विजय वाड्डेटीवार (तस्वीर क्रेडिट@NANA_PATOLE)

अजीत पवार गुट में शामिल होने की खबरों को विधायक विजय वाड्डेटीवार ने किया खारिज

मुंबई,5 मार्च (युआईटीवी)- महाराष्ट्र में राजनीतिक हलचल के बीच विधायक विजय वाड्डेटीवार को लेकर चर्चाएँ चल रही हैं कि वह एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजीत पवार के संपर्क में हैं और शायद जल्द ही वह उनके गुट में शामिल हो सकते हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार,वाड्डेटीवार और पवार के बीच बातचीत हो रही है और यह कयास लगाए जा रहे हैं कि वाड्डेटीवार एनसीपी में शामिल हो सकते हैं।

हालाँकि,विजय वाड्डेटीवार ने इन अफवाहों का खंडन किया और इसे सिरे से नकारते हुए कहा कि ये सब बेबुनियाद बातें हैं। वाड्डेटीवार ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि, “ये सब अफवाहें हैं,मैं कहीं नहीं जा रहा हूँ। जिस पार्टी का कोई भविष्य नहीं है,उस पार्टी में क्यों जाऊँ?” इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि, पहले भी मेरे बीजेपी में शामिल होने की अफवाह उड़ी थी और अब फिर से ऐसी अफवाहें फैल रही हैं। ये सब झूठ और मनगढ़ंत कहानी है। मैं कांग्रेस छोड़ने के बारे में सपने में भी नहीं सोच सकता।

वाड्डेटीवार ने यह भी कहा कि उनकी विचारधारा कांग्रेस से गहरी जुड़ी हुई है और उन्हें कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उनका कांग्रेस के साथ पूरा विश्वास और लगाव है। “मैं कांग्रेस का वफादार सिपाही हूँ,चाहे मेरे पास कोई भी ताकत या पद हो। उन्होंने कहा कि, चाहे राज्य में कांग्रेस की सरकार आए या नहीं,मैं कांग्रेस के साथ हूँ और हमेशा कांग्रेस में ही रहूँगा। ”

विजय वाड्डेटीवार का नाम अजीत पवार के साथ जुड़ने से महाराष्ट्र की राजनीति में कई तरह की अटकलें और अनुमान लगाए जा रहे हैं। इससे पहले भी वाड्डेटीवार ने खुले तौर पर अपनी नाराजगी का इजहार किया था और कहा था कि कांग्रेस की चुनावी रणनीतियों में सुधार की जरूरत है।

वाड्डेटीवार ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार का प्रमुख कारण सीट शेयरिंग में हुई देरी को बताया था। उनका कहना था कि सीटों के बँटवारे पर समझौता होने में हुई देरी के कारण पार्टी को चुनाव प्रचार के लिए बहुत कम समय मिल पाया। वाड्डेटीवार ने कहा कि, यदि सीट शेयरिंग का फैसला समय रहते हो जाता,तो कांग्रेस को चुनाव प्रचार के लिए बेहतर योजना बनाने और उसे प्रभावी तरीके से जनता तक पहुँचाने का समय मिल जाता।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव प्रचार की कोई स्पष्ट योजना नहीं बन पाई,क्योंकि कांग्रेस को प्रचार की शुरुआत के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला। वाड्डेटीवार के इस बयान से यह स्पष्ट हो गया कि वह पार्टी की अंदरूनी रणनीतियों को लेकर असंतुष्ट थे,खासकर सीट बँटवारे और चुनाव प्रचार की तैयारियों को लेकर।

विजय वाड्डेटीवार की नाराजगी और उनके द्वारा उठाए गए सवाल पार्टी के भीतर गहरे मुद्दों को उजागर करते हैं। उनकी इन टिप्पणियों से यह संकेत मिलता है कि वह पार्टी की नेतृत्व और चुनावी रणनीतियों से असहमत हैं। हालाँकि,उन्होंने इस बात को स्पष्ट किया कि वे कांग्रेस में बने रहेंगे,लेकिन उनके बयान यह भी दर्शाते हैं कि पार्टी के भीतर बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है।

वाड्डेटीवार का यह बयान कांग्रेस के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा सकता है, क्योंकि इससे यह जाहिर होता है कि पार्टी में वरिष्ठ नेताओं की असंतुष्टि बढ़ रही है। राजनीतिक हलचल को देखते हुए यह सवाल उठता है कि क्या वाड्डेटीवार की नाराजगी पार्टी नेतृत्व के लिए एक चुनौती बन सकती है,खासकर जब आगामी चुनावों को लेकर पार्टी के भीतर मतभेद उभर रहे हैं।

इसके साथ ही, यह भी ध्यान देने योग्य है कि विजय वाड्डेटीवार का नाम अजीत पवार के साथ जुड़ने से कांग्रेस के भीतर एक नई राजनीतिक दिशा की संभावना पर सवाल खड़े हो गए हैं। हालाँकि,वाड्डेटीवार ने इसे अफवाह बताया है,लेकिन राजनीतिक दृष्टि से यह स्थिति कांग्रेस के लिए चिंताजनक हो सकती है।

महाराष्ट्र में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वाड्डेटीवार की नाराजगी और उनके बयान से यह साफ है कि कांग्रेस को अपनी आंतरिक रणनीतियों पर फिर से विचार करने की आवश्यकता है। यदि पार्टी को आगामी चुनावों में सफलता प्राप्त करनी है,तो उसे अपनी विचारधारा और नेतृत्व पर पुनर्विचार करना होगा। वहीं,वाड्डेटीवार का कांग्रेस में बने रहना और किसी अन्य पार्टी में शामिल न होने का बयान यह दर्शाता है कि वह कांग्रेस के प्रति अपनी वफादारी को बनाए रखते हुए भी पार्टी के भीतर सुधार की उम्मीद करते हैं।