नई दिल्ली,21 अगस्त (युआईटीवी)- ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका के बीच खेले गए पहले वनडे मैच में ऑस्ट्रेलियाई लेग स्पिनर एडम जांपा चर्चा का विषय बने,लेकिन इस बार वजह उनके प्रदर्शन से ज्यादा उनका मैदान पर किया गया अनुचित व्यवहार रहा। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने उन्हें आचार संहिता के उल्लंघन का दोषी पाया और आधिकारिक तौर पर फटकार लगाई है। साथ ही उनके अनुशासनात्मक रिकॉर्ड में एक डिमेरिट अंक भी जोड़ दिया गया है। यह घटना मंगलवार को कैजली स्टेडियम में उस समय घटी जब साउथ अफ्रीका की पारी का 37वां ओवर चल रहा था।
जांपा अपनी गेंद पर मिसफील्ड और उसके बाद हुए ओवरथ्रो से बेहद नाराज़ हो गए थे। इस दौरान उन्होंने गुस्से में अभद्र भाषा का प्रयोग किया। मैदान पर लगे स्टंप माइक ने यह पूरा घटनाक्रम रिकॉर्ड कर लिया और वह प्रसारण के दौरान दर्शकों तक पहुँच गया। इसके बाद आईसीसी ने मामले को गंभीरता से लिया और नियमों के मुताबिक उन पर कार्रवाई की। परिषद ने साफ किया कि जांपा ने आचार संहिता के अनुच्छेद 2.3 का उल्लंघन किया है,जो विशेष रूप से खिलाड़ियों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मैचों के दौरान अनुचित और आपत्तिजनक भाषा प्रयोग से संबंधित है।
आईसीसी ने बुधवार को बयान जारी कर कहा कि 24 महीनों की अवधि में यह जांपा का पहला अपराध है,इसीलिए उनके खिलाफ सिर्फ आधिकारिक फटकार और एक डिमेरिट अंक की कार्रवाई की गई। परिषद के अनुसार लेवल 1 उल्लंघन की श्रेणी में आने वाले अपराधों के लिए न्यूनतम सजा आधिकारिक चेतावनी होती है,जबकि अधिकतम सजा खिलाड़ी की मैच फीस का 50 प्रतिशत कटौती और एक से दो डिमेरिट अंक तक हो सकती है। चूँकि,जांपा ने बिना किसी आपत्ति के अपना अपराध स्वीकार कर लिया,इसलिए इस मामले में औपचारिक सुनवाई की आवश्यकता नहीं पड़ी।
गौरतलब है कि क्रिकेट के नियम खिलाड़ियों को सिर्फ खेल भावना के अनुरूप व्यवहार करने की ही नहीं,बल्कि मैदान पर उनके शब्दों और क्रियाओं की भी जिम्मेदारी लेने के लिए बाध्य करते हैं। खासकर ऐसे समय में जब मैच का हर क्षण टीवी प्रसारण के माध्यम से करोड़ों दर्शकों तक पहुँचता है,तब इस तरह की घटनाएँ खिलाड़ियों की छवि और खेल की गरिमा दोनों को प्रभावित करती हैं।
अब अगर मैच की बात करें,तो 19 अगस्त को केर्न्स में खेले गए इस मुकाबले में साउथ अफ्रीकी टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 50 ओवरों में आठ विकेट खोकर 296 रन बनाए। टीम के लिए एडन मार्करम ने सबसे ज्यादा 82 रन बनाए,जबकि कप्तान टेंबा बावुमा ने 65 रन की उपयोगी पारी खेली। इनके अलावा युवा बल्लेबाज मैथ्यू ब्रीत्जके ने भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 57 रन जोड़े। इन तीनों की पारियों की बदौलत साउथ अफ्रीका ने मजबूत स्कोर खड़ा किया।
ऑस्ट्रेलिया की ओर से गेंदबाज ट्रेविस हेड सबसे सफल रहे। उन्होंने चार विकेट झटके और साउथ अफ्रीका की बल्लेबाजी पर काफी हद तक अंकुश लगाया। बेन ड्वारशुइस को भी दो सफलताएँ मिलीं,जबकि जांपा ने 10 ओवरों में 58 रन देकर सिर्फ एक विकेट हासिल किया। हालाँकि,उनकी गेंदबाजी में असर की कमी साफ दिखाई दी।
296 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम शुरुआत से ही दबाव में दिखी। विकेट नियमित अंतराल पर गिरते रहे और बल्लेबाज पिच पर टिककर खेल नहीं सके। कप्तान मिचेल मार्श ने जरूर मोर्चा संभाला और 88 रनों की पारी खेलकर टीम को उम्मीद दी,लेकिन अन्य बल्लेबाज उनका साथ नहीं दे सके। पूरी टीम 40.5 ओवरों में 198 रन पर ढेर हो गई और उसे 98 रनों की करारी हार का सामना करना पड़ा।
साउथ अफ्रीका की ओर से केशव महाराज गेंदबाजी के हीरो साबित हुए। उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए पाँच विकेट चटकाए और ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों की रीढ़ तोड़ दी। उनकी गेंदबाजी के आगे ऑस्ट्रेलियाई टीम पूरी तरह संघर्ष करती नजर आई।
मैच के बाद जांपा पर की गई कार्रवाई ने इस हार की निराशा को और बढ़ा दिया। एक ओर जहाँ ऑस्ट्रेलियाई टीम सीरीज की अच्छी शुरुआत करने में नाकाम रही,वहीं दूसरी ओर उसके अहम गेंदबाज पर आईसीसी का अनुशासनात्मक शिकंजा कस गया। विशेषज्ञों का मानना है कि जांपा जैसे अनुभवी खिलाड़ी से इस तरह के आचरण की उम्मीद नहीं की जाती। खासकर जब वे टीम के प्रमुख गेंदबाज हों और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत माने जाते हों,तब उनका यह रवैया निराशाजनक है।
आईसीसी की इस कार्रवाई से एक बार फिर यह संदेश गया है कि चाहे खिलाड़ी कितना भी बड़ा क्यों न हो,आचार संहिता का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। क्रिकेट को सज्जनों का खेल कहा जाता है और इसमें खिलाड़ियों के व्यवहार पर विशेष जोर दिया जाता है। मैदान पर किसी भी प्रकार का अनुचित आचरण,चाहे वह भाषा से जुड़ा हो या शारीरिक हावभाव से,आईसीसी की निगाहों से बच नहीं सकता।
जांपा ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है,जिससे यह स्पष्ट है कि उन्होंने गलती मान ली है। हालाँकि,यह डिमेरिट अंक उनके अनुशासनात्मक रिकॉर्ड में दर्ज रहेगा और भविष्य में किसी और गलती की स्थिति में उन्हें और कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल उनके लिए यह चेतावनी है कि मैदान पर संयम और खेल भावना को बनाए रखना ही उनके करियर और टीम दोनों के लिए हितकारी होगा।
