पीवी सिंधु (तस्वीर क्रेडिट@irvpaswan)

बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप में पीवी सिंधु की धमाकेदार जीत,वर्ल्ड नंबर-2 खिलाड़ी को दी मात,क्वार्टर फाइनल में पहुँची

पेरिस,29 अगस्त (युआईटीवी)- भारत की बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु ने बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप 2025 में अपने करियर की एक और यादगार जीत हासिल की है। बुधवार को खेले गए मुकाबले में उन्होंने चीन की वर्ल्ड नंबर-2 खिलाड़ी झी यी वांग को सीधे सेटों में पराजित करते हुए महिला सिंगल्स के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया। यह जीत सिंधु के लिए बेहद खास है,क्योंकि 2021 के बाद पहली बार उन्होंने इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के अंतिम आठ में जगह बनाई है।

पेरिस के इंडोर स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले की शुरुआत से ही सिंधु का आत्मविश्वास गजब का नजर आया। उन्होंने पहले सेट को 21-17 से अपने नाम किया और फिर दूसरे सेट में और भी आक्रामक खेल दिखाते हुए 21-15 से जीत दर्ज की। खास बात यह रही कि सिंधु ने वांग को मैच के दौरान किसी भी पल वापसी का मौका नहीं दिया। कोर्ट पर उनकी फुर्ती,नेट पर नियंत्रण और लंबी रैलियों में धैर्य उनके पुराने सुनहरे दिनों की याद दिला रहे थे।

यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि झी यी वांग बीते एक साल से शानदार फॉर्म में चल रही हैं। उन्होंने हाल ही में चाइना ओपन का खिताब जीता था और छह बड़े फाइनल मुकाबलों में जगह बनाई थी। ऐसे में सिंधु का सीधा सेटों में जीत दर्ज करना उनके खेल में वापसी और आत्मविश्वास का बड़ा संकेत है। वांग के खिलाफ यह जीत न केवल क्वार्टर फाइनल तक पहुँचने का टिकट है,बल्कि यह भी साबित करती है कि सिंधु अभी भी बैडमिंटन की दुनिया में शीर्ष खिलाड़ियों को चुनौती देने की क्षमता रखती हैं।

सिंधु का प्रदर्शन इस पूरे टूर्नामेंट में शानदार रहा है। उन्होंने अब तक तीन मुकाबले खेले हैं और खास बात यह है कि किसी भी मैच में उन्हें एक भी सेट गंवाना नहीं पड़ा है। उनकी फिटनेस,आक्रामक शॉट्स और धैर्यपूर्ण खेल ने भारतीय प्रशंसकों की उम्मीदों को एक बार फिर जीवित कर दिया है कि शायद वे एक बार फिर विश्व चैंपियनशिप का ताज भारत को दिला सकें। सिंधु ने 2019 में इस टूर्नामेंट का खिताब जीता था और भारत को बैडमिंटन की दुनिया में गौरव दिलाया था।

अब 29 अगस्त को क्वार्टर फाइनल में सिंधु का सामना इंडोनेशिया की वर्ल्ड नंबर-9 खिलाड़ी कुसुमा वर्दानी से होगा। यह मुकाबला बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है क्योंकि वर्दानी इस सीजन में बेहतरीन फॉर्म में रही हैं। उन्होंने अब तक 27 मुकाबले जीते हैं,जबकि सिंधु इस साल सिर्फ 9 मैच ही जीत पाई हैं। आँकड़ों के लिहाज से वर्दानी का पलड़ा भारी नजर आता है,लेकिन सिंधु का अनुभव और बड़े टूर्नामेंटों का दबाव झेलने की क्षमता उन्हें एक खतरनाक प्रतिद्वंद्वी बनाती है।

भारतीय बैडमिंटन प्रशंसक लंबे समय से सिंधु की वापसी का इंतजार कर रहे थे। पिछले कुछ वर्षों में चोटों और फॉर्म की कमी ने उनके करियर की रफ्तार को धीमा कर दिया था। 2021 के बाद से वह किसी बड़े टूर्नामेंट में स्थायी प्रदर्शन नहीं कर पा रही थीं। कई बार शुरुआती राउंड में बाहर होने से उनके आत्मविश्वास को भी झटका लगा,लेकिन इस बार बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप में जिस अंदाज में उन्होंने खेल दिखाया है,उससे साफ है कि सिंधु एक बार फिर अपने पुराने रंग में लौट आई हैं।

उनकी जीत ने भारतीय बैडमिंटन में नई ऊर्जा का संचार किया है। सिंधु के प्रदर्शन को देखकर युवा खिलाड़ी भी प्रेरित हो रहे हैं। उनके लिए यह टूर्नामेंट न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि का प्रतीक है,बल्कि भारतीय बैडमिंटन की उम्मीदों का भी प्रतीक है। यदि सिंधु इस लय को बनाए रखती हैं,तो निश्चित ही वह सेमीफाइनल और फाइनल तक का सफर तय कर सकती हैं।

सिंधु की यह जीत एक संदेश भी देती है कि उम्र और अनुभव के बावजूद यदि दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत हो तो किसी भी स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है। उन्होंने मैच के बाद कहा कि यह जीत उनके लिए विशेष है,क्योंकि लंबे समय से वह ऐसी जीत की तलाश कर रही थीं। उन्होंने कहा कि वांग जैसी मजबूत खिलाड़ी को हराना आसान नहीं था,लेकिन उन्होंने अपनी रणनीति पर पूरा ध्यान रखा और धैर्य बनाए रखा।

भारतीय खेल जगत में इस जीत का जश्न मनाया जा रहा है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि सिंधु अगर इस आत्मविश्वास को आगे के मैचों में भी बनाए रखती हैं,तो उनके पास दूसरा विश्व चैंपियनशिप खिताब जीतने का सुनहरा अवसर होगा।

अब सबकी नजरें क्वार्टर फाइनल मुकाबले पर टिकी हैं,जहाँ सिंधु का सामना इंडोनेशिया की कुसुमा वर्दानी से होगा। यह मुकाबला केवल सेमीफाइनल की राह नहीं खोलेगा,बल्कि यह भी तय करेगा कि सिंधु एक बार फिर विश्व बैडमिंटन में अपना दबदबा कायम कर पाएँगी या नहीं। फिलहाल भारतीय प्रशंसक यही उम्मीद कर रहे हैं कि पेरिस में सिंधु का यह अभियान गौरवशाली अंत तक पहुँचे और एक बार फिर भारत का तिरंगा बैडमिंटन की दुनिया में ऊँचा लहराए।