अच्युत पोतदार (तस्वीर क्रेडिट@UjwalaModakBJP)

वरिष्ठ अभिनेता अच्युत पोतदार का 91 वर्ष की उम्र में निधन,बॉलीवुड और मराठी सिनेमा में शोक की लहर

मुंबई,20 अगस्त (युआईटीवी)- भारतीय सिनेमा जगत ने एक और महान कलाकार को खो दिया है। बॉलीवुड और मराठी फिल्मों के वरिष्ठ अभिनेता अच्युत पोतदार का 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। लंबे समय से वे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे और अंततः बुधवार को उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। उनके जाने से न केवल फिल्म इंडस्ट्री बल्कि उनके चाहने वालों के बीच भी गहरा शोक फैल गया है। अच्युत पोतदार ने चार दशकों से अधिक लंबे करियर में हिंदी और मराठी सिनेमा को अनगिनत यादगार किरदार दिए।

अभिनेता के निधन की खबर सामने आने के बाद इंडस्ट्री के बड़े सितारे और निर्देशक उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। आमिर खान प्रोडक्शन ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल पर पोस्ट साझा करते हुए गहरा दुख व्यक्त किया। पोस्ट में लिखा गया, “अच्युत जी के निधन की खबर सुनकर बहुत दुख हुआ। वह न केवल एक शानदार अभिनेता थे,बल्कि एक अच्छे इंसान और बेहतरीन साथी भी थे। हम आपको बहुत याद करेंगे,अच्युत जी। उनके परिवार को हमारी गहरी संवेदनाएँ।” आमिर खान के इस संदेश से स्पष्ट है कि पोतदार ने सिर्फ अभिनय के जरिए ही नहीं,बल्कि अपनी सादगी और व्यक्तित्व से भी सभी का दिल जीता था।

इसी तरह अभिनेता जैकी श्रॉफ ने भी सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएँ साझा कीं। उन्होंने अपनी और अच्युत पोतदार की एक पुरानी तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “अच्युत जी के साथ यह तस्वीर हमेशा मेरे दिल में रहेगी।” यह वाक्य पोतदार और उनके समकालीन कलाकारों के बीच गहरे संबंधों को दर्शाता है। निर्देशक हंसल मेहता ने भी अच्युत पोतदार को याद करते हुए लिखा कि वे उन्हें पहली बार ‘अंगार’ फिल्म में जग्गू दादा के पापा के किरदार में देखकर उनके प्रशंसक बन गए थे। उनका मशहूर डायलॉग ‘ए जग्गू’ हंसल मेहता को आज भी याद है। उन्होंने आगे लिखा कि अपनी पहली फिल्म ‘जयते’ में उन्हें पोतदार को निर्देशित करने का सौभाग्य मिला था और उस दौरान उन्होंने महसूस किया कि उनकी कॉमिक टाइमिंग और संवाद अदायगी का अंदाज लाजवाब था।

निर्देशक सुधीर मिश्रा ने भी अपने सोशल मीडिया पोस्ट में अच्युत पोतदार को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा, “वे बहुत अच्छे अभिनेता और शानदार इंसान थे। वे सईद मिर्जा के साथ अक्सर काम करते थे। मुझे उन्हें ‘अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है’ में देखना याद है। एक पूरी दुनिया और उसके लोग धीरे-धीरे गायब हो रहे हैं।” सुधीर मिश्रा का यह कथन इस बात की ओर इशारा करता है कि अच्युत पोतदार सिर्फ एक कलाकार नहीं थे,बल्कि वे उस दौर का अहम हिस्सा थे,जब भारतीय सिनेमा सामाजिक सरोकारों और वास्तविक कहानियों को पर्दे पर लाने की कोशिश कर रहा था।

अच्युत पोतदार ने अपने करियर में 125 से अधिक फिल्मों में काम किया। हिंदी और मराठी फिल्मों के साथ-साथ उन्होंने कई लोकप्रिय टीवी शोज में भी अभिनय किया। उनकी लोकप्रिय फिल्मों में ‘आक्रोश’,‘अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है’,‘अर्ध सत्य’, ‘तेजाब’,‘परिंदा’, ‘राजू बन गया जेंटलमैन’, ‘दिलवाले’, ‘रंगीला’, ‘वास्तव’, ‘हम साथ साथ हैं’, ‘परिनीता’, ‘लगे रहो मुन्ना भाई’, ‘दबंग 2’, ‘3 इडियट्स’ और ‘वेंटिलेटर’ शामिल हैं। इन फिल्मों में उनका किरदार कभी गंभीर तो कभी हल्का-फुल्का रहा,लेकिन हर बार उन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया।

कई लोग उन्हें ‘3 इडियट्स’ फिल्म के प्रोफेसर के रूप में याद करते हैं,तो कुछ दर्शकों को वे ‘लगे रहो मुन्ना भाई’ में उनकी उपस्थिति से परिचित हैं। वहीं मराठी सिनेमा के दर्शकों के बीच भी उन्होंने एक विशेष पहचान बनाई। उनकी बहुमुखी प्रतिभा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने कॉमेडी,ड्रामा,थ्रिलर और फैमिली ड्रामा,हर तरह की फिल्मों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और हर बार दर्शकों को संतुष्ट किया।

फिल्मों में आने से पहले अच्युत पोतदार का जीवन बिल्कुल अलग दिशा में चल रहा था। वे भारतीय सशस्त्र सेना में कार्यरत रह चुके थे और उसके बाद उन्होंने इंडियन ऑयल कंपनी में भी काम किया। उनका अभिनय करियर 1980 के दशक में शुरू हुआ,जब उन्होंने फिल्मों और टीवी सीरियल्स में अभिनय करना शुरू किया। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक स्थायी नौकरी और जिम्मेदारियों को निभाते हुए की,लेकिन उनका जुनून उन्हें अंततः अभिनय की ओर ले आया। इसके बाद वे लगातार सक्रिय रहे और धीरे-धीरे सिनेमा जगत में एक विश्वसनीय और सम्मानित नाम बन गए।

अच्युत पोतदार की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे किसी भी भूमिका को बड़ी सहजता से निभा लेते थे। चाहे पिता का किरदार हो,अध्यापक का,ऑफिस कर्मचारी का या फिर किसी गंभीर सामाजिक मुद्दे से जुड़ा चरित्र,उन्होंने हर किरदार में जान डाल दी। यही वजह है कि वे कभी मुख्य नायक न होते हुए भी फिल्मों में एक स्थायी छाप छोड़ते रहे। उनका अभिनय इस बात का प्रमाण है कि अच्छे कलाकारों के लिए पर्दे पर स्क्रीन स्पेस की लंबाई नहीं,बल्कि उनकी अदायगी की गहराई मायने रखती है।

उनके निधन से फिल्म इंडस्ट्री में एक खालीपन आ गया है,जिसे भर पाना मुश्किल होगा। वे उन दुर्लभ कलाकारों में से थे,जिन्होंने न केवल फिल्मों में काम किया बल्कि टीवी के जरिए भी आम दर्शकों से जुड़ाव बनाए रखा। उनके चाहने वाले उन्हें हमेशा एक विनम्र,सादगीपूर्ण और जीवंत इंसान के रूप में याद करेंगे। अच्युत पोतदार का जाना भारतीय सिनेमा के लिए एक अपूरणीय क्षति है और उनकी यादें हमेशा उनके काम और उनके किरदारों के माध्यम से जीवित रहेंगी।