पीएम मोदी,तुलसी गबार्ड (तस्वीर क्रेडिट@iRomeshShah)

अमेरिकी खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड को पीएम मोदी ने दिया महाकुंभ का पवित्र जल,तुलसी गबार्ड ने प्रधानमंत्री को ‘तुलसी माला’ भेंट की

नई दिल्ली,18 मार्च (युआईटीवी)- अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने गबार्ड को प्रयागराज के महाकुंभ से लाया गया गंगाजल भेंट किया। गबार्ड को यह भेंट देने के साथ ही पीएम मोदी ने महाकुंभ के बारे में संक्षिप्त जानकारी भी दी। प्रधानमंत्री ने बताया कि महाकुंभ के दौरान 66 करोड़ लोगों ने त्रिवेणी संगम में स्नान किया था और उन्होंने खुद भी वहाँ डुबकी लगाई थी। यह जानकारी सुनकर गबार्ड को भारत की सांस्कृतिक धरोहर और इस महान आयोजन के महत्व का अहसास हुआ।

इस दौरान,गबार्ड ने प्रधानमंत्री मोदी को एक तुलसी माला भेंट की,जो भारतीय संस्कृति और श्रद्धा का प्रतीक मानी जाती है। यह भेंट दोनों देशों के बीच सजीव सांस्कृतिक और व्यक्तिगत संबंधों को दर्शाता है। पीएम मोदी और गबार्ड के बीच इस मुलाकात में भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत करने पर भी चर्चा की गई।

गबार्ड की यह यात्रा भारत में उनके हिंद-प्रशांत क्षेत्र की बहु-राष्ट्रीय यात्रा का हिस्सा है। उन्होंने 11 मार्च को ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि वह हिंद-प्रशांत क्षेत्र की यात्रा पर हैं,जिसमें जापान,थाईलैंड और भारत शामिल हैं। गबार्ड ने यह भी उल्लेख किया कि यात्रा के दौरान वह फ्रांस में भी कुछ समय के लिए रुकेंगी। इस यात्रा का उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा और खुफिया सहयोग को मजबूत करना है,जिससे अमेरिका और उसके साझेदार देशों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ावा मिल सके।

इससे पहले,गबार्ड ने भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी मुलाकात की थी। रिपोर्टों के अनुसार,इस मुलाकात के दौरान रक्षा मंत्री ने अमेरिकी धरती पर सक्रिय खालिस्तानी चरमपंथियों द्वारा भारतीय हितों के खिलाफ किए जा रहे काम पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने विशेष रूप से खालिस्तानी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ (एसएफजे) की गतिविधियों को लेकर भारत की सुरक्षा चिंताओं को उजागर किया। एसएफजे को भारत में प्रतिबंधित किया गया है,क्योंकि यह संगठन भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ काम कर रहा है।

राजनाथ सिंह ने अमेरिकी अधिकारियों से एसएफजे और अन्य खालिस्तानी चरमपंथी संगठनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। उन्होंने कहा कि इन संगठनों का गतिविधियों का असर भारत की सुरक्षा पर पड़ता है और अमेरिका को इन संगठनों के खिलाफ ठोस कदम उठाने चाहिए। रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि भारत ने अमेरिका से इन गैरकानूनी संगठनों के खिलाफ ठोस और तत्काल कार्रवाई की अपील की है।

गबार्ड और राजनाथ सिंह के बीच द्विपक्षीय बातचीत का मुख्य फोकस दोनों देशों के रक्षा और सुरक्षा संबंधों को बढ़ावा देना था। इस चर्चा में खुफिया जानकारी साझा करने और सुरक्षा संबंधों को और मजबूत बनाने पर विचार किया गया। गबार्ड ने भारतीय अधिकारियों को आश्वस्त किया कि अमेरिका भारत के साथ मिलकर इस तरह के खतरों से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है।

तुलसी गबार्ड ने रविवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी मुलाकात की थी। इस मुलाकात में मुख्य रूप से खुफिया जानकारी साझा करने और सुरक्षा सहयोग पर चर्चा की गई। गबार्ड और डोभाल के बीच हुई इस बैठक ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को और मजबूती दी है। भारतीय सुरक्षा मामलों पर चर्चा करने से पहले,गबार्ड ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों को पूरा करने में अमेरिका के सहयोग की आवश्यकता को स्वीकार किया। दोनों देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने का यह प्रयास आतंकवाद और अन्य सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

गबार्ड का यह भारत दौरा दोनों देशों के बीच गहरे रक्षा और खुफिया सहयोग का प्रतीक है। इसके अलावा,इस यात्रा ने यह भी दिखाया है कि अमेरिका भारत के साथ अपनी साझेदारी को और मजबूत करने के लिए तैयार है,खासकर जब बात क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद से निपटने की हो।

इस मुलाकात के बाद यह साफ है कि अमेरिका और भारत के बीच रक्षा और खुफिया सहयोग को और अधिक प्रगति मिलने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है,बल्कि यह ग्लोबल रणनीतिक दृष्टिकोण से भी बेहद असरदार हो सकता है।