सेबी की पूर्व अध्यक्ष माधवी पुरी बुच (तस्वीर क्रेडिट@Raga3689)

सेबी की पूर्व अध्यक्ष माधवी पुरी बुच और 5 अन्य के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट ने एफआईआर करने के आदेश पर लगाई रोक

मुंबई,4 मार्च (युआईटीवी)- बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए विशेष अदालत के उस फैसले पर चार सप्ताह की रोक लगा दी, जिसमें भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को सेबी की पूर्व अध्यक्ष माधवी पुरी बुच और पाँच अन्य अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। शेयर बाजार में धोखाधड़ी और विनियामक उल्लंघन के आरोपों के बाद विशेष अदालत ने यह आदेश दिया था,लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट ने इसे अस्वीकार करते हुए कहा कि यह आदेश बिना मामले की उचित जाँच किए और अभियुक्तों की विशिष्ट भूमिकाओं को स्पष्ट किए बिना जारी किया गया था।

हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि विशेष अदालत के फैसले में “मामले की बारीकियों पर ध्यान नहीं दिया गया” और न ही अभियुक्तों द्वारा किसी गलत काम किए जाने की स्पष्ट पहचान की गई थी। न्यायमूर्ति शिवकुमार डिगे ने अपने फैसले में कहा कि 1 मार्च को विशेष अदालत द्वारा दिया गया आदेश अधूरा था और इसमें पर्याप्त आधार नहीं था।

यह निर्णय सेबी के वर्तमान निदेशकों और बीएसई के अधिकारियों द्वारा दायर की गई याचिकाओं के बाद आया,जिनमें सेबी के तीन प्रमुख निदेशक—अश्विनी भाटिया, अनंत नारायण जी और कमलेश चंद्र वार्ष्णेय,बीएसई के प्रबंध निदेशक और सीईओ राममूर्ति और सेबी के पूर्व अध्यक्ष प्रमोद अग्रवाल शामिल हैं। इन अधिकारियों ने विशेष अदालत के आदेश को चुनौती दी थी,जिसे उन्होंने अवैध और मनमाना बताया था। याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट से यह आदेश रद्द करने की अपील की थी।

विशेष अदालत का आदेश उस आवेदन के आधार पर दिया गया था,जिसमें आरोप लगाया गया था कि सेबी और अन्य संबंधित अधिकारियों ने शेयर बाजार में धोखाधड़ी और विनियामक उल्लंघन को नजरअंदाज किया और इस कारण उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। हालाँकि,सेबी ने इस आदेश पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी और इसे एक छोटे से मामले के रूप में निराधार बताया। सेबी ने कहा कि जिन अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया था,वे कथित घटनाओं के समय अपने पदों पर नहीं थे और इसलिए उन्हें इस मामले में जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।

सेबी ने अपने बयान में यह भी कहा कि यह आवेदन एक “आदतन वादी” द्वारा दायर किया गया था और यह कि एसीबी कोर्ट के आदेश ने उन्हें अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर नहीं दिया। सेबी का कहना था कि इस मामले में जरूरी सबूत और तथ्य नहीं हैं,जिनके आधार पर कार्रवाई की जा सके। उनका यह भी कहना था कि यह पूरी प्रक्रिया असंगत और अनुपयुक्त थी,जिससे पहले ही आरोप लगाए गए अधिकारियों का नाम अनावश्यक रूप से घसीटा गया।

विशेष अदालत का मानना था कि मामले में प्रथम दृष्टया कुछ ऐसे सबूत थे,जो नियामक चूक और संभावित मिलीभगत की ओर इशारा करते थे और इसलिए अदालत ने निर्देश दिया था कि इस पर निष्पक्ष जाँच की जाए। अदालत ने यह भी माना था कि इस मामले में यदि गंभीर आरोप साबित होते हैं,तो इससे शेयर बाजार और उसके विनियमन में बड़ी समस्या उत्पन्न हो सकती है,जिसके परिणामस्वरूप निवेशकों का विश्वास हिल सकता है।

इसके जवाब में बॉम्बे हाई कोर्ट ने विशेष अदालत के आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी है,जिससे आगे की कानूनी कार्रवाई में देरी हो गई है। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले की और जाँच की आवश्यकता है और सभी पक्षों को अपनी स्थिति को स्पष्ट करने का समय मिलना चाहिए। इसके परिणामस्वरूप,मामले की आगे की सुनवाई में और समय लगेगा,जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी निर्णय बिना सभी पक्षों की पूरी जानकारी के न लिया जाए।

बॉम्बे हाई कोर्ट का यह फैसला एक महत्वपूर्ण मोड़ है,क्योंकि इसने विशेष अदालत के आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी है,जिसके परिणामस्वरूप सेबी और अन्य संबंधित अधिकारियों को राहत मिली है। हालाँकि,यह मामला अब और अधिक जटिल हो सकता है,क्योंकि विशेष अदालत के आदेश को चुनौती देने के बाद भी जाँच और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।

इस फैसले के बाद,सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि आने वाले दिनों में इस मामले में क्या नया मोड़ आता है। विशेष अदालत ने जो आदेश जारी किया था,वह एक महत्वपूर्ण कदम था,क्योंकि यह शेयर बाजार के नियमों और अधिकारियों की जिम्मेदारियों के संदर्भ में एक बड़ी कानूनी लड़ाई की शुरुआत हो सकती थी। अब, हाई कोर्ट की रोक से यह सुनिश्चित होगा कि सभी तथ्य और परिस्थितियों को सही तरीके से समझा जाए,ताकि सही और निष्पक्ष फैसला लिया जा सके।

बॉम्बे हाई कोर्ट का यह आदेश इस बात का संकेत है कि किसी भी मामले में निष्पक्षता और सभी पक्षों को सुनना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस निर्णय ने एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है,जो भविष्य में न्यायिक प्रक्रियाओं में और अधिक सतर्कता और सावधानी की आवश्यकता को रेखांकित करता है।