नई दिल्ली,14 जुलाई (युआईटीवी)- पूर्व नाइजीरियाई राष्ट्रपति मुहम्मदू बुहारी का रविवार को लंदन में 82 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे इलाज के लिए कुछ समय से लंदन में भर्ती थे। उनके निधन की खबर से न केवल नाइजीरिया,बल्कि पूरा अफ्रीकी महाद्वीप और वैश्विक राजनीतिक समुदाय शोकाकुल हो गया है।
बुहारी के निधन पर दुनियाभर के नेताओं ने अपनी संवेदनाएँ व्यक्त की हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके निधन पर गहरा शोक प्रकट किया और उन्हें भारत-नाइजीरिया मैत्री का सच्चा समर्थक बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “नाइजीरिया के पूर्व राष्ट्रपति मुहम्मदू बुहारी के निधन से अत्यंत दुखी हूँ। मुझे विभिन्न अवसरों पर हुई हमारी मुलाकातें और बातचीत याद आती हैं। उनकी बुद्धिमत्ता,गर्मजोशी और भारत-नाइजीरिया मैत्री के प्रति अटूट प्रतिबद्धता थी। मैं भारत के 1.4 अरब लोगों के साथ उनके परिवार,नाइजीरिया की जनता और सरकार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूँ।”
Deeply saddened by the passing of former President of Nigeria Muhammadu Buhari. I fondly recall our meetings and conversations on various occasions. His wisdom, warmth and unwavering commitment to India–Nigeria friendship stood out. I join the 1.4 billion people of India in…
— Narendra Modi (@narendramodi) July 14, 2025
नाइजीरिया के वर्तमान राष्ट्रपति बोला अहमद टीनुबू ने इस दुखद घटना पर शोक जताते हुए देश में राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। उन्होंने उपराष्ट्रपति काशिम शेट्टिमा को लंदन रवाना किया,ताकि वे बुहारी के पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक स्वदेश ला सकें।
सरकार ने राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुकाने का आदेश दिया है और आने वाले दिनों में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की तैयारियाँ की जा रही हैं।
मुहम्मदू बुहारी का जन्म 17 दिसंबर 1942 को हुआ था। उन्होंने नाइजीरिया की सेना में एक लंबा करियर बिताया। 1983 में,एक सैन्य तख्तापलट के जरिए वे नाइजीरिया के सैन्य शासक बने और 1985 तक सत्ता में रहे।
हालाँकि,सैन्य शासन के बाद जब नाइजीरिया ने लोकतंत्र की ओर वापसी की,तो बुहारी ने भी राजनीति की मुख्यधारा में आकर लोकतांत्रिक तरीके से राष्ट्रपति बनने की राह चुनी। वर्ष 2015 में वे विपक्षी दल के उम्मीदवार के रूप में राष्ट्रपति चुने गए, जो कि नाइजीरिया के इतिहास में पहली बार हुआ था,जब किसी विपक्षी नेता ने सत्ता में बैठे राष्ट्रपति को हराया।
2015 में पहली बार राष्ट्रपति बनने के बाद, 2019 में वे पुनः चुने गए और उन्होंने 29 मई 2023 को बोला टीनुबू को सत्ता सौंपकर अपने दो कार्यकाल पूरे किए।
बुहारी के कार्यकाल को तीन मुख्य प्राथमिकताओं के लिए जाना जाता है:
1) सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना:
उन्होंने उत्तर-पूर्वी राज्यों में सक्रिय आतंकवादी संगठन बोको हराम के खिलाफ सशक्त सैन्य अभियान चलाया। इन अभियानों से कुछ हद तक आतंक पर अंकुश लगा, हालाँकि,चुनौतियाँ लगातार बनी रहीं।
2) भ्रष्टाचार पर नियंत्रण:
बुहारी ने नाइजीरिया के इतिहास में फैले व्यवस्थित भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की। उन्होंने विदेशों में जमा काले धन की वापसी के लिए कानूनी और कूटनीतिक प्रयास किए। उनकी सरकार ने सैकड़ों करोड़ डॉलर की लूट हुई संपत्ति वापस देश में लाने में सफलता पाई।
3) अर्थव्यवस्था का विविधीकरण:
वे नाइजीरिया की तेल-आधारित अर्थव्यवस्था को विविधता देने के पक्षधर रहे। उन्होंने कृषि,बुनियादी ढाँचे और तकनीकी निवेश को बढ़ावा दिया। उनकी नीतियों के चलते कई ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, बिजली और सिंचाई योजनाओं का विस्तार हुआ।
बुहारी का कार्यकाल पूरी तरह से आसान नहीं था। वे दो बार आर्थिक मंदी के दौर से गुजरे, साथ ही बढ़ती बेरोजगारी और असुरक्षा जैसी आंतरिक समस्याएँ भी सामने रहीं। इसके बावजूद वे एक सशक्त,अनुशासित और राष्ट्रहित में फैसले लेने वाले नेता के रूप में स्थापित हुए।
मुहम्मदू बुहारी ने नाइजीरिया को वैश्विक मंचों पर एक सशक्त राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत किया। वे अफ्रीकी यूनियन,संयुक्त राष्ट्र और जी -77 जैसे मंचों पर स्थायी शांति, विकास और जलवायु परिवर्तन के मुद्दों पर सक्रिय रहे। भारत के साथ उनके नेतृत्व में द्विपक्षीय व्यापार और रक्षा सहयोग को भी नई ऊंचाइयां मिलीं।
मुहम्मदू बुहारी को उनकी ईमानदारी,अनुशासनप्रियता और राष्ट्रभक्ति के लिए याद किया जाएगा। वे अफ्रीका के उन चुनिंदा नेताओं में से एक रहे,जिन्होंने सैन्य तानाशाह से लोकतांत्रिक नेता तक का सफर तय किया और सत्ता को लोकतांत्रिक तरीके से हस्तांतरित किया।
उनका जाना केवल नाइजीरिया के लिए नहीं,बल्कि पूरे अफ्रीकी उपमहाद्वीप और वैश्विक राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
मुहम्मदू बुहारी एक सैनिक,एक राष्ट्रपति और एक राष्ट्रवादी नेता थे। उनके सिद्धांत, संघर्ष और योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे।
