दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल (तस्वीर क्रेडिट@gauravkrdwivedi)

दक्षिण कोरिया की भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी ने पुलिस से राष्ट्रपति यून सुक-योल को हिरासत में लेने के लिए वारंट लागू करने का किया अनुरोध

सियोल,6 जनवरी (युआईटीवी)- दक्षिण कोरिया की भ्रष्टाचार रोधी एजेंसी,जिसे भ्रष्टाचार जाँच कार्यालय (सीआईओ) कहा जाता है,ने पुलिस से अनुरोध किया है कि वे महाभियोग का सामना कर रहे राष्ट्रपति यून सुक-योल को हिरासत में लेने के लिए एक वारंट लागू करें। यह मामला राष्ट्रपति द्वारा मार्शल लॉ लागू करने की असफल कोशिश से संबंधित है। यह जानकारी सोमवार को सामने आई,जब योनहाप समाचार एजेंसी ने बताया कि सीआईओ ने रविवार की रात,जब वारंट की अवधि समाप्त होने में एक दिन बचा था,एक आधिकारिक पत्र भेजा।

सीआईओ का यह कदम एक गंभीर घटना को दर्शाता है,जिसमें राष्ट्रपति यून सुक-योल के खिलाफ जाँच की जा रही है। इस पत्र में सीआईओ ने पुलिस से तत्काल सहयोग की माँग की है और यह सूचना भी दी गई है कि वह आंतरिक रूप से कानूनी समीक्षा कर रहे हैं। एक पुलिस अधिकारी ने योनहाप समाचार एजेंसी को बताया कि सीआईओ ने बिना किसी पूर्व परामर्श के उनके सहयोग का अनुरोध किया है और पुलिस इस मामले की गहराई से जाँच कर रही है।

यह मामला पिछले शुक्रवार से सुर्खियों में है,जब सीआईओ ने राष्ट्रपति आवास पर घंटों तक चले गतिरोध के बाद वारंट को लागू करने की कार्रवाई रोक दी थी। सीआईओ और पुलिस ने मिलकर यह जाँच शुरू की थी कि राष्ट्रपति यून ने 3 दिसंबर को मार्शल लॉ लागू करने का प्रयास किया था,जो कि संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के खिलाफ था। इस मामले में रक्षा मंत्रालय और पुलिस की जाँच इकाई भी शामिल है,जो इस प्रयास की जाँच कर रही है।

अब तक के घटनाक्रम में,सीआईओ के पास दो विकल्प मौजूद थे – या तो वे राष्ट्रपति यून को पुनः हिरासत में लेने की कोशिश करें या वारंट की अवधि बढ़ाने के लिए एक नया अनुरोध करें। हालाँकि,सीआईओ द्वारा भेजे गए पत्र ने पुलिस के भीतर असंतोष पैदा किया है। सूत्रों का कहना है कि यह शिकायत बढ़ रही है कि सीआईओ अब अपनी जिम्मेदारियों को पुलिस के ऊपर डालने की कोशिश कर रहा है,जबकि पिछली बार उन्होंने वारंट को निष्क्रिय रूप से निष्पादित किया था।

राष्ट्रपति यून की कानूनी टीम ने इस वारंट को पूरी तरह से अवैध और अमान्य बताया है। उनका कहना है कि सीआईओ तकनीकी रूप से उन विद्रोह के आरोपों की जाँच करने के लिए अधिकृत नहीं है,जिनका सामना राष्ट्रपति यून अपने मार्शल लॉ आदेश के कारण कर रहे हैं। यून के वकील यह भी दावा करते हैं कि सीआईओ को राष्ट्रपति के खिलाफ इस तरह के संवेदनशील मामले की जाँच करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि यह संविधान और कानूनी प्रक्रियाओं के विपरीत है।

इससे पूर्व,राष्ट्रपति यून द्वारा दायर निषेधाज्ञा को सियोल की एक अदालत ने 3 दिसंबर को खारिज कर दिया था,जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति आवास की तलाशी लेने और हिरासत में लेने के लिए जारी किए गए वारंट को अमान्य करने की माँग की थी।सियोल पश्चिमी जिला न्यायालय ने यह निर्णय लिया था कि वारंट को निष्क्रिय करने का कोई कानूनी आधार नहीं है। इस पर यून के वकील ने कहा था, “हम सुप्रीम कोर्ट में अपील करने पर विचार करेंगे।”

इससे पहले,अदालत ने 3 दिसंबर को ही असफल मार्शल लॉ प्रयास के संबंध में राष्ट्रपति यून के खिलाफ वारंट जारी किया था,जिसमें उन्हें हिरासत में लेने और राष्ट्रपति आवास की तलाशी लेने का आदेश था। यह आदेश इस कारण से महत्वपूर्ण है कि यह राष्ट्रपति की शक्तियों का दुरुपयोग करने की संभावना पर सवाल उठाता है।

मार्शल लॉ लागू करने का प्रयास संविधान के खिलाफ है,क्योंकि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था और नागरिक अधिकारों को हानि पहुँचा सकता है। ऐसे में राष्ट्रपति यून की कार्रवाई को लेकर देशभर में चर्चा हो रही है। इस मामले में राष्ट्रपति यून का बचाव करने वाले वकील दावा कर रहे हैं कि यह कदम कानून के भीतर था और उनका यह प्रयास किसी गलत उद्देश्य से नहीं था।

वहीं दूसरी ओर,सीआईओ और अन्य जाँच एजेंसियों का कहना है कि राष्ट्रपति यून ने संवैधानिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया और यदि उन्हें गिरफ्तार किया जाता है,तो यह एक ऐतिहासिक कदम होगा,जो दक्षिण कोरिया के लोकतंत्र के भविष्य को प्रभावित करेगा।

यह मामला दक्षिण कोरिया की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है,जहाँ एक ओर राष्ट्रपति यून का बचाव किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार और संविधान के उल्लंघन के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल राष्ट्रपति के लिए,बल्कि दक्षिण कोरिया के लिए भी संवेदनशील साबित हो सकती है,क्योंकि यह देश की कानूनी और राजनीतिक प्रणालियों को प्रभावित कर सकता है।

इस पूरे मामले में अब अदालत के फैसले,सरकार के पक्ष और विपक्ष के बीच की बहस और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के पालन को लेकर चर्चा महत्वपूर्ण होगी।