नई दिल्ली,19 मार्च (युआईटीवी)- लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा महाकुंभ पर दिए गए बयान पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री के विचारों का समर्थन करते हैं,लेकिन उन्होंने महाकुंभ भगदड़ में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि नहीं दी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान विपक्ष को अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया और यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि, “मैं प्रधानमंत्री मोदी की बातों का समर्थन करना चाहता था,क्योंकि कुंभ हमारी परंपरा,संस्कृति और इतिहास का हिस्सा है,लेकिन मुझे यह महसूस हुआ कि प्रधानमंत्री ने महाकुंभ में हुई दुखद घटनाओं पर, जहाँ कई लोग मारे गए,उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित नहीं की। यह एक बड़ी चूक थी।” उन्होंने आगे कहा कि महाकुंभ में जो युवा श्रद्धालु आए थे,उन्हें रोजगार की आवश्यकता है और प्रधानमंत्री को इस पर भी कुछ शब्द बोलने चाहिए थे। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नेता प्रतिपक्ष को अपनी बात रखने का मौका दिया जाना चाहिए,लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने यह टिप्पणी करते हुए कहा, “यह न्यू इंडिया है, जहाँ विपक्ष को बोलने का मौका नहीं मिलता।”
कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी राहुल गांधी के विचारों का समर्थन किया और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी महाकुंभ पर सकारात्मक बात कर रहे थे, लेकिन विपक्ष को भी अपनी भावनाएँ और विचार रखने का मौका मिलना चाहिए था। प्रियंका गांधी ने कहा, “विपक्ष की भी महाकुंभ के प्रति अपनी भावनाएँ हैं और हमें अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए था। हमें दो मिनट बोलने की अनुमति दी जानी चाहिए थी।” प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि अगर विपक्ष अपनी बात रखता है, तो उसमें किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए,क्योंकि लोकतंत्र में सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अधिकार है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाकुंभ पर अपने संबोधन में देश के नागरिकों को बधाई दी थी और कहा था कि महाकुंभ की सफलता में सभी नागरिकों,समाज के विभिन्न व्यक्तियों और समूहों का योगदान अहम था। उन्होंने महाकुंभ को सफल बनाने में सरकार,समाज और इसके विभिन्न कार्यकर्ताओं के योगदान को सराहा। पीएम मोदी ने विशेष रूप से प्रयागराज के नागरिकों और देशभर के श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया,जिनकी भागीदारी ने महाकुंभ को ऐतिहासिक सफलता दिलाई।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में महाकुंभ के आयोजन की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा, “महाकुंभ हमारे देश की एकता,परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। यह हमारे समाज की शक्ति और एकजुटता को दर्शाता है।” उन्होंने महाकुंभ के सफल आयोजन में विभिन्न व्यक्तियों और संगठनों के योगदान की सराहना की और यह भी कहा कि यह एक सामूहिक प्रयास था।
प्रधानमंत्री मोदी का भाषण समाप्त होते ही विपक्षी सांसदों ने वेल में जाकर हंगामा शुरू कर दिया और महाकुंभ पर सवाल उठाने की माँग की। इसके बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने स्पष्ट रूप से कहा कि नियम 372 के तहत प्रधानमंत्री या कोई मंत्री सदन में बिना सवाल के वक्तव्य दे सकते हैं और इस दौरान सदन में कोई प्रश्न नहीं पूछा जा सकता। इसके बावजूद विपक्षी सांसदों ने अपनी बात रखने की कोशिश की,जिसे स्पीकर ने स्वीकार नहीं किया।
लोकसभा में हुए इस घटनाक्रम पर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने अपनी नाराजगी जताई और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के बयान के बाद विपक्ष को बोलने का मौका नहीं दिया गया,जो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष को अपनी बात रखने का अवसर मिलता,तो यह और भी बेहतर होता और इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत होती।
इस पूरे घटनाक्रम ने संसद में विपक्ष की आवाज को दबाने के आरोपों को हवा दी है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार ने विपक्ष को अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया,जो लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का उल्लंघन है। वहीं,प्रधानमंत्री मोदी ने महाकुंभ के सफल आयोजन के लिए सभी की सराहना की और कहा कि यह आयोजन भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर का अहम हिस्सा है। उन्होंने महाकुंभ के आयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए इसे पूरे देश के लिए गर्व का विषय बताया।
महाकुंभ पर प्रधानमंत्री मोदी के बयान को लेकर विपक्ष ने सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई है। कांग्रेस सांसदों ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने महाकुंभ में हुई जानमाल की हानि पर श्रद्धांजलि नहीं अर्पित की और विपक्ष को अपनी बात रखने का मौका भी नहीं दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने संसद में विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिशों को उजागर किया है,जो लोकतंत्र में एक स्वस्थ संवाद की अहमियत को कम करता है।