नई दिल्ली,31 जनवरी (युआईटीवी)- केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण शुक्रवार, 31 जनवरी 2025 को दोपहर 12 बजे संसद में देश का आर्थिक सर्वेक्षण पेश करेंगी। इस आर्थिक सर्वेक्षण को केंद्रीय बजट 2025-26 के पेश होने से पहले संसद में प्रस्तुत किया जा रहा है,ताकि सरकार की आर्थिक स्थिति और आगामी बजट की रूपरेखा पर एक स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत किया जा सके।
आर्थिक सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति की समीक्षा करना और आगामी वित्तीय वर्ष के लिए संभावनाओं का विश्लेषण करना है। यह दस्तावेज़ आर्थिक मामलों के विभाग के आर्थिक प्रभाग द्वारा तैयार किया गया है और इसका नेतृत्व मुख्य आर्थिक सलाहकार वी.अनंत नागेश्वरन ने किया है। इसमें वित्त मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए आँकड़े,रिपोर्ट और अन्य डेटा का संकलन किया गया है,जो देश की आर्थिक विकास दर,महँगाई,रोजगार,उत्पादन और विभिन्न क्षेत्रों के प्रदर्शन का आकलन करते हैं। इस दस्तावेज़ के माध्यम से यह बताया जाएगा कि देश की अर्थव्यवस्था किस दिशा में बढ़ रही है और अगले वित्तीय वर्ष के लिए कौन सी नीतियाँ या उपाय सुझाए गए हैं।
आर्थिक सर्वेक्षण के अलावा,इसमें केंद्रीय बजट के बारे में भी कई संकेत दिए गए हैं, जिनसे अनुमान लगाया जा सकता है कि आगामी बजट में किस दिशा में कदम उठाए जाएँगे। उदाहरण के तौर पर,सरकार की प्राथमिकताएँ, योजनाएँ और दीर्घकालिक विकास की रणनीतियाँ इस सर्वेक्षण में शामिल हो सकती हैं। यह दस्तावेज़ सरकार को आगामी बजट तैयार करते समय मार्गदर्शन प्रदान करने में सहायक होता है।
सर्वेक्षण को लोकसभा में दोपहर 12 बजे और राज्यसभा में 2 बजे पेश किया जाएगा। इससे बजट सत्र की शुरुआत होगी,जो 31 जनवरी से शुरू होकर 4 अप्रैल तक चलेगा। सत्र के दौरान 14 फरवरी से 10 मार्च तक अंतर सत्रीय अवकाश होगा,जब संसद का कार्य रुक जाएगा और फिर दूसरा चरण 10 मार्च से शुरू होगा।
आर्थिक सर्वेक्षण का विषय बहुत महत्वपूर्ण होता है,क्योंकि यह न केवल वर्तमान आर्थिक स्थिति का अवलोकन करता है,बल्कि सरकार की नीतियों और योजनाओं को भी दिशा प्रदान करता है। यह बजट की दिशा को निर्धारित करने में मदद करता है और वित्तीय निर्णयों को आकार देता है। उदाहरण के लिए,यदि आर्थिक सर्वेक्षण में किसी खास क्षेत्र के विकास पर जोर दिया गया है,तो वह क्षेत्र केंद्रीय बजट में विशेष ध्यान पा सकता है। इस प्रकार,यह सर्वेक्षण देश की आर्थिक स्वास्थ्य का ब्योरा देने के साथ-साथ भविष्य के लिए रणनीतियाँ भी प्रस्तुत करता है।
बजट पेश होने से पहले,परंपरागत रूप से प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक होती है। इस बैठक में मंत्रियों को बजट की प्रमुख योजनाओं और प्रस्तावों के बारे में जानकारी दी जाती है और कैबिनेट की मंजूरी प्राप्त की जाती है। यह बैठक बजट से संबंधित अंतिम विचारों और निर्णयों को अंतिम रूप देने का अवसर प्रदान करती है।
इस बार के केंद्रीय बजट के प्रस्तुत होने से पहले,राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संसद की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगी। राष्ट्रपति का अभिभाषण सरकार की प्रमुख नीतियों और योजनाओं का खाका प्रस्तुत करता है और इसे बजट सत्र की शुरुआत के रूप में देखा जाता है। इसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा और राज्यसभा में अलग-अलग आर्थिक सर्वेक्षण पेश करेंगी।
यह विशेष उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री सीतारमण इस बार लगातार आठवीं बार केंद्रीय बजट पेश करेंगी। इससे पहले,उन्होंने 2019 में अपनी पहली बार बजट पेश किया था और तब से वह हर साल बजट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी निभा रही हैं। वित्त मंत्री की यह निरंतरता और अनुभव उन्हें देश की आर्थिक दिशा को समझने और योजनाबद्ध तरीके से बजट तैयार करने में मदद करती है।
इस बार का बजट सत्र खास तौर पर महत्वपूर्ण है,क्योंकि यह चुनावी वर्ष से पहले पेश हो रहा है। आगामी चुनावों से पहले यह बजट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रदान करेगा। आर्थिक सर्वेक्षण में सरकार द्वारा किए गए पिछले कार्यों का मूल्यांकन किया जाएगा और यह देखा जाएगा कि आगामी बजट में कौन से क्षेत्र प्राथमिकता प्राप्त करेंगे। इस बजट के माध्यम से यह भी तय होगा कि आगामी वर्षों में देश की आर्थिक विकास दर क्या होगी और किस प्रकार के वित्तीय उपायों को लागू किया जाएगा।
बजट सत्र की शुरुआत में आर्थिक सर्वेक्षण के पेश होने के बाद,सरकार विभिन्न क्षेत्रों पर चर्चा करने के लिए संसद में उपयुक्त समय निर्धारित करेगी। इसके बाद, 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा,जो आने वाले वर्ष के लिए सरकार की वित्तीय योजनाओं को स्पष्ट करेगा। बजट के दौरान सरकार द्वारा किए जाने वाले प्रस्तावों और उपायों से यह साफ होगा कि सरकार का ध्यान किस परिप्रेक्ष्य में है और देश की आर्थिक स्थिति को किस दिशा में बढ़ाना चाहती है।
इस बार का केंद्रीय बजट 2025-26 देश की आर्थिक दृष्टिकोण के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा,क्योंकि यह चुनावी वर्ष से पहले पेश हो रहा है और इस पर विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक दृष्टिकोण से गहरी नजरें होंगी।