नई दिल्ली,30 जनवरी (युआईटीवी)- भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को यमुना नदी के पानी में जहर मिलाने के आरोपों को साबित करने का अवसर दिया है। आयोग ने केजरीवाल से इन आरोपों का स्पष्ट स्पष्टीकरण माँगते हुए उन्हें विशेष रूप से यह बताने के लिए कहा है कि यमुना नदी के पानी में कौन सा पदार्थ,कितनी मात्रा में और किस प्रकार से मिलाया गया था। साथ ही आयोग ने यह भी पूछा है कि दिल्ली जल बोर्ड के इंजीनियरों ने इस जहरीले पानी की पहचान कैसे की और उनका इसमें क्या योगदान था।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब अरविंद केजरीवाल ने यमुना नदी के पानी में अमोनिया के स्तर को जानबूझकर बढ़ाने का आरोप लगाया था,जिससे पानी को जहरीला बनाने की साजिश की जा रही थी। उन्होंने यह भी दावा किया था कि इस बढ़े हुए अमोनिया स्तर से दिल्ली में एक प्रकार का जल आतंकवाद फैलने का खतरा था और इससे दिल्लीवासियों के लिए पीने योग्य पानी उपलब्ध कराना असंभव हो जाएगा। केजरीवाल ने इसे एक सुनियोजित साजिश बताया और आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार ने जानबूझकर यमुना नदी में जहर मिलाया था। उनके अनुसार, यह घटना दिल्ली में एक प्रकार के नरसंहार की साजिश के रूप में सामने आ सकती थी।
भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने इस मामले में गंभीरता से प्रतिक्रिया दी और केजरीवाल से 29 जनवरी 2025 तक अपने आरोपों के बारे में तथ्य और कानूनी समर्थन देने का समय दिया। हालाँकि,केजरीवाल के द्वारा दिया गया जवाब आयोग की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं था। उनके जवाब में कोई स्पष्टता नहीं थी और वे इस आरोप के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण या तथ्य पेश नहीं कर सके। इसके बाद,चुनाव आयोग ने उन्हें एक और पत्र भेजा,जिसमें आरोपों के स्पष्टीकरण की माँग की गई और यह स्पष्ट किया गया कि उनके बयान से समाज में अशांति और समुदायों के बीच विवाद उत्पन्न हो सकता है,जो कि किसी भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए हानिकारक हो सकता है।
आयोग ने विशेष रूप से यह भी अनुरोध किया कि केजरीवाल अमोनिया संदूषण और जहर मिलाने के आरोपों के बीच अंतर को स्पष्ट करें। आयोग ने कहा कि इन दोनों आरोपों को एक साथ जोड़ने से गलतफहमियाँ पैदा हो सकती हैं। आयोग ने केजरीवाल को यह याद दिलाया कि भड़काऊ बयान देने से सार्वजनिक अशांति और सामाजिक विवाद हो सकता है,जिससे चुनावी प्रक्रिया और जनसंपर्क में खलबली मच सकती है।
आयोग के पत्र में यह भी कहा गया कि पानी की उपलब्धता और स्वच्छता शासन का महत्वपूर्ण हिस्सा है और सभी सरकारें सुरक्षित और पीने योग्य पानी उपलब्ध कराने के लिए जिम्मेदार हैं। इसके अलावा,आयोग ने यह स्पष्ट किया कि यमुना नदी में अमोनिया की मात्रा को लेकर उत्पन्न विवाद और हरियाणा सरकार द्वारा इस पर किए गए आरोपों को अलग से निपटाया जा रहा है,क्योंकि यह एक लंबा चलने वाला और कानूनी मामला है। आयोग ने यह भी कहा कि वे इस मुद्दे में हस्तक्षेप नहीं करेंगे, बल्कि इसे संबंधित एजेंसियों और सरकारों की जिम्मेदारी पर छोड़ देंगे।
ईसीआई के पत्र में यह स्पष्ट किया गया कि केजरीवाल ने जो बयान दिया था,वह खतरनाक था और इससे विभिन्न समुदायों के बीच विवाद और दुश्मनी का कारण बन सकता था। चुनाव आयोग ने केजरीवाल से यह भी पूछा कि उन्होंने हरियाणा सरकार पर आरोप क्यों लगाया कि उसने जानबूझकर यमुना नदी में जहर घोला था और इस आरोप के समर्थन में क्या ठोस प्रमाण थे। आयोग ने यह भी पूछा कि दिल्ली जल बोर्ड के इंजीनियरों ने इस जहरीले पानी को कैसे पहचाना और उन्होंने इस समस्या का समाधान करने के लिए क्या कदम उठाए।
चुनाव आयोग ने केजरीवाल से यह भी स्पष्टीकरण माँगा कि उन्होंने यमुना नदी में जहर घोलने को “युद्ध जैसा कृत्य” और “दिल्ली में नरसंहार की साजिश” क्यों बताया। इसके अलावा,आयोग ने यह सवाल उठाया कि केजरीवाल के बयान से दिल्ली और हरियाणा के नागरिकों के बीच किसी प्रकार की शत्रुता या दबाव का कारण बन सकता है,जो भविष्य में समाज के लिए हानिकारक हो सकता है। आयोग ने केजरीवाल को याद दिलाया कि उनके पद और जिम्मेदारी के मद्देनजर उन्हें ऐसे भड़काऊ बयान देने से बचना चाहिए,जो किसी राज्य या समुदाय के बीच घृणा और विवाद को बढ़ावा दे सकते हैं।
आयोग ने यह भी माना कि यमुना नदी में अमोनिया का स्तर बढ़ने से जल प्रदूषण हो सकता है,लेकिन इसे जहर मिलाने का आरोप लगाना एक गंभीर आरोप है और इसके लिए ठोस प्रमाण और तथ्यों की आवश्यकता है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह मामला अलग से हरियाणा सरकार के साथ हल किया जाएगा और इस पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। साथ ही,चुनाव आयोग ने केजरीवाल से यह भी अनुरोध किया कि वे जल प्रदूषण और अमोनिया संदूषण के बीच अंतर को स्पष्ट करें और इसे किसी साजिश या जहर मिलाने के रूप में पेश करने से बचें।
आखिरकार,आयोग ने यह समझाया कि स्वच्छ और सुरक्षित पानी की उपलब्धता एक सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है और यह सुनिश्चित करना कि हर नागरिक को पीने योग्य पानी मिले,सभी सरकारों का दायित्व है। इसके बावजूद,चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि यह समस्या किसी प्रकार की चुनावी रणनीति का हिस्सा नहीं होनी चाहिए और इस मुद्दे पर सभी संबंधित सरकारों और एजेंसियों को कार्य करने दिया जाना चाहिए।
चुनाव आयोग ने अरविंद केजरीवाल से यह भी कहा कि भविष्य में वे इस प्रकार के विवादास्पद बयानों से बचें,क्योंकि इससे न केवल राजनीतिक माहौल में अशांति फैल सकती है,बल्कि नागरिकों के बीच असहमति और विभाजन भी उत्पन्न हो सकता है। आयोग ने यह भी चेतावनी दी कि ऐसे बयान चुनावी प्रक्रिया और लोकतंत्र के मूल्यों के लिए खतरे का कारण बन सकते हैं।
