ठग लाइफ (तस्वीर क्रेडिट@Mass_Maharaja)

कमल हासन की फिल्म ‘ठग लाइफ’ पर सुप्रीम कोर्ट में कर्नाटक सरकार का हलफनामा

नई दिल्ली,19 जून (युआईटीवी)- सुपरस्टार कमल हासन की आगामी फिल्म ‘ठग लाइफ’ इन दिनों विवादों में घिरी हुई है। इसकी वजह बनी है कमल हासन की एक टिप्पणी,जो उन्होंने फिल्म के प्रमोशन के दौरान भाषाई मुद्दे पर दी थी। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच चुका है,जहाँ कोर्ट इस विवाद को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून व्यवस्था के दृष्टिकोण से देख रहा है। कोर्ट इस मामले में गुरुवार को सुनवाई करेगा और कर्नाटक सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है।

कमल हासन ने 28 मई को चेन्नई में एक कार्यक्रम के दौरान एक बयान दिया था जिसमें उन्होंने कहा था, “कन्नड़ भाषा का जन्म तमिल से हुआ है।”

यह टिप्पणी कुछ लोगों को आपत्तिजनक लगी और इसके विरोध में कर्नाटक में प्रदर्शन शुरू हो गए। कुछ संगठनों ने फिल्म की रिलीज को रोकने की माँग की और थिएटर मालिकों को धमकाया गया। इसी के चलते ‘ठग लाइफ’ की रिलीज पर संकट खड़ा हो गया।

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 17 जून को कर्नाटक हाईकोर्ट में दाखिल याचिका को अपने पास ट्रांसफर कर लिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में भीड़ को यह अधिकार नहीं है कि वह कानून को अपने हाथ में लेकर फिल्म की रिलीज को बाधित करे।

कोर्ट का कहना था कि, “सेंसर बोर्ड से प्रमाणित फिल्म को रिलीज होने से नहीं रोका जा सकता। किसी को फिल्म देखनी है या नहीं,यह व्यक्तिगत निर्णय है,लेकिन भीड़ के डर से थिएटर मालिकों को फिल्म रिलीज से पीछे नहीं हटना चाहिए।”

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कर्नाटक सरकार ने 18 जून तक हलफनामा दाखिल करते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की। सरकार ने कहा कि वह राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह तैयार है और यदि फिल्म ‘ठग लाइफ’ रिलीज होती है,तो वह थिएटर मालिकों,कलाकारों,निर्देशकों,निर्माताओं और दर्शकों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।

सरकार ने हलफनामे में यह भी कहा कि, राज्य में ‘कानून का शासन’ बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और सरकार सभी नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।आगे उन्होंने कहा कि फिल्म से जुड़े सभी हितधारकों को पर्याप्त सुरक्षा दी जाएगी और कोई भी संगठन या व्यक्ति कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह साफ किया कि फिल्म ‘ठग लाइफ’ रिलीज होनी ही चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि, “भीड़तंत्र को नियंत्रित करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है,न कि सिनेमाघर मालिकों की। हम ऐसा माहौल नहीं बना सकते,जहाँ धमकी के डर से रचनात्मक कार्य बाधित हो।”

इस प्रकार,कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और रचनात्मकता की सुरक्षा लोकतंत्र में सर्वोपरि है।

कमल हासन की टिप्पणी ने एक बार फिर दक्षिण भारत में भाषाई पहचान के मुद्दे को सतह पर ला दिया है। तमिल और कन्नड़ भाषाएँ द्रविड़ परिवार की भाषाएँ हैं और दोनों के अपने ऐतिहासिक महत्व और सांस्कृतिक गर्व हैं। ऐसे में किसी भी सार्वजनिक हस्ती की भाषा से जुड़ी टिप्पणी को लेकर संवेदनशीलता स्वाभाविक है। हालाँकि,यह विवाद धीरे-धीरे राजनीतिक रंग भी लेने लगा है,जहाँ कुछ समूहों ने इसे भाषाई अस्मिता से जोड़ दिया है।

फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई लोग सुप्रीम कोर्ट के इस रुख का स्वागत कर रहे हैं। उनका मानना है कि यदि रचनात्मक कार्यों को बार-बार ऐसी धमकियों का सामना करना पड़ेगा,तो यह सृजनात्मक स्वतंत्रता पर कुठाराघात होगा। सेंसर बोर्ड से पास हो चुकी फिल्म को रिलीज से रोकना,संविधान में मिले अधिकारों का हनन है।

कमल हासन की फिल्म ‘ठग लाइफ’ पर उपजे विवाद और सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना राज्य की जिम्मेदारी है,न कि भीड़ के सामने झुक जाना। अदालत का यह फैसला एक साहसिक और लोकतांत्रिक संकेत है कि भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को संरक्षित किया जाएगा।

अब देखने वाली बात यह है कि गुरुवार को होने वाली सुनवाई में कोर्ट क्या अंतिम आदेश देता है और क्या यह मामला सुप्रीम कोर्ट के उस दृष्टिकोण को और मजबूत करेगा जो रचनात्मकता और कानून के शासन की रक्षा करता है। मगर फिलहाल, यह साफ है कि फिल्म ‘ठग लाइफ’ की रिलीज को रोकना अब आसान नहीं होगा।