई दिल्ली,14 दिसंबर (युआईटीवी)- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और देश के प्रख्यात राजनेताओं में एक अहम नाम,लालकृष्ण आडवाणी (97) की अचानक तबीयत फिर से बिगड़ गई है। उन्हें हाल ही में इलाज के लिए दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक,आडवाणी जी पिछले कुछ दिनों से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और उनकी हालत में तेजी से गिरावट आई है। उनका स्वास्थ्य पहले से ही कुछ समय से ठीक नहीं चल रहा था और यह अस्पताल में उनकी चौथी भर्ती है,जो पिछले पाँच महीनों में हुई है। इससे पहले,उन्हें अगस्त में भी अस्पताल में भर्ती किया गया था, और उस समय भी उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंताएँ जताई गई थीं।
आडवाणी जी की तबीयत में अचानक गिरावट का समाचार सामने आते ही उनके समर्थक और देशभर में उनके शुभचिंतक परेशान हो गए हैं। उनके स्वास्थ्य के बारे में कोई भी जानकारी जब सामने आती है,तो यह भारतीय राजनीति और समाज में एक बड़ा मुद्दा बन जाता है,क्योंकि आडवाणी जी का राजनीतिक जीवन और योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। भारतीय राजनीति में उनकी भूमिका ने भाजपा को एक नया दिशा दी और उनकी नेतृत्व क्षमता के कारण उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।
इस साल के शुरुआत में,उन्हें भारत सरकार की ओर से देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारत रत्न” से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान उन्हें भारतीय राजनीति और समाज में उनके योगदान के लिए दिया गया और यह उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण क्षण था। हालाँकि,स्वास्थ्य कारणों से वह राष्ट्रपति भवन के उस विशेष आयोजन में शामिल नहीं हो सके थे,जहाँ उन्हें यह सम्मान दिया जाना था। इसके बजाय,उन्हें उनका सम्मान उनके निवास पर ही दिया गया था। यह घटना भी बताती है कि आडवाणी जी की स्वास्थ्य समस्याएँ कितनी गंभीर हो गई थीं,लेकिन इसके बावजूद उनके सम्मान में कोई कमी नहीं आई।
उनकी तबीयत के बिगड़ने के बाद,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर को अपने जन्मदिन पर आडवाणी जी को बधाई देने के लिए उनके निवास पर पहुँचकर उन्हें शुभकामनाएँ दीं।सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पीएम मोदी ने इस मुलाकात की एक तस्वीर भी साझा की थी,जिसमें वे आडवाणी जी को गुलदस्ता भेंट करते हुए दिखाई दे रहे थे। इस तस्वीर में आडवाणी जी को उनके घर पर देखा जा सकता था, जहाँ पीएम मोदी ने उन्हें उनके जन्मदिन की बधाई दी और उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “आडवाणी जी के निवास पर जाकर उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएँ दी।” इसके अलावा,उन्होंने एक और पोस्ट में आडवाणी जी की महानता और उनके योगदान को स्वीकार करते हुए लिखा, “लालकृष्ण आडवाणी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ। इस साल का यह जन्मदिन और भी खास है क्योंकि उन्हें देश की सेवा के लिए ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया है। वह हमारे देश के सबसे सम्मानित नेताओं में से एक हैं,जिन्होंने अपना जीवन भारत के विकास के लिए समर्पित किया है। उनकी समझ और ज्ञान को हमेशा आदर मिला है। मुझे कई वर्षों तक उनका मार्गदर्शन पाने का सौभाग्य मिला है। मैं उनके स्वस्थ और लंबी आयु की कामना करता हूँ।”
आडवाणी जी का जीवन भारतीय राजनीति में एक मील का पत्थर रहा है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की नींव रखी और पार्टी को देशभर में एक प्रमुख राजनीतिक ताकत बनाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी रणनीतियों और नेतृत्व के कारण भाजपा ने 1990 के दशक में भारतीय राजनीति में अपनी पहचान बनाई और आडवाणी जी पार्टी के सबसे बड़े नेताओं में से एक बन गए। उनकी राजनीति में सतत मार्गदर्शन और दृष्टिकोण ने भाजपा को न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी सफलता दिलाई।
लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 1927 में हुआ था और उनका पूरा जीवन भारतीय राजनीति के अहम पहलुओं से जुड़ा हुआ है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से अपनी राजनीति की शुरुआत की थी और बाद में भाजपा में शामिल हुए, जहाँ उन्होंने संगठन के निर्माण और पार्टी के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने भारतीय राजनीति में हिंदुत्व के विचार को आगे बढ़ाया और हमेशा देश के विकास और समाज की भलाई के लिए काम किया। उनकी नीतियाँ और विचार आज भी भारतीय राजनीति में गहरे प्रभाव डालते हैं।
इस समय आडवाणी जी के स्वास्थ्य को लेकर देशभर में चिंता का माहौल है और उनके समर्थक,पार्टी के सदस्य और जनता उनके जल्द ठीक होने की कामना कर रहे हैं। उनकी स्थिति भारतीय राजनीति के लिए एक बड़ा आघात हो सकती है, क्योंकि उनकी विद्वता,अनुभव और नेतृत्व की कमी पार्टी और देश के लिए एक बहुत बड़ा नुकसान होगा। इसके बावजूद,उनके जीवन और योगदान को लेकर श्रद्धा और सम्मान का माहौल हमेशा बना रहेगा।
लालकृष्ण आडवाणी भारतीय राजनीति के एक अमूल्य रत्न हैं और उनकी सेहत को लेकर सभी की उम्मीदें जुड़ी हैं कि वह जल्द स्वस्थ हो जाएँ और देश की सेवा में अपने अनुभव का लाभ दे सकें। उनके स्वास्थ्य की यह स्थिति भारतीय राजनीति में एक खालीपन का कारण बन सकती है,जिसे भरना कठिन होगा।