देहरादून,1 मार्च (युआईटीवी)- उत्तराखंड में हाल ही में हुए हिमस्खलन के कारण सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के 52 श्रमिक फँस गए हैं और इस स्थिति को देखते हुए राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार शाम आपदा नियंत्रण कक्ष का दौरा किया। उन्होंने घटनास्थल पर मौजूद अधिकारियों से स्थिति का जायजा लिया और बचाव कार्य को तेजी से करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री धामी लगातार राहत और बचाव कार्यों पर नजर बनाए हुए हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि सभी प्रभावित श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जाए और हर संभव मदद दी जाए।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य की सभी एजेंसियाँ युद्धस्तर पर काम कर रही हैं, ताकि फँसे हुए मजदूरों को शीघ्र ही सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। उन्होंने एनडीआरएफ,एसडीआरएफ,आईटीबीपी और सेना से भी अपील की कि बर्फ को तेजी से हटाने का काम किया जाए,ताकि बचाव कार्य में कोई रुकावट न आए। इसके अलावा,उन्होंने जोशीमठ में एक अस्थायी नियंत्रण कक्ष स्थापित करने की घोषणा की, जिससे बचाव कार्यों की बेहतर निगरानी की जा सके। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ),गृह मंत्रालय (एचएमओ) और रक्षा मंत्रालय (आरएमओ) लगातार स्थिति की जानकारी ले रहे हैं और आपातकालीन मदद के लिए सभी एजेंसियों से संपर्क बनाए हुए हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने यह भी बताया कि भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर तैयार हैं और जैसे ही मौसम साफ होगा,उन्हें बचाव कार्यों में तैनात किया जाएगा। इसके अलावा, सड़क के रास्ते भी कुछ बचाव दल भेजे गए हैं,ताकि जमीनी स्तर पर भी कार्य तेजी से किया जा सके। साथ ही,सरकार ने उन श्रमिकों के परिवारों के लिए एक हेल्पलाइन शुरू की है,जो विभिन्न राज्यों से आए हैं,ताकि उनकी मदद की जा सके और उनकी चिंता को कम किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने रिपोर्टर्स से बातचीत में कहा, “हम बस यही प्रार्थना कर रहे हैं कि सभी लोग सुरक्षित बाहर आ जाएँ।” उनकी यह बात भावनात्मक रूप से इस कठिन समय में राहत और बचाव कार्यों की महत्ता को दर्शाती है। उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने भी मीडिया से बातचीत में बताया कि अब तक 33 मजदूरों को बचा लिया गया है,जबकि 22 मजदूर अभी भी लापता हैं। हालाँकि,खराब मौसम की वजह से बचाव कार्य में अनेक समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं और यह राहत कार्य को और चुनौतीपूर्ण बना रहा है।
प्रारंभ में खबर आई थी कि हिमस्खलन के कारण 57 मजदूर फँस गए थे,लेकिन बाद में यह साफ हुआ कि इनमें से दो मजदूर छुट्टी पर थे और वे घटना के समय स्थल पर मौजूद नहीं थे। इस प्रकार,कुल 55 मजदूर हिमस्खलन की चपेट में आए थे,जिनमें से अब तक 33 को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है और बाकी 22 की तलाश जारी है। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीआरएफ) के अनुसार, ये फँसे हुए श्रमिक बिहार,उत्तर प्रदेश,उत्तराखंड,हिमाचल प्रदेश,पंजाब और जम्मू-कश्मीर के निवासी हैं। हालाँकि,10 मजदूरों के गृह राज्य की जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है।
विनोद कुमार सुमन ने बताया कि हिमस्खलन वाली जगह पर करीब सात फीट तक बर्फ जमा हो गई है,जिससे बचाव कार्य करना और भी कठिन हो गया है। बर्फ की मोटी परतों ने घटनास्थल तक पहुँचने में भी रुकावट डाली है। इसके बावजूद, 65 से ज्यादा जवान इस बचाव अभियान में जुटे हुए हैं और बर्फ को हटाने की कोशिश कर रहे हैं,ताकि श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
बर्फबारी के कारण सड़क मार्ग भी बंद हैं और मौसम के कारण हवाई मार्ग से भी बचाव कार्य में कुछ बाधाएँ आ रही हैं। फिर भी,सरकार और विभिन्न बचाव एजेंसियाँ किसी भी तरह की मदद देने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं और युद्धस्तर पर कार्य कर रही हैं।
इस घटना के बाद,उत्तराखंड सरकार ने भी अपनी तत्परता दिखाते हुए राहत कार्यों को प्राथमिकता दी है और सभी प्रभावित क्षेत्रों में सहायता भेजने का प्रयास किया है। मुख्यमंत्री ने अपने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि किसी भी मजदूर या उनके परिवार को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
उत्तराखंड में इस तरह के हिमस्खलन और आपदाओं से निपटने के लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है। बचाव कार्यों में आपदा प्रबंधन की योजना को लागू किया जा रहा है,ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके। इस कठिन समय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की नेतृत्व क्षमता ने यह स्पष्ट किया है कि सरकार और प्रशासन किसी भी आपदा के समय अपनी पूरी ताकत और संसाधनों को प्रभावित लोगों की मदद के लिए लगा देते हैं।
इस आपदा के समय में सरकार,प्रशासन और सुरक्षा बलों की त्वरित कार्रवाई के बावजूद,सबसे जरूरी बात यह है कि फँसे हुए श्रमिकों को जल्द-से-जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जाए। यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं और मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में राज्य प्रशासन इस संकट से निपटने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।